गजब गड़बड़ झाला.. दो साल पहले निरस्त कार्य का पटेरा जनपद पंचायत ने कर दिया 7 लाख का भुगतान.. एकाउंटेंट, उपयंत्री, सहायक यंत्री, सीईओ पर मिलीभगत के आरोप..

निरस्त कार्य का जनपद ने कर दिया 7 लाख भुगतान

दमोह।  मध्य प्रदेश में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की कमान कद्दावर मंत्री श्री प्रहलाद पटेल के हाथों में होने के बाद भी ग्रामीण विकास के नाम पर फर्जीवाड़ा रुकने का नाम नहीं ले रहा है। पंचायत जनपद स्तर के कर्मचारी उपयंत्री सीईओ की मिली भगत से पूर्व में रोक दिये गए भुगतान भी धड़ल्ले से किए जाने के मामले भी अब सामने आने लगे हैं।

ऐसा ही एक मामला दमोह के जनपद पंचायत पटेरा से सामने आया है। जहाँ सहायक मान चित्रकार की तकनीकी रिपोर्ट, उपयंत्री के मूल्याकन, सहायक लेखा अधिकारी की मंजूरी के बाद जनपद सीईओ के द्वारा 7 लाख रुपए का एक ऐसा फर्जी भुगतान कर दिया गया जिसकों 2 साल पहले निरस्त कर दिया गया था। दरअसल जनपद पंचायत पटेरा के ग्राम पंचायत रेवझकला अंतर्गत कंपाउंड वाल निर्माण कार्य जो कि मनरेगा में ग़ैर अनुमत्य कार्य है एवं जिसकी कार्य स्थल पर आवश्यकता नहीं थी उस कार्य को पूर्व में जनपद पंचायत पटेरा के पत्र क्रमांक 7052 दिनांक 24 फरवरी 2024 को निरस्त कर दिया गया था। उपरोक्त कंपाउंड वाल निर्माण कार्य जिसका वर्क कोड 1711002031/LD/22012034598167 था को  निरस्त कर जाने के करीब 2 साल बाद भुगतान कर दिया जाना आश्चर्यजनक है। 
तदसंदर्भ में उच्च अधिकारियों को प्रेषित शिकायत में बताया गया है कि 8 फरवरी 2026 को जनपद पटेरा के सहायक लेखा अधिकारी प्रमोद सक्सेना ने उपयंत्री सहायक यंत्री एवं मुख्य कार्य पालन अधिकारी से मिलकर राशि का बंदरबाट करते हुए 7 लाख का फर्जी भुगतान कर दिया है। जो कि पूर्णतः गबन अमानत में खयानत की श्रेणी में आता है। प्रकरण की शीघ्र जांच कर सभी दोषियों पर वैधानिक कार्यवाही करते हुए पुलिस प्राथमिकी दर्ज कराने का अनुरोध भी शिकायत में किया गया है।
उल्लेखनीय की इस तरह के फर्जी भुगतान मामलों में हटा के साथ पटेरा जनपद पंचायत पूर्व में भी सुर्खियों में रही है। वही पटेरा जनपद में तो फर्जी पदोन्नति के आधार पर चपरासी से बाबू बन गए कर्मचारियों के बचाव में अधिकारी भी जुटे नजर आ रहे हैं। इसी का नतीजा है कि इस तरह के फर्जी वाड़े की जानकारी आरटीआई के तहत भी देने में अधिकारी कतरा रहे हैं।  पिक्चर अभी बाकी है..
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