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पंचायती राज में सीसी नाली निर्माण पर करोड़ों खर्च..फिर भी गांव की गलियों में कीचड़ गंदगी के हालात.. इधर मशीनों से बनवाई गई मनरेगा की सड़कों की भी बारिश में कलई खुली.. बारिश के साथ मिट्टी में मिलते नजर आ रहे मनरेगा राशि के अधिकांश काम..

गांव गांव में गलियों में कीचड़ गंदगी भरे हालात 

दमोह। पंचायती राज व्यवस्था के तहत गांवो की दशा दिशा सुधारने सीसी रोड नाली निर्माण कार्य पर हर साल करोड़ों की राशि मंजूर किए जाने के साथ कार्य कराने की जिम्मेदारी पंचायत प्रतिनिधियों के हवाले की जाती है। लेकिन घटिया निर्माण कमीशन बाजी के खेल के चलते अधिकांश गांव में हालात ढाक के तीन पात जैसे ही नजर आते हैं। शायद यही वजह रहती है कि बारिश शुरू होते ही सीसी सड़कों की जगह कीचड़ गंदगी भरे हालात ग्रामीण स्वच्छता मिशन की पोल खोलते हुए नजर आते हैं।


यह वीडियो और तस्वीरें पथरिया जनपद पंचायत अंतर्गत सेमरा बुजुर्ग ग्राम पंचायत की है यहां भी पिछले 5 सालों में पचासों लाख रुपए सीसी सड़क और नाली निर्माण कार्यो के लिए विभिन्न मदों से मंजूर हुआ और पंचायत के कर्ता धर्ताओं ने ऐसा कार्य कराया की ढूंढने पर भी अब नजर नहीं आता किसी सी सड़क कहां बनी थी और गांव की पुरानी गली कहां थी। पंचायत दर्पण पोर्टल के अनुसार सेमरा बुजुर्ग गांव में पिछले 2 सालों में करीब दर्जनभर सीसी सड़क और नाली निर्माण हेतु 25 लाख के करीब की  राशि मंजूर और खर्च हुई। 

लेकिन हालात बद से बदतर बने हुए हैं यहां तक कि पंचायत भवन के सामने सड़क पर भी सीमेंट गिट्टी का नामो निशान नजर नहीं आता। ऐसे में गांव की अन्य सड़कों की क्या चर्चा की जाए। दलदली कीचड़ मिट्टी गंदगी पानी भरे हालातों में ग्रामीण शिक्षा मिशन की पोल खुलने के साथ मच्छर के प्रकोप का सामना भी ग्रामीणों को करना पड़ रहा है लेकिन पंचायत में किसी की कोई सुनने वाला नहीं है।ग्रामीणों का कहना है समय-समय पर उच्च अधिकारियों को ध्यान भी शिकायतों के जरिए आकर्षित कराया जा चुका है लेकिन कार्यवाही के नाम पर निल बटे सन्नाटा जैसे हालात बने हुए हैं।



समझा जा सकता है कि यह हालात अकेली सेमरा बुजुर्ग गांव के नहीं है बल्कि पथरिया जनपद पंचायत से लेकर जिले की अन्य जनपद पंचायतों के तहत आने वाली पंचायतों में भी बारिश के दिनों में ऐसे ही हालात देखने को मिलते हैं जिसको लेकर यह सवाल उठना लाजमी है कि आखिर विभिन्न दुकानदारों से ब्लॉग के जरिए खरीदी की जाने वाली सैकड़ों बोरी सीमेंट की आखिर कहां उपयोग कर ली जाती है जो बारिश के दिनों में सीसी रोडो के स्थान पर इस तरह के कीचड़ दल दल भरे हालात नजर आते हैं..

मशीनों से बनी मनरेगा की सड़कों की कलई खुली
दमोह। जिले में मशीनों के जरिए मनरेगा के काम कराए जाना कोई नई बात नहीं है। मानसून की आमद के पहले और कोरोना की दूसरी लहर के दौरान ग्रामीण जॉब कार्ड धारियों को काम देने जिले के अनेकों ग्रामीण क्षेत्रों में मनरेगा के तहत लाखों की सड़के मंजूर की गई थी। लेकिन ग्रामीणों को काम देने के बजाय रातों-रात मशीनों के जरिए बनवाए के मोरम मिट्टी की सड़कों के बारिश में हाल बेहाल हो चुके हैं।


 लाखों की मनरेगा सड़क मंजूर करा कर मशीनों से काम कराने वालों में भाजपा नेता पदाधिकारी जहां शामिल है वहीं अनेक सरपंच सचिवों ने भी अपने हाथ जगन्नाथ की कहावत को चरितार्थ करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है। 
यह तस्वीर महीने भर पहले की पटेरा जनपद क्षेत्र के इटवा हीरालाल गांव की है जहां रातों-रात मनरेगा सड़क मशीनों से सचिव ने बनवा कर राशि जॉब कार्ड धारियों के मास्टरों की जरिये आहरित कराने में देर नही की।


यह तस्वीर भी बारिश के करीब महीने भर पहले की है दमोह की दसोन्दा ग्राम पंचायत के सरपंच सचिव भी मिलकर लंबे समय से पंचायत में गुल खिला रहे हैं बात चाहे ग्रामीण स्वच्छता मिशन तहत शौचालय निर्माण की हूं या फिर अन्य कार्यों की ताजा मामला निजी भूमि पर मशीनों से टैंक निर्माण कार्य का सामने आया था। वही आप निजी भूमि पर सरपंच महोदय क्या पक्का निर्माण कार्य करा रहे हैं या किसी की समझ में नहीं आ रहा। 



तेंदूखेड़ा जनपद की ग्राम पंचायते भी गड़बड़ी के मामले में किसी से पीछे नहीं हैं। यहां के नरगुवा माल लाखों खर्च करके स्वच्छता परिसर का आधा अधूरा निर्माण कार्य कराए जाने की वजह से ग्रामीणों को इसका उपयोग करने नहीं मिल रहा है शिकायतों के बाद भी जनपद के अधिकारी मौन धारण किए हुए हैं जो कहीं ना कहीं इनकी सहभागिता की ओर संकेत है जिले की अन्य जनपदों और ग्राम पंचायतों की जमीनी हालात की खबरों के साथ जल्द मिलते हैं। पिक्चर अभी बाकी है..

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