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बुंदेलखंड की बेटियों की सफलता की गूंज पूरे देश में.. 12th की मेरिट सूची में चाय वाली की बेटी टॉप पर..10th के टाप 10 में दमोह के ऑटो तथा छतरपुर के सब्जी वाली की बेटी भी शामिल

बुंदेलखंड की बेटियों की सफलता का डंका पूरे देश में बजा.
एमपी बोर्ड द्वारा घोषित हायर सेकेंडरी तथा हाई स्कूल परीक्षा के परिणामों में इस बार बुंदेलखंड के बच्चों ने सफलता का डंका पीटकर पूरे प्रदेश में "सौ दंडी और एक बुंदेलखंडी" की कहावत को एक बार फिर चरितार्थ कर के रख दिया है। हाई स्कूल परीक्षा परिणामों में 500 में से 499 अंक हासिल करने वाला टॉपर गगन दीक्षित सागर जिले के गौरझामर का निवासी है वहीं बेटियों की बात की जाए तो हायर सेकेंडरी नतीजों में कृषि संकाय से मेरिट में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाली प्रिया चौरसिया दमोह शहर की निवासी है।
यहां बात कर रहे हैं उन बेटियों की जो साधारण परिवार से होने के बावजूद अपनी प्रतिभा के दम पर पूरे प्रदेश में अपने परिवार के साथ शहर और जिले का डंका पीटने में सफल रही है। प्रदेश की मेरिट सूची में जगह बनाने वाली बेटियों में चाय बेचने वाले, ऑटो चलाने वाले, सब्जी बेचने वाले जैसे कामकाजी परिवार की बेटियां शामिल है।
चाय वाले की बेटी ने प्रिया चौरसिया ने कृषि संकाय में किया एमपी टॉप, बनना चाहती है कृषि वैज्ञानिक-
दमोह के एक्सीलेंस स्कूल की छात्रा प्रिया चौरसिया ने हायर सेकेंडरी स्कूल परीक्षा में कृषि संकाय से 491 अंक हासिल करके पूरे मध्यप्रदेश की एग्रीकल्चर मेरिट लिस्ट में प्रथम स्थान प्राप्त करके अपने शहर जिले के साथ परिजनों को गौरवान्वित किया है। प्रिया के पिता मनोज चौरसिया चाय पान की छोटी सी होटल संचालित करते हैं। कृषि वैज्ञानिक बनने की चाह रखने वाली प्रिया चौरसिया ने अपनी सफलता का श्रेय माता पिता और गुरुजनों को दिया है मोबाइल से लगातार दूरी बनाकर रखने वाली प्रिया चौरसिया 6 से 7 घंटे तक लगातार पढ़ाई करके यह सफलता हासिल की है आपको बता दें कि प्रिया के पिताजी मनोज चौरसिया की दमोह के बस स्टैंड क्षेत्र में चाय नाश्ते की होटल हैं। साधारण परिवार से होने के बाद भी प्रिया ने जो असाधारण प्रतिभा का परिचय दिया है उस पर परिजनों समाज जनों के साथ दमोह तथा बुंदेलखंड वासी प्रिया  तथा प्रिया के परिजनों को  लगातार बधाइयां देने पहुच रहे है।
ऑटो वाले की बेटी खुशबू चौबे को मेरिट में तीसरा, जिले में पहला स्थान, इंजीनियर बनने की चाह-
दमोह के एक्सीलेंस स्कूल की छात्रा खुशबू चौरसिया ने हाईस्कूल परीक्षा में जिले की प्रवीण सूची में 496 अंकों के साथ सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया है। वही मध्य प्रदेश हाईस्कूल परीक्षा की सूची में तीसरा स्थान हासिल करके पूरे प्रदेश में दमोह का नाम गौरवान्वित किया है खुशबू के पिता दिनेश चौबे ऑटो रिक्शा चलाते हैं। सुभाष कॉलोनी निवासी दिनेश चौबे अपनी बेटी की सफलता से बेहद खुश और उत्साहित हैं खुशबू का कहना है कि वह इंजीनियर बनना चाहती है 5 घंटे की पढ़ाई करके सफलता का मुकाम हासिल करने वाली खुशबू को यह उम्मीद नहीं थी कि वह प्रदेश की मेरिट सूची में तीसरा स्थान पर जाएगी। 
गुंजन ने पूरे पटेरा ब्लॉक का नाम गुनजायमान किया, IAS बनने की चाहत है 10 वी मेरिट में 8 वा स्थान- 
 पटेरा के मॉडल हाई स्कूल की छात्रा तथा कुण्डपुर निवासी सुनील नामदेव की बेटी गुंजन ने हाई स्कूल के नतीजो में प्रदेश की मेरिट में 8 वा स्थान प्राप्त किया है। गुंजन नामदेव के पिताजी की पहले इलेक्ट्रिकल्स की दुकान थी अब इलेक्ट्रिक का काम करते है। मम्मी तारा नामदेव कुंडलपुर हाई स्कूल में एचएम प्रभारी है।  500 अंकों में से 491 अंक पाने वाली गुंजन ने इस का श्रेय अपने परिवार, स्कूल व कोचिंग टीचर को दिया है। भविष्य में आईएएस की तैयारी करना चाहती है। इस बहादुर बेटी को भी बहुत-बहुत बधाई और शुभकामनाएं। 

