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मैरिज गार्डन से 5 बच्चों का रेस्क्यू प्रकरण दर्ज.. अम्बेडकर मांगलिक भवन की मरम्मत कर अहिरवार समाज को सौपने की मांग.. समाज की बड़ी विसंगती को हास्यबोध से दर्शाता नाटक ”गुड़िया की शादी“

मैरिज गार्डन से 5 बच्चों का रेस्क्यू प्रकरण दर्ज

दमोह कलेक्टर सुधीर कुमार कोचर के निर्देशन में जिले में बाल श्रम के विरुद्ध सख्त कार्रवाई जारी है। इसी क्रम में 27 फरवरी को टास्क फोर्स समिति के सदस्यों द्वारा संयुक्त रूप से बाल श्रम उन्मूलन अभियान चलाया गया। अभियान में श्रम विभाग से प्रभारी सहायक श्रम पदाधिकारी पूजा अवस्थी बाल श्रम नोडल अधिकारी राहुल कुर्मी अध्यक्ष बाल कल्याण समिति दीपक तिवारी महिला एवं बाल विकास विभाग से बाल संरक्षण अधिकारी अखिलेश चौबे पुलिस विभाग जबलपुर नाका चौकी से प्रधान आरक्षक नंद लाल एवं आरक्षक अजय पटैल तथा जन साहस संस्था से मुकेश नवीन शामिल रहे।
संयुक्त टीम द्वारा शहर स्थित विद्या वाटिका मैरिज गार्डन में आयोजित एक शादी समारोह के दौरान निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान 05 बच्चे कार्य करते हुए पाए गए जिनमें से 01 बाल श्रमिक एवं 04 किशोर श्रमिक चिन्हित किए गए। रेस्क्यू किए गए बच्चों को नियमानुसार बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। संबंधित प्रकरण में बाल एवं किशोर श्रम ;प्रतिषेध एवं विनियमन अधिनियम 1986 तथा संशोधित अधिनियम 2016 के अंतर्गत विधिसम्मत कार्रवाई प्रचलन में है।

