समय पर नहीं खुलता जबेरा महिला एवं बाल विकास परियोजना कार्यालय
दमोह।
जिला प्रशासन द्वारा शासकीय कार्यालयों में समयबद्धता और कर्मचारियों की
उपस्थिति को लेकर लगातार सख्ती बरती जा रही है। जिला कलेक्टर द्वारा औचक
निरीक्षण कर अधिकारियों-कर्मचारियों को कार्यालय समय पर खोलने और आम लोगों
की समस्याओं का समय पर निराकरण करने के निर्देश दिए जा रहे हैं। इसके
बावजूद जबेरा स्थित महिला एवं बाल विकास परियोजना कार्यालय गुरुवार सुबह
निर्धारित समय बीतने के बाद भी बंद मिला। करीब 10:30 बजे तक कार्यालय का
ताला नहीं खुला, जिसके कारण कार्यालयीन कार्य से पहुंचे लोगों और मीडिया
कर्मियों को काफी देर तक इंतजार करना पड़ा।
गुरुवार
सुबह निर्धारित समय पर जब कार्यालय नहीं खुला तो आसपास मौजूद लोगों ने
इसकी जानकारी लेने का प्रयास किया। काफी देर तक कार्यालय बंद रहने पर मौके
पर फोटो और वीडियो भी बनाए गए। स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्यालय के
समय पर नहीं खुलने की समस्या नई नहीं है और पूर्व में भी इस संबंध में
शिकायतें अधिकारियों तक पहुंच चुकी हैं। इसके बावजूद स्थिति में अपेक्षित
सुधार नहीं होने को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं। मौके
पर कार्यालय के बाहर मौजूद महिला एवं बाल विकास अधिकारी रिंकल घनघोरिया से
जब कार्यालय के निर्धारित समय पर नहीं खुलने को लेकर सवाल किया गया तो, कहा “आप वीडियो बना
लें, हमें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।” अधिकारी के इस कथित बयान को लेकर भी
चर्चाएं शुरू हो गईं और मामले ने तूल पकड़ लिया।
पूरे
मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल कर्मचारियों की डिजिटल उपस्थिति को लेकर
सामने आया। कार्यालय देर से खुलने के संबंध में कर्मचारियों से जानकारी ली
गई तो उनका कहना था कि ‘सार्थक ऐप’ पर उनकी हाजिरी पहले ही दर्ज हो चुकी
थी। यही बात अब जांच का
प्रमुख बिंदु बन गई है। सवाल यह उठ रहा है कि जब कार्यालय निर्धारित समय तक
बंद था और कर्मचारी कार्यालय में मौजूद नहीं दिखाई दे रहे थे, तो उनकी
डिजिटल उपस्थिति किस समय और किस प्रक्रिया के तहत दर्ज हुई। हालांकि,
हाजिरी दर्ज होने की वास्तविक स्थिति और उसका समय संबंधित रिकॉर्ड की जांच
के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
स्थानीय
लोगों के अनुसार, कार्यालय के समय पर नहीं खुलने को लेकर पहले भी शिकायतें
की जा चुकी हैं। ऐसे में गुरुवार को कार्यालय बंद मिलने और मौके पर
फोटो-वीडियो सामने आने के बाद मामला प्रशासनिक स्तर पर गंभीरता से लिए जाने
की बात सामने आई है। इस
पूरे घटनाक्रम ने शासकीय कार्यालयों में समय पर उपस्थिति और आम लोगों को
मिलने वाली सेवाओं की व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि, मामले
में कर्मचारियों या अधिकारियों की वास्तविक जिम्मेदारी जांच के बाद ही तय
होगी। मामले की जानकारी
फोटो और वीडियो सहित जबेरा एसडीएम छोटे गिरी गोस्वामी के संज्ञान में लाई
गई। एसडीएम ने मामले को गंभीर बताते हुए जांच कराने की बात कही है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शासकीय कार्यालय का निर्धारित समय पर नहीं खुलना
गंभीर विषय है और जांच के तथ्यों के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
मामले
में महिला एवं बाल विकास विभाग की जिला कार्यक्रम अधिकारी, अतिरिक्त
प्रभार एवं वर्तमान डिप्टी कलेक्टर सुश्री रचना प्रजापति ने भी संज्ञान
लिया है। उन्होंने उपलब्ध रिकॉर्डिंग और वीडियो जांच के लिए भेजने को कहा
है। सुश्री रचना प्रजापति का कहना है “आपके पास जो भी रिकॉर्डिंग और वीडियो हैं, भेजें। हम जांच कर कार्रवाई करते हैं।”
प्रशासनिक
अधिकारियों के इस रुख के बाद अब पूरे मामले की जांच पर निगाहें टिकी हैं।
जांच में यह स्पष्ट होगा कि कार्यालय निर्धारित समय पर क्यों नहीं खुला,
कर्मचारियों की वास्तविक उपस्थिति क्या थी और ‘सार्थक ऐप’ पर दर्ज डिजिटल
हाजिरी की स्थिति क्या रही। जांच के निष्कर्षों के आधार पर जिम्मेदारी तय
होने और नियमानुसार कार्रवाई की संभावना है। एक
ओर जिला प्रशासन कार्यालयों में समयबद्धता को लेकर सख्ती के निर्देश दे
रहा है, वहीं दूसरी ओर परियोजना कार्यालय के निर्धारित समय तक बंद मिलने की
घटना ने व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। अब फोटो-वीडियो और डिजिटल
उपस्थिति के रिकॉर्ड की जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर
सामने आएगी।
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