*सब्जी बेचने बाले की बेटी ने प्रदेश में पाया छठवां स्थान, गोल्ड मैडल के साथ किया सम्मानित-

छतरपुर गल्लामंडी में सब्जी की दुकान लगाने बाले युसूफ राइन के परिवार में खुशी का ठिकाना नही रहा क्योंकि यूसुफ की बेटी मोनिश परवीन में दसवीं क्लास में 493 अंक पाकर प्रदेश की मेरिट में छठवां स्थान पाया है। सन्मति विद्या मंदिर स्कूल की प्राचार्य प्रमोद जैन द्वारा बेटी को तुरंत स्कूल में बुलाकर गोल्ड मेडल पहनाया गया इसके अलावा मिठाई खिलाई गई साथ ही बेटी को स्कूल बैग भी भेंट किया गया, इतना ही नहीं परिवार की आर्थिक स्थिति ठीक ना होना पाने की वजह से स्कूल प्रबंधन द्वारा पिता को यह वचन दिया गया की बेटी की आगे की पढ़ाई स्कूल द्वारा निशुल्क कराई जाएगी और उसकी तरक्की में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न नहीं होगी | बात करें मोनिश परवीन की तो उसने मैथ जैसा कठिन विषय लेकर इंजीनियर बनने का सपना देख लिया है और दसवीं में सफलता श्रेय टीचर एवं परिवार को दिया है | उधर बेटी ने प्रदेश में पिता का नाम रोशन किया तो पिता यूसुफ की आँखों से खुशी के आंसू छलक पड़े और पिता का कहना था कि मेरी चाहे जैसी परिस्थिति हो मगर बेटी के सपनों में उड़ान भरने के लिए कोई भी कोर कसर नहीं छोडूंगा फिर उसके लिए चाहे कुछ भी करना पड़े।
इस बार के परीक्षा परिणामों में बेटियों की सफलता की गूंज में बेटों की चमक को फीका कर दिया है वही कहीं ना कहीं पूर्वर्ती शिवराज सरकार द्वारा बेटियों को पढ़ाने बढ़ाने के लिए किए गए प्रयासों के भी यह सार्थक परिणाम कहे जा सकते हैं, क्योंकि मेरिट सूची में  जगह बनाने वाले अधिकांश बच्चे सरकारी स्कूलों के हैं विशेष तौर पर एक्सीलेंस मॉडल हाई स्कूल के बच्चों ने अपने संस्थानों के नाम के अनुरूप प्रदर्शन करके निजी संस्थानों को पीछे छोड़ दिया है। 
अटल राजेंद्र जैन के साथ पटेरा से बादशाह खान, छतरपुर से मुरसलीम खान की रिपोर्ट 

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