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दमोह जिले में होली के तीन दिनों में हत्या की हैट्रिक.. एक सप्ताह में पांचवी हत्या सैलवाड़ा सरपंच की, चुनाव आचार संहिता में वारदातों में बढ़ोतरी..

 सरपंच की गोली मारकर हत्या से सनसनी फैली-
दमोह। जिले में बात बात में हत्या की वारदात को अंजाम दिया जाना अब आम बात बनती जा रही है। बीते दिनों की बात को यदि छोड़ दिया जाए तब भी होली के 3 दिनों में हत्या के तीन बारदातों ने चुनाव आचार संहिता के दौरान ग्रामीण इलाकों के हालात को उजागर कर दिया है। एक सप्ताह में जिले में हत्या की यह पांचवी वारदात है।
ताजा मामला तेंदूखेड़ा थाना अंतर्गत सैलवाड़ा गांव के सरपंच की गोली मारकर हत्या कर दिए जाने का सामने आया है। जानकारी के अनुसार सैलवाड़ा गांव के सरपंच उजियार सिंह पोर्ते की मामूली बात पर से गोली मारकर हत्या कर दी गई। वारदात गुरुवार शाम करीब 5 बजे की बताई जा रही है। घटना के बाद मौके पर पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी पहुंच गए थे। विवाद की वजह बच्चों के बीच हुए झगड़े में सरपंच द्वारा बीच बचाव किया जाना बताया जा रहा है। फिलहाल पुलिस जांच में जुटी हुई है।
इसके पूर्व जबेरा थाना अंतर्गत देवरी सलैया गांव कुल्हाड़ी मारकर एक युवक की हत्या कर दी जाने के घटनाक्रम सामने आया था। इस वारदात की बजह क्रिकेट का बल्ला बताया जा रहा है। प्रदीप नाम का युवक साझेदारी में लिया गया क्रिकेट का बल्ला देवेंद्र के सूने घर से ताला तोड़कर उठा ले गया था। इसी पर से गुस्साए देवेंद्र ने गर्दन में कुल्हाड़ी मारकर अपने खिलाड़ी साथी प्रदीप को मौत के घाट उतार दिया था। गुरुवार सुबह मृतक का शव मिलने के बाद जबेरा थाना पुलिस जांच में जुट गई तथा आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया।
इसके पूर्व बटियागढ़ थाना अंतर्गत छोटी पथरिया गांव में एक युवक की उसके ही साथियों द्वारा रुपयों के मामूली लेनदेन के विवाद पर से हत्या कर दी थी। बुधवार सुबह युवक का शव मिलने से गांव में सनसनी फैल गई वहीं परिजनों द्वारा आरोपियों के नाम से नामजद रिपोर्ट कराई गई थी मामले में यह बात भी सामने आई थी मृतक तथा आरोपियों ने रात में साथ में बैठकर जमकर शराब खोरी की थी।
 18 मार्च को पटेरा थाना अंतर्गत सिंगपुर गांव निवासी एक युवक ने अपने नवजात बच्चे का थाने के सामने गला काटकर हत्या कर दी थी मामले की वजह पत्नी के चरित्र पर शक जैसी बात सामने आई थी। बाद में आरोपी ने थाने में आत्म समर्पण कर दिया था। पिछले 1 सप्ताह में हुई हत्या की वारदातों में 15 मार्च को हटा में कांग्रेस नेता देवेंद्र चौरसिया की हत्या के बाद उपजा तनाव जहां बरकरार है वहीं नामजद आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। इधर नामजद आरोपियों को निर्दोष बताने के चक्कर में कुछ जन प्रतिनिधियों की सक्रियता से भी पुलिस कार्यवाही प्रभावित होती नजर आ रही है। वहीं इसको लेकर पीड़ित पक्ष के समर्थन में प्रदर्शन पुतला दहन का दौर जारी है।
कुल मिलाकर चुनाव आचार संहिता के दौरान जिस तरह से एक के बाद एक हत्या की वारदातों को मामूली बातों पर से अंजाम दिया जा रहा है उसे देख कर कहां जा सकता है कि लोगों के बीच से सरकार तथा अधिकारी बदलते ही कानून व्यवस्था का भय लगभग समाप्त हो गया। तभी तो बात बात में हथियार उठाने से लोग नहीं चूक रहे हैं। चुनाव आचार संहिता के दौरान जिस तरह से लगातार वारदातों की स्थिति सामने आ रही है उसको लेकर पुलिस कप्तान को सख्त कदम उठाने के साथ कठोर कानूनी कार्रवाई का भय पैदा करना भी आवश्यक हो गया है।

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