कुंडलपुर में व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से घरेलू सिलेंडर जप्त
दमोह। रसोई गैस किल्लत के दौर में व्यावसायिक गैस सिलेंडर सप्लाई पर प्रतिबंध लगा हुआ है। वही अधिकांश खानपान की दुकानों में पूर्व की तरह घरेलू गैस सिलेंडर का उपयोग किया जा रहा है। जिसकी जानकारी लगने पर अब यदा कदा कार्यवाही भी देखने को मिल रही है। सोमवार को कुंडलपुर में विभिन्न व्यावसायिक प्रतिष्ठानों से 25 घरेलू गैस सिलेंडर जप्त किए गए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पटेरा तहसीलदार उमेश तिवारी
के निर्देशन में कुंडलपुर में संचालित विभिन्न व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की जांच के
दौरान अनेक दुकानों में घरेलू गैस सिलेंडर उपयोग होते मिले। जिसके बाद 25 घरेलू रसाई गैस सिलेंडर जब्त किए गए जिनमें कुछ खाली सिलेडर भी शामिल बताए गए है। जिनको जप्त
करने की कार्रवाई की गई है।
उल्लेखनीय कि आम उपभोक्ताओं
को नंबर लगाने के लंबे अरसे बाद भी रसोई गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो पा
रहा है वही व्यवसायिक प्रतिष्ठानों में घरेलू गैस सिलेंडर आसानी से पहुंच
रहे हैं जो आश्चर्यजनक हैं।
बिजली सुधार कार्य के दौरान पोल से गिरे आउटसोर्स कर्मचारी की मौत.. दमोह।
बिजली सुधार कार्य के दौरान एक आउटसोर्स कर्मचारी की पोल से नीचे गिरकर
दर्दनाक मौत हो जाने का दुखद घटनाक्रम सामने आया है। बताया जा रहा है कि
विद्युत सुधार कार्य के दौरान आवश्यक सुरक्षा किट इत्यादि के बिना ही
कर्मचारी पोल पर चढ़कर कार्य कर रहा था। ऐसे में कहा जा सकता है कि विभागीय
लापरवाही के चलते एक गरीब कर्मचारी मौत के आगोश में समा गया।
प्राप्त
जानकारी के अनुसार पटेरा थाना अंतर्गत बिला खुर्द गांव में सोमवार को
बिजली विभाग का आउट सोर्स कर्मचारी ओमकार पटेल खंभे पर चढ़कर सुधार कार्य
कर रहा था। इस दौरान वह अचानक नीचे गिरा और फिर दोबारा नहीं उठ सका। ओंकार
करंट लगने की वजह से नीचे गिरा अथवा हाथ या पैर स्लिप होने की वजह से नीचे
गिरा इसका पता नहीं लग सका है। बताया जा रहा है कि हादसे के बाद बेहोशी की
हालत में गंभीर दशा में प्राइवेट वाहन से ओंकार को दमोह ले जाया गया लेकिन
तब तक काफी देर हो चुकी थी। जिला अस्पताल में ड्यूटी डॉक्टर द्वारा ओमकार
को मृत घोषित कर दिया गया। इस दौरान जेई नीरज नामदेव के भी साथ में अस्पताल
पहुंचाने की जानकारी सामने आई है लेकिन उनका पक्ष फिलहाल नहीं मिल सका है।
इस
दुखद दर्दनाक घटनाक्रम से युवा आउटसोर्स कर्मचारी के परिजनों का जहां
रो-रो कर बुरा हाल बना हुआ है वहीं विभागीय कर्मचारियों के बीच भी मातम
पसरा हुआ है। वही बताया जा रहा है कि भीषण गर्मी में बिजली कंप्लेंट की
संख्या में वृद्धि के बावजूद कर्मचारियों की कमी को दूर करने के लिए
अधिकारियों की तरफ से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है वहीं पर्याप्त
सुरक्षा उपकरण आदि भी उपलब्ध नहीं कराया जा रहे हैं जिस वजह से गरीब
कर्मचारी हादसे का शिकार होकर उसमें कल के गाल में समा रहे हैं।


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