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असलाना स्टेशन के समीप पानी की तलाश में भटका काला हिरण सूखे तालाब में गिर कर हुआ घायल.. 100 डायल टीम ने ग्रामीणों की मदद से बचाई दुर्लभ प्रजाति के हिरण की जान..

 100 डायल टीम ने ग्रामीणों की मदद से बचाई जान-
दमोह। जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर सदगुवा गांव व असलाना रेलवे स्टेशन के समीप एक सूखे तालाब में पानी की तलाश में आये एक काले हिरण के घायल होकर गिर जाने के बाद बाहर नही निकल पाने का घटनाक्रम सामने आया है। भोपाल से का लोकेशन मिलने पर मौके पर पहुंची हंड्रेड डायल टीम ने ग्रामीणों की मदद कड़ी मशक्कत के बाद घायल काले हिरण को  बाहर निकाला तथा इलाज करवा कर जान बचाई ।
 रेगिस्तान में नजर आने वाली मृग मरीचिका जैसे हालात अब बुंदेलखंड के ग्रामीण इलाकों में भी बनने लगे हैं। वैशाख मास के पहले दिन शनिवार को पानी की तलाश में जंगल से भटक कर असलाना रेलवे स्टेशन के समीप पहुंचा एक काला हिरण सूखे तालाब में उतरने के बाद पानी की तलाश में यहां से वहां भटकता रहा। तेज धूप और गर्मी में मृग मरीचिका जैसे हालात में सूखे तालाब में पानी नही मिलने के साथ ही बाहर नही निकल पा हिरण की यह हालत देख किसी रेल यात्री ने हंड्रेड डायल सेंटर को काल करके सूचना दी। जिसके बाद भोपाल से कॉल लोकेशन मिलते ही पथरिया से 100 डायल टीम मौके पर पहुची। आरक्षक नीलेश साहू व पायलट धर्मेंद्र राजपूत ने सूखे तालाब में उतर कर ग्रामीणों की मदद से घायल काले हिरण को बमुश्किल बाहर निकाला।
सूखे तालाब की तलहटी से मेड़ तक का सफर हिरण को डंगा डोली जैसी स्थिति में उठाकर तय करने के बाद 100 डायल से घायल काले हिरण को ले जाकर इलाज हेतु वेटनरी डॉक्टर केपी कुर्मी पथरिया को सूचित किया गया। साथ ही वन विभाग को भी सूचना दी गई। घायल हिरन ओ तालाब के बाहर लाकर  छाया में ले जाकर उसके ऊपर पानी डालकर होश में लाया गया। वेटनरी डॉ द्वारा हिरण का इलाज करके वन विभाग अधिकारियों के  सुपुर्द कर दिया गया है। 
जिसके बाद दुर्लभ प्रजाति का यह हिरण अब वन विभाग के संरक्षण में फिर से पहुंच गया है। बता दें कि इस वर्ष ग्रामीण इलाकों में गर्मी शुरू होने के साथ ताल तलैया के सूख जाने से सूखे जैसे हालात निर्मित हो गए हैं। जिस से सबसे अधिक परेशानी जंगल में विचरण करने वाले हिरण, चीतल, नीलगाय जैसी प्राणियों को पानी की तलाश में आबादी वाले क्षेत्र में भटकना पड़ रहा है। ऐसे ही कुछ हालात में इस काले हिरण के सूखे तालाब में गिर कर घायल बेहोश हो जाने का घटनाक्रम सामने आया है। 
आपके आस पास भी यदि सूखे तालाब जैसे हालात निर्मित हो गए हो तो अपने घर के आस-पास पशु पक्षियों के लिए पीने के पानी का इंतजाम करने से नहीं चूके। जंगल से भटक कर आबादी वाले क्षेत्र में आने वाले वन्य प्राणी को यदि सिर्फ पीने को पानी ही मिल जाए तो उनकी जान बच सकती है। तो ऐसे में जानवरों के लिए  पानी भर कर रख के "अहिंसा परमो धर्म" का यह कार्य करके वैशाख माह में पुण्य अर्जन करने से नहीं चूके।प्रवल सोनी के साथ अटल राजेंद्र जैन की रिपोर्ट

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