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SBI के दो खातों से ग्यारह लाख से अधिक के साईबर फ्राड के मामले में.. जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग ने बैंक को डिजिटल फ्रॉड की राशि वापस करने आदेश दिया..

SBI को डिजिटल फ्रॉड की राशि वापस करने आदेश

दमोह जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग दमोह के अध्यक्ष श्री ऋषभ कुमार सिंघई एव सदस्य श्री राजेश ताम्रकार ने डिजिटल फ्रॉड के विषय में एक महत्वपूर्ण फैसला दिया। परिवादी डॉ बैजनाथ पटेल के अधिवक्ता अजय कुमार बाजपेई ने बताया कि परिवादी के दो बचत खाता भारतीय स्टेट बैंक मुख्य शाखा किल्लाई नाका एवं भारतीय स्टेट बैंक टंडन परिसर में संचालित थे एवं दिनांक 21.02.2024 को एक मोबाइल क्रमांक 6303463699 से फोन आया और बताया कि पी. पी. ओ. आ रहा है उसके पश्चात उनका मोबाइल हैक कर लिया गया और उनके खाते से 4,40,000 एवं 3,04,000 निकाल लिए गए एवं परिवादी की फ्लोटिंग एफ.डी. से 367200 का लोन भी अकाउंट होल्ड होने के बाद साइबर ठगों के खाते में ट्रांसफर हो गया तथा इन ट्रांजेक्शन का उनके पास में कोई मैसेज भी नहीं आया..
 इस प्रकार से कुल 11, 11,200 रुपए कि परिवादी के साथ साइबर ठगी की गई। उसी दिन शाम को परिवादी एटीएम से राशि निकालने के लिए गया तो एटीएम में राशि अपर्याप्त बताई तब परिवादी ने एटीएम से मिनी स्टेटमेंट प्राप्त किया तो उसने पाया कि उसके अकाउंट से ऊपर वर्णित राशि आहरित कर ली गई है जिसकी सूचना परिवादी ने दोनों बैंकों में फ्रॉड होने के 2 घंटे के अंदर दी एवं अकाउंट पर होल्ड लगवा दिया एवं 1930 साइबर क्राइम की हेल्पलाइन नंबर पर भी कॉल किया। बैंक के तत्कालीन प्रबंधकों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय स्थित साइबर सेल ऑफिस में शिकायत करने के लिए कहा वहां पर परिवादी ने मौजूद साइबर सेल को शिकायत की तो उन्होंने शिकायत दर्ज करने से मना कर दिया और कहा कि सब कार्रवाई बैंक से होगी इसके पश्चात परिवादी पुनः बैंक आया तब बैंक के प्रबंधकों ने पुनः साइबर सेल में शिकायत करने के लिए कहा इसके पश्चात परिवादी ने बैंकिंग लोकपाल और रिजर्व बैंक आफ इंडिया को भी लिखा पर वहां से भी कोई कार्यवाही नहीं की गई एवं गलत तथ्य एवं आधार लेकर जवाब प्रेषित किए गए। 

जब कहीं से न्याय नहीं मिला तो परिवादी ने जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोषण आयोग दमोह में अपने अधिवक्ता अजय कुमार बाजपेई के माध्यम से सेवा की कमी का परिवाद पेश किया एवं माननीय आयोग के समक्ष संपूर्ण सुनवाई हुई तथा परिवादी के अधिवक्ता ने बताया कि दिनांक 6 जुलाई 2017 के भारतीय रिजर्व बैंक के दिशा निर्देश हैं एवं उसके अलावा परिवादी के अधिवक्ता ने सर्वोच्च न्यायालय नई दिल्ली, मुंबई हाई कोर्ट, केरला हाई कोर्ट, राजस्थान हाई कोर्ट एवं दिल्ली हाई कोर्ट के न्याय दृष्टांत प्रस्तुत किया जिन पर माननीय आयोग ने सहमति जताते हुए दोनों भारतीय स्टेट बैंक को निकासी दिनांक से अदायगी दिनांक तक का ब्याज सहित भुगतान करने के लिए आदेशित किया एवं सेवा की कमी के एवज में 10000 -10000 रुपए पृथक पृथक एवं 2000-2000 पृथक पृथक वाद व्यय के रूप में भुगतान करने का आदेश से पारित किया। अधिवक्ता अजय कुमार बाजपेई ने बताया कि यदि किसी भी व्यक्ति के साथ डिजिटल फ्रॉड होता है तो वह तीन दिवस के भीतर बैंक को सूचित करें एवं उसके बाद समस्त जिम्मेदारी रिजर्व बैंक आफ इंडिया की गाइडलाइंस के अनुसार बैंक की है।

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