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जम्मू कश्मीर के सुदूर पहाड़ी इलाकों में धमाके की जगह अब चौके छक्के की गूंज.. बुंदेलखंड की बेटी ने सेना की मदद से सुदूर पहाड़ों पर किया क्रिकेट टूर्नामेंट का आयोजन..भय दहशत के महौल से निकलकर उछाली गेंद..

भय दहशत के महौल से निकलकर उछाली गेंद

रामबन, जम्मू। जम्‍मू कश्‍मीर के दूर-दराज के गाँव में जो एक समय में आतंकवाद से बहुत प्रभावित था,  इच्छाशक्ति और जोश का बहादुर प्रदर्शन, भारतीय सेना ने एनजीओ डब्लू मार्स ( WMARS ) के साथ हाथ मिलाया और गाँव में एक सफल क्रिकेट टूर्नामेंट आयोजित किया गया। क्रिकेट जुनून की कोई सीमा नहीं है और यह टेनिस बॉल टी -20 क्रिकेट टूर्नामेंट के दौरान जम्‍मू कश्‍मीर के रामबन जिले की गूल तहसील के संगलदान ब्लॉक के युवाओं में देखा गया था।

जम्मू के रामबन जिले के संगलदान नामक गाँव एक ऐसा क्षेत्र है जो दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियों और आतंकवाद के कारण विकास में थोड़ा पीछे रह गया था।आज हमारे देश की हमारी भारतीय सेना की वजह से उस जगह सुकून और शांति है, डब्लूमार्स संस्था की प्रेसिडेंट दीपाली सिंहा जिनकी सारी शिक्षा हटा में ही हुई है ने बताया कि सेना के साथ मिलकर एक ऐसे स्‍थान में खेल का आयोजन करने का पहला अवसर था, आज वहां का युवा भय दहशत से निकल कर स्‍वच्‍छंद वातावरण में गेंदे उछाल रहा है।


स्थानीय युवाओं के इस जुनून को सेना ने दिल्ली स्थित एक गैर सरकारी संगठन, वेस्ट मैनेजमेंट एंड रिसाइक्लिंग सोसाइटी (WMARS) और एक कन्फेक्शनरी निर्माण कंपनी PERFETTI वैन मेल के सहयोग से पूरा किया, जिसने यहां युवाओं के सपने को एक ऐसी जगह पर पूरा किया, जो कभी उग्रवाद का हब था। उग्रवाद के कारण लोग विशेष रूप से बाहरी लोग दिन के समय भी यहां आने से डरते थे।

खेल का मैदान बनाने के लिए, स्थानीय युवाओं और सेना द्वारा क्षेत्र में निर्माणाधीन रेलवे सुरंगों को खोदने के दौरान एकत्र किए गए मलबे का एक टीला स्थानीय युवाओं और सेना द्वारा समतल किया गया था। इसमें रामबन जिले के लगभग सवा सौ गांवों के चार सौ खिलाड़ियों की सभी 24 टीमों ने भाग लिया। कुछ टीमों ने जम्मू, उधमपुर और भद्रवाह से भी कुछ रणजी खिलाड़ियों को भी बुलाया गया।


अंत में वह दिन आ गया और टूर्नामेंट के खेल खेले गए और 31 अगस्त को संगलदान क्रिकेट टूर्नामेंट, संगलदान के राजपूत क्रिकेट क्लब (आरसीसी) ने फैमरोटे संगलदान के फैमरोटे वारियर्स (एफडब्ल्यू) को 7 विकेट से हराकर जीत हासिल की।

टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी एफडब्ल्यू टीम 19.4 ओवर में 130 रन पर ऑल आउट हो गई जिसे आरसीसी ने केवल 13.1 ओवर में 3 विकेट के नुकसान पर हासिल कर लिया। विजेता आरसीसी को 30,000 रुपये और उपविजेता को 11,000 रुपये का नकद पुरस्कार दिया गया। टूर्नामेंट में 162 रन बनाने और 14 विकेट लेने के लिए आरसीसी के तन्मय सलाथिया को मैन ऑफ द सीरीज चुना गया और आरसीसी के सनी गुप्ता को 4 विकेट लेने और 21 रन बनाने के लिए मैन ऑफ द मैच चुना गया।


 सभी खिलाड़ियों को डब्लूएमएआरएस द्वारा एक टोपी और एक टी-शर्ट उपहार में दी गई थी जो पुनर्नवीनीकरण की गई प्लास्टिक की बोतलों से बनी थी। सारा आयोजन परफेट्टी के सहयोग से संपन्न हुआ। परफेट्टी कंपनी के डायरेक्ट अतुल जी ने आर्थिक सहायता का आश्वासन दिया था और उन्होंने  पूरी-पूरी आर्थिक सहायता संस्था को दी। ताकि इस क्षेत्र में खेल को बढ़ावा दिया जा सके जहां युवाओं को सीखने और बढ़ने का अवसर मिल सके। इस क्षेत्र के युवा खेलने के लिए मैदान जैसी कई बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं, गरीब पृष्ठभूमि से ताल्लुक रखते हैं, वे महंगे चमड़े की गेंद और पैड आदि खरीदने में असमर्थ हैं।

स्थानीय लोगों ने संगलदान रेलवे स्टेशन के निर्माण के लिए जिम्मेदार कंपनी के कीचड़ डंपिंग स्थान से एक अस्थायी क्रिकेट मैदान तैयार करने के लिए कड़ी मेहनत की। उन्होंने पूरे टूर्नामेंट के लिए लाल कॉस्को गेंदों से खेलना चुना। कचरा प्रबंधन के लिए कार्य कर रही डब्लूमार्स संस्था ने अपने प्रयासों को आगे की ओर बढ़ाते हुए एक और नये कार्यक्रम को भारतीय सेना के साथ मिलकर आयोजित कर किया है जिसे दो हिस्सों में आयोजित किया जा रहा हैं। 

पहला कार्यक्रम भारतीय सेना का ऑपरेटिंग बेस रामबन जिला (जम्मू कश्मीर) के कम्पनी कमांडर जी के नेतृत्व में आयोजित किया गया। डब्लूमार्स संस्था के वाइस प्रेसिडेंट डॉ प्रियंका आर्या, सुबोध सिंहा  द्वारा वेस्ट मैनेजमेंट के बारे में सभी सैना के सदस्यों एवं कर्मचारियों को विस्तार से बताया गया साथ ही संस्था की प्रेसिडेंट दीपाली सिंहा जी ने वेस्ट कलेक्शन सेंटर भी स्थापित किया जहाँ सभी प्रकार के गीला-सूखा कचरों को इकट्ठा किया जाएगा।

दूसरा आयोजन सेना के कैंटीन के गीला कचरा को खाद में कैसे बदला जाएगा, इस विषय पर भी संस्था की प्रेसिडेंट ने विस्तार से चर्चा की और उद्घाटन किया। वहाँ उपस्थित सेना के सभी सदस्यों ने इस आयोजन में बड़ा उत्साह दिखाया और अपना पूरा-पूरा सहयोग देने का आश्वासन भी दिया। इस आयोजन का प्रमुख उद्देश्य संस्था के सभी मुख्य तथा महत्त्वपूर्ण बिंदुओं को सेना के समक्ष रखना और पर्यावरण की सुरक्षा में सहयोग को बनाए रखना था।संजय जैन की रिपोर्ट

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