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जनसंघ के जमाने से कांग्रेस की विचारधारा का विरोध करने वाले बाबा जी आखिरकार कांग्रेस में शामिल हुए.. लोकसभा चुनाव में भाजपा को खलेगी बाबाजी की कमी..

राहुल के मंच पर पहुंच बाबाजी हुए कांग्रेस के-
भोपाल। जनसंघ के जमाने से कांग्रेस की बिचारधारा के विरोध की राजनीति करने वाले भाजपा से बगावत के बाद निष्काषित हुए वरिष्ठ नेता डॉ रामकृष्ण कुसमरिया "बाबाजी" आज कांग्रेस मे शामिल हो गए। अपने 47 साल के राजनीति जीवन के बराबर उम्र वाले कांग्रेस अध्यक्ष श्री राहुल गांधी के समक्ष श्री कुसमरिया ने अपने अनेक समर्थको के साथ कांग्रेस में शामिल होने की घोषणा की।

शुक्रवार को कांग्रेस की आभार रैली में शामिल होने भोपाल आए कांग्रेस के राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष राहुल गांधी की उपस्थिति में बाबाजी को कांग्रेस के प्रभारी महासचिव दीपक वाबरिया ने सूत की माला पहनाकर कांग्रेस ज्‍वाईन करवाई। इस मौके पर मुख्‍यमंत्री कमलनाथ, पूर्व मुख्‍य मंत्री दिग्विजय सिंह, कांग्रेस महासचिव ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया सहित प्रदेश सरकार के मंत्रीगण एवं कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेतागण मंच पर मौजूद रहे।

कांग्रेस मंच पर श्री कुसमरिया के पहुचने के बाद की जो पहली तस्वीर सामने आई उसमे श्री सिंधिया कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को श्री कुसमरिया का परिचय देते नजर आ रहे है। वही श्री गांधी सहित अन्य नेताओ के साथ मे प्रदेश के वरिष्ठ नेता मुकेश नायक भी हाथ बांधे बैठे हुए नजर आ रहे है। हालांकि बाद में श्री कुसमरिया जब मंच से नीचे जाने लगे तो स्‍वयं राहुल गांधी ने उन्‍हें मंच पर ही बने रहनेे को कहा और इसके बाद उनसे सभा को संबोधित करने को कहा।

 कुसमरिया ने भाजपा मेे बुर्जुग नेताओं के साथ हो रहे प्रताड़ना का जिक्र करते हुए मुख्‍यमंत्री कमलनाथ एवं पूर्व मुख्‍यमंत्री दिग्विजय सिंह की खुलकर तारीफ की। बता दे कि सागर संभाग के दमोह तथा खजुराहो संसदीय क्षेत्र से अनेक बार सासंद तथा दमोह जिले के हटा तथा पथरिया से विधायक रहे बाबा जी को शिवराज सरकार में कैबिनेट मंत्री के तौर पर प्रथम बार कृषि कर्मण अवार्ड हासिल करने का श्रेय प्राप्त हुआ था। पूर्व के लोकसभा चुनाव में दमोह क्षेत्र से कांग्रेस नेता नरेश जैन एवं मुकेश नायक को तथा खजुराहो क्षेत्र से वरिष्ठ नेता सत्यव्रत चतुर्वेदी को हरा चुके है। 

पिछले विधानसभा चुनाव में राजनगर क्षेत्र से कांग्रेस के नाती राजा से हारने के बाद बाबाजी को बुंदेलखंड विकास प्राधिकरण का अध्यक्ष बनाया गया था। वहीं इस वार के विधानसभा चुनाव में पथरिया से टिकट नहीं मिलने पर उन्होंने पथरिया तथा दमोह से निर्दलीय चुनाव लड़ कर भाजपा का इन दोनों परंपरागत सीटों से कब्जा खत्म करा दिया था। हालांकि उन्हें दोनों स्थानों पर उनको मामूली वोट ही हासिल हुई थी। भाजपा से निष्कासन के बाद जब लोकसभा चुनाव के पूर्व तक इनकी कोई पूछ परख नहीं की गई तो आखिरकार उन्होंने कांग्रेस का दामन थामने में देरी नहीं की।
 1972 में जनसंघ की टिकिट पर पहली वार हटा से विधानसभा चुनाव लड़े तथा 1977 से लगातार विधानसभा व लोकसभा चुनाव जीतकर 47 साल का राजनीतिक जीवन पूरा कर चुके बाबाजी इस उम्र में संघ की विचारधारा से क्यों विमुख हुए इसके अनेक कारण है।  श्री कुसमरिया के कांग्रेस में जाने से कांग्रेस को क्या फायदा होगा यह तो वक्त बताएगा। लेकिन भाजपा को "बुंदेलखंड के शेर" कहे जाने वाले बाबाजी की कमी लोकसभा चुनाव में कहीं ना कहीं जरूर खलेगी इतना तय है। अटल राजेंद्र जैन की रिपार्ट

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