भावांतर घोटाले में अब पांचों फर्मो पर होगी एफआईआर
दमोह। पथरिया में किसानों के नाम पर भावांतर योजना का लाभ उठाने की जुगाड़ में लगी पाच व्यापारिक फर्म को करीब बीस दिन पहले जिला निगरानी दल ने बड़ा फर्जीवाड़ा करते हुए रंगे हाथों पकड़ा था। जिस के बाद कलेक्टर ने जांच कारवाई के साथ एफआईआर के निर्देश दिए थे। वहीं एक सप्ताह बाद 8 दिसंबर को फिर से जांच के नाम पर मामले को रफादफा कराने ओर व्यापारियों को बचाने की नीयत से तत्कालीन प्रभारी खाघ आपूर्ति अधिकारी राजेश पटेल के साथ एक जांच टीम पथरिया कृषि उपज मंडी पहुची थी।
आरोप है कि इस टीम ने मंडी सचिव व अन्य अधिकारियों के साथ मिली भगत करके जांच के नाम पर बड़े लेनदेन की सेटिंग करते हुए मामले को ठंडे बस्ते में डालने के पुरजोर प्रयास शुरू कर दिये थे। लेकिन मीडिया में खबरों के साथ विरोध के स्वर तेज होने पर आखिरकार मंडी सचिव मेहपाल सिंह ठाकुर को 19 दिसंबर को पथरिया थाना पहुचकर रिपोर्ट दज्र कराना पड़ी थी। लेकिन मामले में आरोपित दो बड़े व्यापारिक फर्मो के नाम रिपोर्ट में नही लिखाये गए थे। थे। 20 दिसंबर को जैसे ही एफआईआर से दो व्यापारियों के नाम गायब होने की जानकारी मीडिया से लेकर किसानों लगी तो रिपोर्ट पर सवाल उठाए जाने लगे। बड़े लेनदेन के आरोप के साथ दो व्यापारियों को बचाने की शिकायते स्थानीय विधायक व मंत्रीजी से लेकर कलेक्टर तक पहुची तो वह भी हैरत में पड़ गए। बाद में एसडीएम निकेत चौरिसया को आरोपित दो फर्मो के नाम गायब होने मामले में कार्यवाही को कहा गया।
देर रात दो फर्मो के नाम जोड़ने के आवेदन पुलिस तक पहुचे.. जिसके बाद देर रात एसडीएम के साथ कृषि विभाग दमोह के संयुक्त संचालक व अन्य अधिकारी मंडी कार्यालय पहुँचे, इनकी मंडी के योजना प्रभारी/प्रांगण प्रभारी पांडे, शुभम दुबे की मंत्रणा चलती रही। इसके बाद एफआईआर से गायब दो व्यापारिक फर्मो के नाम जोड़ जाने का आवेदन थाना प्रभारी को दिया गया। जिस पर फिर पेंच फसता नजर आ रहा है। एसडीएम निकेत चौरसिया का कहना है कि गड़बड़ी में शामिल दो फर्मो के नाम जोड़े जाने का आवेदन पथरिया थाने में दिया जा चुका है। लेकिन इनके नाम पहले की एफआईआर में ही जोड़े जाए या फिर नहीं एफआईआर की जाए इसके लिए एसपी महोदय से मार्गदर्शन मांगा गया है।
जांच टीम ने इन पांच फर्मो की पकड़ी थी गड़बड़ी.. बिना खरीदी के भावांतर का लाभ लेने की जुगाड़ में लगी पांच बड़ी व्यापारियों की फर्म में बड़ी गड़बड़ी पकड़ी गई थी। जिसमें अनिल कुमार मुन्नालाल फर्म पर सबसे अधिक लगभग 3200 कुंटल का गोलमाल मिला था। वर्धमान फर्म पर भी भारी घोटाला पाया गया था। ट्रेडिंग कंपनी राजेश दाल मिल पर लगभग 16 कुंटल, जैन ट्रेनिंग कंपनी 77 कुंटल, महेंद्र ब्रदर्स ऑयल मिल पर 98 कुंटल से अधिक की गड़बड़ी पाई गई थी। जिस पर कलेक्टर के निर्देश पर पांच फर्म के मालिकों पर एफआईआर दर्ज होना थी। परंतु तत्कालीन प्रभारी खाघ आपूर्ति अधिकारी राजेश पटेल के साथ पहुची जांच टीम से बड़ी सेंटिग जमाते हुए इसमें बड़े अधिकारियों को भी शामिल करके अनिल मुन्ना फर्म पर एवं वर्धमान फर्म को बचाने की नियत से इनके नाम रिपोर्ट में नहीं लिखाए गए। जबकि उनके ऊपर लगभग 3200 कुंटल का मामला बनाया गया था।





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