संजीवनी क्लीनिक के 02 फर्जी डॉक्टरो का पर्दाफाश
दमोह। एक तरफ नीट परीक्षा के पेपर लीक होने से देश भर में नीट के परीक्षार्थियों के बीच आक्रोष का महौल है वही दूसरी ओर फर्जी एमबीबीएस डिग्री की दम पर संजीवनी क्लीनिक में नियुक्त पाने वाल दो मुन्ना भाई आराम से नौकरी कर रहे थे। दस्तावेजी जांच में इसकी पुष्टि होने पर एसपी ने इसका खुलासा किया है। पूछताछ के साथ दोनों की फर्जी डिग्री का पदा्रफाश हो जाने पर दोनों मुन्ना भाई एमबीबीएस के खिलाफ अपराध दर्ज कर लिया गया है। दोनो आरोपियो से पूछताछ पर से फर्जी डॉक्टर अजय मौर्य की भूमिका ज्ञात होने व जबलपुर संजीवनी अस्पताल मे कार्यरत होने की जानकारी मिलने पर तत्काल टीम गठित कर अभिरक्षा मे लिया गया है।
दमोह पुलिस को 16 मई 2026 को सीएमएचओ कार्यालय से जांच प्रतिवेदन प्राप्त हुआ था कि डा.
कुमार सचिन यादव पिता छत्रपाल सिह यादव निवासी मेहरा मंदिर शंकुतलापुरी के
पीछे ग्वालियर एवं डा. राजपाल गौर पिता रमेश गौर निवासी काकूखेडा पोस्ट
मगरधा सीहोर के द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन अंतर्गत संचालित संजीवनी
क्लीनिक सुभाष कालोनी दमोह हेतु चयन प्रक्रिया में स्वयं को योग्य चिकित्सक
प्रदर्शित करने के उद्देश्य से फर्जी एवं कूटरचित एमबीबीएस डिग्री, मेडिकल
काउंसिल रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र तथा अन्य शैक्षणिक एवं पंजीयन दस्तावेज
प्रस्तुत किए गए थे जो उक्त फर्जी दस्तावेजो के आधार पर उक्त दोनो सचिन
यादव एवं राजपाल गौर करीब 01 वर्ष से नियुक्त थे संबंधित द्वारा शासकीय
संस्था को धोखा देकर न केवल अवैध लाभप्राप्त किया गया है, बल्कि आम जनता के
स्वास्थ्य एवं जीवन के साथ गंभीर खिलवाड किया है। मामले की गंभीरता को
देखते हुए श्रीमान पुलिस अधीक्षक श्री आनंद कलादगी के
निर्देशन एवं अति. पुलिस अधीक्षक श्री सुजीत सिह भदौरिया एवं नगर पुलिस अधीक्षक महोदय श्री एचआर पाण्डेय के मार्गदर्शन मे
थाना प्रभारी कोतवाली निरीक्षक मनीष कुमार त्वरित कार्यवाही करते हुए उक्त
दोनो आरोपियो के विरूद्ध थाना कोतवाली मे प्रथक -प्रथक अपराध क्रमांक
479/26 एवं 480/26 धारा 318(3),338,336(3),340(2) बीएनएस पंजीबद्ध किया गया।
उक्त दोनो आरोपियो को कोतवाली पुलिस
द्वारा विधिवत गिरफ्तार कर माननीय न्यायालय पेश किया गया। दोनो
आरोपियो से पूछताछ पर से फर्जी डॉक्टर अजय मौर्य की भूमिका ज्ञात होने व
जबलपुर संजीवनी अस्पताल मे कार्यरत होने की जानकारी मिलने पर तत्काल टीम
गठित कर अभिरक्षा मे लिया गया है। फर्जी एमबीबीएस डिग्री के आधार पर फर्जी
डॉक्टर बनाकर राज्य स्तर की संस्था के माध्यम से नियुक्तिया कराना बहुत ही
गंभीर एवं संवेदनशील बिषय है सभी संजीवनी अस्पताल आम जन के बीच मे संचालित
है जिससे जनमानस का स्वास्थ्य व इलाज सीधा जुडा है इसमे भोपाल स्तर की
संस्थाओ की भूमिका भी संदिग्ध है। आरोपियो से पंछताछ पर पैसा देकर बने कई
फर्जी डॉक्टर के नाम एवं पैसा लेकर संजीवनी अस्पताल मे डॉक्टरो को नियुक्त
कराने के लिए फर्जी MBBS डिग्री,
डॉक्टर रजिस्ट्रेशन और दस्तावेज उपलब्ध कराने वालों एवं सहयोग करने वाले
महत्वपूर्ण व्यक्तियों के नाम सामने आएं है जिनके लिए टीमें तलाश में लगी
हुई है।
हालांकि पुलिस कार्यवाही के खुलासे के पहले ही पत्रिका ने इस मामले की खबर को 17 मई 2026 के अंक में प्रकाशित करके जनता को पहले ही बता दिया था कि फर्जी डाक्टरों से पूछताछ जारी है वहीं जल्द ही इन पर कार्यवाही हो सकती है और हुआ भी यहीं पत्रिका की खबर के बाद पुलिस ने मामले का खूलासा करने में देर नहीं की। इस प्रकरण में त्वरित कार्यवाही करने वाली पुलिस टीम में थाना प्रभारी कोतवाली निरीक्षक
मनीष कुमार, उनि. नीतेश जैन, सउनि. रमाशंकर मिश्रा, प्र.आर. सौरभ टंडन
सायबर सेल, प्र.आर. राकेश अठ्या सायबर सेल, प्र.आर. हेमंत अवस्थी, प्र.आर.
अभिषेक चौबे, प्र.आर. महेश यादव, प्र.आर. अजीत दुबे, आरक्षक ओमप्रकाश
रैकवार, आरक्षक ब्रजेन्द्र मिश्रा आदि शामिल रहे।



0 Comments