सागर-जबलपुर स्टेट हाईवे पर फिर लगाना पड़ेगा 25 किमी का चक्कर.. झापन घाट पुल क्षेत्र में फिर गहराया आवागमन संकट..

 झापन घाट से बारिश में फिर बंद हो जाएगा आवागमन

दमोह। सागर-जबलपुर स्टेट हाईवे पर झापन घाट पुल क्षेत्र में एक बार फिर आवागमन संकट गहराने लगा है। पिछले वर्ष जुलाई में अत्यधिक पानी गिरने के कारण इस पुल का स्लेप बह गया था क्षेत्र में  हो रही बारिश के बीच स्थानीय लोगों को आशंका है कि यदि आगामी दिनों में तेज वर्षा हुई तो यह मार्ग पूरी तरह बंद हो सकता है। इससे सागर-जबलपुर मार्ग पर आवागमन प्रभावित होने के साथ ही आसपास के सैकड़ों गांवों के लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा।
 गौरतलब है कि पूर्व में झापन घाट का पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण यह मार्ग लंबे समय तक बाधित रहा था। उस दौरान लोगों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। वर्तमान में भी स्थायी वैकल्पिक व्यवस्था के अभाव में लोग जोखिम उठाकर मार्ग से आवागमन कर रहे हैं। स्थानीय नागरिकों अशोक कुमार जैन का कहना है कि कई वाहन चालक समय और दूरी बचाने के लिए खतरे के बावजूद इसी मार्ग का उपयोग कर रहे हैं। क्षेत्रवासियों के अनुसार झलोन, तेंदूखेड़ा, सागर और जबलपुर को जोड़ने वाला यह मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण है। यदि बारिश के कारण मार्ग बंद होता है तो यात्रियों को लगभग 20 से 25 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी। वर्तमान में सागर-जबलपुर एवं झलोन क्षेत्र की दूरी लगभग 105 किलोमीटर है, लेकिन मार्ग बाधित होने पर यह दूरी और बढ़ जाएगी। 
इसका सीधा असर दैनिक यात्रियों, व्यापारियों, किसानों, विद्यार्थियों तथा आपातकालीन सेवाओं पर पड़ेगा। स्थानीय लोगों का आरोप है कि लगभग एक वर्ष पूर्व एमपीआरडीसी के अधिकारियों द्वारा आश्वासन दिया गया था कि बारिश से पहले करीब 4.30 करोड़ रुपये की लागत से डायवर्सन एवं वैकल्पिक मार्ग का निर्माण कराया जाएगा। उस समय तत्कालीन कलेक्टर सुधीर कोचर ने भी बारिश से पहले आवश्यक कार्य पूर्ण कराने की बात कही थी। हालांकि एक वर्ष बीत जाने के बावजूद मौके पर कोई ठोस निर्माण कार्य  नहीं हुआ है। अब जबकि मानसून पूरी तरह सक्रिय हो चुका है, क्षेत्रवासियों की चिंता और बढ़ गई है। 
ग्रामीणों राम बिहारी राम रतन सिंह का कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक निर्माण कार्य नहीं कराया गया तो लगभग आगामी 6 छह माह तक क्षेत्र के लोगों को आवागमन संबंधी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। बसों और अन्य यात्री वाहनों को लंबा चक्कर लगाकर गंतव्य तक पहुंचना पड़ेगा, जिससे समय और आर्थिक भार दोनों बढ़ेंगे। एमपीआरडीसी सागर मुकुल चौरसिया का कहना है कि टेंडर ओपन हो गए थे अनुबंध की प्रक्रिया चल रही है चूंकि बारिश का समय आ चुका है इसलिए काम होना संभव नहीं है बारिश के बाद ही काम शुरू हो पाएगा। झलोन से मुकेश जैन की खबर
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