जिला सहकारी संघों का आयुक्त सहकारिता को ज्ञापन
भोपाल/ दमोह।
मध्यप्रदेश में जिला सहकारी संघों के अस्तित्व पर गहराते वित्तीय संकट और
शासकीय उपेक्षा को लेकर प्रदेश भर के जिला सहकारी संघों के मुख्य कार्यपालन
अधिकारियों (CEO) ने भोपाल पहुँचकर सहकारिता आयुक्त एवं पंजीयक सहकारी
संस्थाएं, दीपक सिंह को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में
अधिकारियों ने रेखांकित किया कि प्रदेश में सहकारी शिक्षा, प्रशिक्षण और
सहकारिता के प्रचार-प्रसार की मुख्य कमान संभालने वाले जिला सहकारी संघ
नियमों की अस्पष्टता और शासकीय अनुदान न मिलने के कारण भीषण आर्थिक तंगी से
गुजर रहे हैं। स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि लगभग आधे जिलों में जिला
सहकारी संघ बन्द हो गए हैं।
ज्ञापन में उठाई गईं प्रमुख माँगे एवं समस्याएँ: सदस्यता
अभिदाय का अनिवार्य भुगतान:जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों और पैक्स (PACS)
द्वारा जिला संघों को देय सदस्यता अभिदाय की राशि जारी नहीं की जा रही है।
आयुक्त सहकारिता, संयुक्त आयुक्त अपेक्स बैंक व उपायुक्त स्तर से पूर्व में
जारी निर्देशों के बावजूद अधिकांश बैंकों द्वारा भुगतान नहीं किया जा रहा
है, जबकि बैंक करोड़ों रुपये का आयकर अदा करते हैं। जिला संघों के
अधिकारियों ने इसके लिए सख्त और स्पष्ट निर्देश जारी करने एवं निर्देशों का
पालन नहीं करने वालों पर ठोस कार्यवाही की माँग की।
प्रशिक्षकों
एवं कर्मचारियों का वेतन भुगतान: वर्ष 2013 के बाद राज्य संघ द्वारा जिला
स्तर पर प्रशिक्षकों और संपर्क साधकों की नियुक्ति बंद कर दी गई, जिससे
जिला संघों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ा। माँग की गई है कि कर्मचारियों व
प्रशिक्षकों के वेतन-भत्तों का भुगतान राज्य संघ द्वारा पुनः किया जाए।
राज्य संघ को शासन से प्रतिवर्ष लगभग पांच करोड़ रुपए का शासकीय अनुदान
प्राप्त होता है जबकि जिला संघों को कोई अनुदान भी प्राप्त नहीं होता है। भवन
हेतु शासकीय भूमि आवंटन: प्रदेश के अधिकांश जिला संघों के पास स्वयं के
भवन नहीं हैं। प्राथमिक कृषि साख समितियों और विपणन संस्थाओं की तर्ज पर
जिला सहकारी संघों को भी 1 रुपये की सांकेतिक दर पर शासकीय भूमि आवंटित
करने की माँग रखी गई।
मुद्रण
कार्य प्राथमिकता से मिले: बैंकों व सहकारी संस्थाओं द्वारा अपने मुद्रण
(Printing) कार्य निजी प्रेसों को दिए जा रहे हैं। जिला संघों द्वारा
संचालित सहकारी मुद्रणालयों को प्राथमिकता के आधार पर मुद्रण कार्य देने का
निर्देश जारी करने की मांग की गई। सेवा नियमों की
स्वीकृति व नियम विरुद्ध प्रभार पर रोक: जिन जिलों में सेवा नियम स्वीकृत
नहीं हैं, वहाँ सेवा नियम स्वीकृत कर कर्मचारियों में सुरक्षा का भाव लाया
जाए। साथ ही, सेवानिवृत्त CEO के स्थान पर विभाग के अंकेक्षकों को नियम
विरुद्ध CEO का प्रभार देने के बजाय जिला संघों के ही वरिष्ठ कर्मचारियों
को पदभार देने, या आउटसोर्स से व्यवस्था करने का आग्रह किया गया।
नीतिगत
बैठकों में प्रतिनिधित्व: जिला सहकारी संघों से जुड़े किसी भी बड़े नीतिगत
निर्णय में जिला संघों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को भी समिति में
शामिल करने की माँग की गई। ज्ञापन सौंपने वाले प्रमुख अधिकारी: इस
अवसर पर रतलाम से अनिरुद्ध शर्मा, सीहोर से तेजसिंह ठाकुर, धार से
शुभेन्द्रसिंह पंवार, खरगोन से ओंकार यादव, ग्वालियर से राजीव शर्मा,
जबलपुर से (प्रभारी) राकेश वाजपेयी, खंडवा से मनोज पालीवाल, उज्जैन से
(प्रभारी) सुमेर सिंह, गुना से सत्येन्द्र शर्मा, शाजापुर से शब्बीर खान,
भिंड से रामकुमार शर्मा, झाबुआ से दुर्गेश पालीवाल और सागर से अभय दुबे,
रतलाम से पीआरओ पिंकेश भट्ट सहित अनेक जिला संघों के मुख्य कार्यपालन
अधिकारी उपस्थित रहे।



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