अम्बेडकर मांगलिक भवन की मरम्मत कर अहिरवार समाज को सौंपा जाए- डॉ आदर्श.. दमोह।  डॉ अम्बेडकर मांगलिक भवन कचौरा मार्केट दमोह की मरम्मत कर अहिरवार समाज को सौंपने हेतु कलेक्टर श्री सुधीर कोचर को एक ज्ञापन सौपा गया।  जिसमें डॉ मोहन सिंह आदर्श प्रांतीय कार्य कारणी सदस्य एवं संभागीय प्रभारी सागर संभाग मध्यप्रदेश द्वारा कलेक्टर दमोह को ज्ञापन दिया गया..
डॉ आदर्श ने बताया कि, तत्कालीन वित्त मंत्री माननीय जयंत कुमार मलैया विधायक दमोह द्वारा 14अप्रैल 2017 में 9 वर्ष पहले डॉ अम्बेडकर मांगलिक भवन का निर्माण कराया गया था जिसे मौखिक तौर पर अहिरवार समाज को सौंपा गया था जो कि आज भी नगर पालिका दमोह की देख रेख में है, जिसमें होने वाले कार्यक्रमों से लगातार राशि भी वसूली जा रही है, जबकि भवन वर्तमान में शासन की अनदेखी के कारण जर्जर हालत में है इसी के साथ स्थानीय फल व्यापारियों द्वारा सड़े-गले फलों को भवन के गेट पर डालकर बाबा साहब डॉक्टर भीमराव अंबेडकर एवं अहिरवार समाज को अपमानित किया जा रहा है, जिसके कारण समस्त अहिरवार समाज आक्रोषित है जिला प्रशासन से अनुरोध किया गया है कि शीघ्र भवन की मरम्मत कर अहिरवार समाज को सौंपा जाए।
समाज की बड़ी विसंगती को हास्यबोध से दर्शाता नाटक ”गुड़िया की शादी“.. दमोह। संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार के सहयोग से युवा नाट्य मंच द्वारा नगर के अस्पताल चैक स्थित मानस भवन में 21वें पांच दिवसीय राष्ट्रीय नाट्य समारोह का आयोजन किया जा रहा है। समारोह के द्वितीय दिवस शुक्रवार को मप्र नाट्य विद्यालय की रंग प्रयोगशाला द्वारा बुंदेली हास्य नाटक गुड़िया की शादी का मंचन किया गया। बुंदेली परिवेश, बुंदेली शैली और कहानी पर आधारित इस हास्य नाटक को देख दर्शक जहां खुद को मुस्कुराने से नहीं रोक सके, वहीं नाटक ने समाज में फैली एक बड़ी विसंगती को भी अत्यंत गंभीरता से उठाया जो नाटक के उद्देश्य को सार्थक करता है। 
नारी शक्ति के गुणों पर भारी रंगरूप.. नाटक की कहानी बुंदेलखंडी कस्बे के एक ऐसे निम्न मध्यम वर्गीय परिवार की कहानी है जिसमें कहानी की पात्र गुड़िया बिटिया अपने रंग-रूप की वजह से उपेक्षा का शिकार होती है। वह घर हो या बाहर हर जगह सबके ताने सुनती रहती है, पर इसके बाद भी उसकी सोच इतनी सकारात्मक है कि उसके ऊपर नकारात्मक बातों का कोई असर नही होता। वह विपरीत परिस्थितियों में भी सहज होकर जीवन का आनंद लेना चाहती है। उसका रंग भले ही काला है, पर मन बहुत उजला है। ऐसे में बड़ी मुश्किल से गुड़िया की शादी तय होती है। शादी की तैयारियां शुरू होती है और शादी के परंपरागत नेग दस्तूर भी चल रहे है, लेकिन शादी के एक दिन पहले गुड़िया के साथ कुछ ऐसा घटित होता हैं जिससे वह और कुरूप लगने लगती है। ऐसे में पहले से ही उपेक्षा का शिकार रही गुड़िया और परिजनों के सामने समस्या खड़ी हो जाती है। इन गम्भीर हालात में गुड़िया की भाभी स्थिति को सम्हालती है, जो स्वयं मुंबई भागने का कलंक झेल रही है। हालात यह बनते है कि इन परिस्थितियों में गुड़िया के संपर्क में घर का जो भी सदस्य आता है उसकी कुंठाये व मन की पीड़ा उजागर होने लगती। गुड़िया की मासूमियत भरी सहज बातों में जीवन दर्शन की झलक दिखाई देती है, जो जीवन को भारी भरकम बनाने की बजाय सहज और सरल तरीके से जीने की राह दिखाती है। 
लेखन और निर्देशन में अनुभव की छाप.. नाटक की लेखिका टेलीविजन जगत की जानी मानी कलाकार और लेखक समता सागर है, जिन्होने अपने लेखन में ना सिर्फ ग्रामीण और बुंदेली परिवेश को बारीकी से दिखाया बल्कि विवाह की परंपराए और उनके महत्व को भी खूबसूरती से दर्शाया है। इसके साथ ही उन्होने मानवीय भावनाओं को भी दर्शकों के समक्ष कहानी के माध्यम से उजागर किया है। नाटक के निर्देशक संजय श्रीवास्तव राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय से प्रशिक्षित होने के साथ दशकों से नाटकों में अभिनय और निर्देशन का अनुभव रखते है। ऐसे में नाटक में उनका अनुभव और प्रभाव स्पष्ट समझ आता है। कहानी में बुंदेली परंपराओं और परिवेश को एक मंच से दिखाने का कारनामा उन्होने किया है। अपने निर्देशन में उन्होने ना सिर्फ कहानी या कलाकारों से डाॅयलाग से उन्होने हास्य परोसा है बल्कि सामान्य परिस्थिति में कालाकारों की भाव भंगिमाए भी दर्शकों को पसंद आती है। दर्शकों के मनोरंजन के बीच उन्होने इस बात का भी पूरा ध्यान रखा है कि कहानी का मुख्य उद्देश्य और कहानी की मंशा दर्शकों तक पूर्ण रूप से पहुंचे।
नाटक के कलाकार भी दर्शकों के मनोरंजन में कोई कसर नहीं छोड़ते और उन्हे देखकर लगता है कि वह नाटक के पात्र ना होकर किसी समाज व और एक विवाह का ही एक हिस्सा हो। गुड़िया की भूमिका में भूमि बाथरी ने कहानी और पात्र की जिम्मेदारी का इमानदारी से निर्वहन किया है। राधे के रूप में अभिषेक शाही, सरला बनी गीतिका देवदास, पप्पू के पात्र में कषफ़ ख़ान, अल्का के रूप में गीता अहिरवार साक्षी गुप्ता ,स्वीटी बनी एकता चैरसिया की अभिनय में उनका अनुभव और तैयारियां नजर आती है। इसके अलावा दरोगा लक्ष्य अरोड़ा ,दादी विनीता देवी, फूफाजी रोषन अवधिया, बुआ दादी प्रीति बिरहा , छोटी बुआ स्नेहा कुमारी, ताई साक्षी गुप्ता षालिनी, ताऊ अर्पित दुबे अपने अपने पात्रों के साथ पूरा न्याय करते है। मुद्दू के पात्र में वरूण शर्मा, प्यारे आकाष घोरमारे, मुन्ना जुधिष्ठिर सुनानी, मिठ्या अमन ठाकुर, टिल्लू वेदांत बमरेले अपनी भूमिकाओं में रमे रहे है। नाटक को प्रभावी बनाने में वेषभूषा, मंच एवं प्रकाश परिकल्पना उल्लेखनीय है जो कार्य आकाश विश्वकर्मा ने किया है। कलाकारों को बुन्देली बोली का अनुभव संदीप श्रीवास्तव ने दिया है और उम्दा संगीत बनाने के लिए सहायक निर्देशक अभिषेक दुबे के साथ संजय कोरी, शुभम का उल्लेखनीय भूमिका है। एक मंच पर बुंदेली परिवेश और विवाह का दृश्य रचने में एकता चैरसिया, वरूण, कशफ, जुधिष्ठिर, आकाश, अमन गीता, अभिषेक शामिल रहे।
आज होगा रश्मिरथी का मंचन.. नाट्य समारोह के तृतीय दिवस सुरभी थियेटर ग्रुप बेगुसराय, मुंबई के द्वारा नाटक निर्देशक हरीश हरिऔध द्वारा रामधारी सिंह दिनकर द्वारा महाभारत पर आधारित नाटक रश्मिरथी का मंचन किया जाएगा।

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