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डायमंड सीमेंट फैक्ट्री को अवैध बीमार उद्योग घोषित करा कर हाईडलवर्ग कंपनी को अरबों रुपए में बेचने सहित अन्य मामलों में मप्र के राजस्व विभाग ने दिए जांच के आदेश.. आदेश की प्रति वायरल होते ही मायसेम के दलालों में हड़कंप के हालात..

  संबंधितों को पत्र भेजने में लग गया महिनों का समय

भोपाल दमोह जिले की एक मात्र बड़ी औद्योगिक इकाई के रूप में नरसिंहगढ़ सतपारा तथा इमलाई में सीमेंट संयंत्र का संचालन करने वाली जर्मनी की हाईडलवर्ग कंपनी के मनमाने क्रियाकलाप और फर्जीवाड़े को लेकर पहली बार जांच कार्रवाई को लेकर उद्योग विभाग के आदेश की प्रति सामने आने से मायसेम के दलालों में हड़कंप के हालात बनते नजर आ रहे हैं। डायमंड सीमेंट फैक्ट्री को अवैध बीमार उद्योग घोषित करा कर हाईडलवर्ग कंपनी को अरबों रुपए में बेचने सहित अन्य मामलों में मप्र के राजस्व विभाग ने दिए जांच के आदेश कलेक्टर कार्यालय से कार्रवाई हेतु संबंधितों को पत्र भेजने में ही महिनों का समय लगा दिया गया है। अब जबकि इस पत्र से जुड़ी एक प्रति सामने आ चुकी है ऐसे में देखना होगा डायमंड से मायसेम तक का सफर तय करने वाली इस कंपनी के खिलाफ जांच कार्यवाही में कितना समय लगाया जाता है।

  डायमंड सीमेंट फैक्ट्री नरसिंहगढ़ जिला दमोह द्वारा अवैध बीमार उद्योग घोषित कराने मेसर्स हाइडल वर्ग एजी कंपनी जर्मनी को अरबों रुपए में बेचने, रॉयल्टी स्टांप शुल्क आदि करोड़ों रुपए से अधिक जमा नहीं करने नरसिंहगढ़ का फाइनल माइक क्लोज प्लांट बंद करने अवैध रूप से 11.64 हेक्टेयर भूमि का आवंटन कराने भूमि का अधिग्रहण कानून 2013 का उल्लंघन करने एवं श्रम कानून का उल्लंघन करने पर कंपनी के विरुद्ध दंडात्मक कार्यवाही करने हेतु जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के द्वारा हाल ही में एक पत्र प्रबंध संचालक औद्योगिक केंद्र विकास निगम जबलपुर को लिखा गया है। 

मध्य प्रदेश के राजस्व विभाग भोपाल के पत्र क्रमांक 778/ 983/7/ शाखा 3 भोपाल दिनांक 13 अक्टूबर 2020 कलेक्टर दमोह 1461 दिनांक 27 अक्टूबर 2020 एवं एसपी दमोह पत्र क्रमांक 93/20 दिनांक 8 अक्टूबर 2020 एवं कलेक्टर दमोह 12037 14 अक्टूबर 2020 द्वारा प्राप्त उपरोक्त एवं संदर्भित पत्र को लेकर उपरोक्त कार्रवाई करने के लिए औद्योगिक केंद्र विकास निगम जबलपुर को दमोह उद्योग केंद्र के महाप्रबंधक द्वारा 26 नवंबर 2020 को या पत्र भेजा गया है। जिस की प्रतियां कलेक्टर एसपी के अलावा खनिज विभाग को भी जांच कार्रवाई हेतु प्रेषित की गई हैं।

 मध्य प्रदेश सरकार के राजस्व विभाग द्वारा उपरोक्त संदर्भ में दिए गए दिशानिर्देशों को कलेक्ट्रेट से होकर उद्योग विभाग होते हुए जांच कार्यवाही के लिए आदेश जारी होने में करीब डेढ़ माह का समय लग चुका है ऐसे में यह कहना मुश्किल है उपरोक्त मामले की जांच पड़ताल में कितने वर्षों का समय लगेगा और इन बिंदुओं पर जांच पड़ताल होगी भी या नहीं ?

 या फिर पहले की तरह ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा। मामले में फिलहाल इतना ही जल्द ही जिन बिंदुओं को लेकर जांच कार्रवाई के निर्देश मध्य प्रदेश के राजस्व विभाग के द्वारा स्थानीय प्रशासन को दिए गए हैं उन मामलों की बिंदुवार सटीक जानकारी और हालात के अपडेट के बारी बारी से अपडेट की खबरों के साथ जल्द मिलते हैं।

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1 Comments

  1. आज के पहले राजस्व विभाग कहाँ था या कोई पुरानी डील टूट गयी जो अब घुटाला दिखने लगा विभाग को,,

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