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लॉक डाउन में गरीबो के गेहूं की तस्करी.. छत्तीसगढ़ कर्नाटका जाने के पहले 6 ट्रको में भरा लाखों का गेँहू जब्त.. गरीबो के अनाज को किसानों की उपज बताकर.. चर्चित गल्ला व्यापारी कपिल मलैया मनोज ट्रेडर्स के माल को बचाने में जुटे अधिकारी..!

दो धर्मकांटो से 6 ट्रको में भरा लाखों का गेँहू पहुचा मंडी
दमोह। जिले में लंबे समय से गरीबों के सस्ते अनाज का परिवहन राशन दुकानों के बजाय बड़ी मात्रा में कुछ गल्ला व्यापारियों की गोदामों तक पहुंचने और फिर इसे किसानों की उपज बताकर खरीदी केंद्रों के जरिए वापस शासन तक पहुंचने का गोरखधंधा संचालित हो रहा है। इसी तरह राशन के सस्ते गेहूं की लेबलिंग अर्थात बोरे बदलकर प्रदेश तथा प्रदेश के बाहर की आटा तथा मैदा मिलो में भेजने के गोरखधंधे में भी कुछ गल्ला व्यापारी महारत हासिल किए हुए हैं। हाल ही में 3 महीने का गरीबों का सस्ता राशन आवंटित किया गया वही गेहूं की फसल आने के साथ गांव में गल्ला व्यापारियों के ट्रक खरीदी करके सीधी मंडी टेक्स की चोरी कर रहे हैं। लेकिन अधिकारियों की मिलीभगत से वन टू का फोर का दौर जारी है..
 
दमोह के सागर नाका हिरदेपुर मार्ग पर कपिल मलैया की गोदाम पर लाक डाउन के दौरान भी लगातार ट्रैक्टर ट्राली और पिकअप के जरिए गरीबों का राशन वाला गेंहू और देहातो से सस्ते दाम पर खरीदा गया किसानों का गेंहू पहुंचने का सिलसिला जारी था।  यहा बोरो में भरे गेहूं को दूसरे बोरों मैं पलटी करके दोनों प्रकार के गेंहू की मिक्सिंग व पैकिंग का कार्य धड़ल्ले से होने की खबर लगने पर पहुची हमारी टीम ने जब तुलाई करा रहे कर्मचारी और पल्लेदारों से जानकारी चाही तो सभी ने चुप्पी साध ली। वही इस गोरखधंधे की रिकॉर्डिंग होते देखकर कुछ ही देर में गोदाम का गेट बाहर से लगा दिया गया। पिछले तीन-चार दिनों में एकत्रित गेहूं नई पैकिंग में कैद होने के बाद बीती रात हैवी ट्रकों में लोड करके प्रदेश के बाहर भेजा जा रहा था। 
अचानक गल्ला व्यापारी की कंजूसी के चलते बात बिगड़ गई और बाईपास स्थित दो अलग-अलग धर्म काटों से गेहूं से भरे सभी छह ट्रकों को कृषि उपज मंडी परिसर में खड़ा करा कर फिर से सौदेबाजी का दौर शुरू हो गया। इस बीच कुछ खबर नवीसो के पहुंचने और इनकी डिमांड पूरी नहीं होने पर एसडीएम को सूचना दे दी गई। जिसके बाद बिगड़ी बात को बनाने के लिए सोमवार को नागरिक आपूर्ति निगम के अधिकारियों से लेकर कृषि मंडी, खाद्य विभाग के अधिकारी और चर्चित गल्ला व्यापारी मिलकर पकड़े गए गेहूं को किसानों का गेहूं बताकर बचाने की जुगत में लगे रहे।
उल्लेखनीय है कि करीब 15 दिनों से कृषि उपज मंडी बंद होने की वजह से किसी प्रकार की खरीदी नही हो रही न ही अनुज्ञा नहीं कट रही है। वहीं जिले में अधिकांश किसानों की गेहूं की उपज अभी कटी नही है। जिनकी कट गई है वह लॉक डाउन की वजह से जिला मुख्यालय तक नहीं पहुंच पाई है। फिर कपिल मलैया और मनोज जैन की गोदाम तक यह गेहूं कैसे पहुंच गया ? इधर प्रदेश के बाहर इस गेहूं को ले जाने की परमिशन किस आधार पर जारी हुई ? सवाल और भी है जिन को नजरअंदाज करके इस गोरखधंधे में बरसों से जुटे अधिकारी अब दोनों व्यापारी के माल बचाने में जुटे हुए हैं। वहीं एसडीएम रविंद्र चोकसे को भी गुमराह करने से भी यह लोग नहीं चूक रहे हैं।
कपिल की गोदाम पर बरसों से चल रहा गोरखधंधा-
 कपिल मलैया की दुकान गोदामों पर अनेकों बार प्रशासनिक छापे और कार्यवाही हो चुकी है। लेकिन अधिकारियों से मिलीभगत लंबी सेटिंग के चलते "पेसा फेंक तमाशा देख" की तर्ज पर कुछ दिन बाद फिर से यह गोरख धंधा शुरू हो जाता है। यही हालात मनोज ट्रेडर्स के भी है। सूत्रों का कहना है कि नान, नागरिक आपूर्ति निगम, फूड विभाग तथा कृषि उपज मंडी के कतिपय अधिकारी कर्मचारियों की मिली भगत और कुछ नेताओ, खबर नवीसो की दलाली से बरसों से "वन टू का फोर" का यह गोरखधंधा चल रहा है। इधर खाद्यान्न परिवहन करने वाले ठेकेदार और वाहन मालिकों की भूमिका इसमें रहती है।
 दिन के उजाले में बोरो की पैकिंग बदलने के बाद रात के अंधेरे में धर्म कांटा से होकर गेहूं के बोरों से लोडेड गाड़ियां प्रदेश के बाहर का रुख करती रहती है। यह सिलसिला बरसों से चला रहा है। लेकिन लाक डाउन मैं व्यापारी द्वारा हफ्ता देने में की गई हीला हवाली के बाद हुई मुखबरी के चलते गेहूं से भरे इन छह हैवी ट्रकों के पकड़ी जाने का घटनाक्रम सामने आया है। वही वाहन पास जारी करने वाले मंडी के कर्मचारी प्रदीप पांडे की भूमिका भी संदिग्ध बनी हुई है। इधर पिछले दिनों बड़े मलहरा में लाक डाउन के दौरान पकड़े गए कुछ ट्रकों तथा अन्य स्थानों पर पकड़े गए गेहूं से भरे ट्रक भी इसी चर्चित गल्ला व्यापारी के बताए जा रहे हैं। जिनकी जांच कराया जाना प्रशासन को आवश्यक है। जिला प्रशासन ने यदि इस मामले को गंभीरता से नहीं लिया तो इस खबर के साथ मामला मुख्यमंत्री तक जाएगा यह भी तय है।
पिक्चर अभी बाकी है.. लाक डाउन में सामने आए इस बड़े मामले को अधिकारियों की मिलीभगत से किस तरह कमजोर करके अनाज तस्करी का गोरख धंधा करने वाले   के दो नंबर के माल को एक नंबर का बताकर बचाने की कोशिश की जा रही है। तथा अनाज परिवहन करने वाले ठेकेदार ट्रकों की जगह ट्रैक्टटर ट्राली में राशन का आधा अनाज कैसे ठिकाने लगाकर व्यापारियों तक पहुंचाते हैं। इसके खुलासे व अन्य अपडेट के साथ जल्द मिलते हैं। अटल राजेन्द्र जैन

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