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मेरे शहर को यह क्या हो रहा है.. समाज विशेष को गाली देने का मामला फिर तूल पकड़ा, सिंधी समाज के युवाओं ने ASP को ज्ञापन सौंपा..

सिंधी समाज को गाली देने का मामला फिर तूल पकड़ा-
दमोह। शहर की शांति व्यवस्था को चुपके चुपके किसी की नजर सी लगती जा रही है। तभी तो एक के बाद एक ऐसे घटनाक्रम सामने आ रही हैं जिनसे समाज विशेष की भावनाओं को भी ठेस पहुचाने की कोशिशें की जा रही है। फिर भी हमारे शहर की अमन पसंद लोग इन सब बातों को हल्के में लेते नजरअंदाज करते चल रहे हैं। लेकिन कब तक.. सबसे बड़ा सवाल यही है ? 
ताज़ा मामला सेवा भावी सिंधी समाज के स्वाभिमान को चोट पहुंचाने का है। जिसको लेकर आज सिंधी समाज के युवाओं ने सुबह से अपनी दुकानें बंद रखी। घंटाघर के समीप एकत्रित होने के बाद मौन जलूस निकालकर पैदल सभी सिंधी भाई एसपी ऑफिस पहुंचे। जहां एडिशनल एसपी विक्रम कुशवाहा को एक ज्ञापन सौंपते हुए कारवाई की मांग की गई।
सिंधी समाज के लोगों ने अपने ज्ञापन में इस पर क्या आरोप लगाए यह बात तो आप ऊपर वीडियो में सुन ही चुके होंगे। ऐसे में सवाल यही उठता है कि पचासों बरसों से साथ साथ ऊपर-नीचे, आजू-बाजू में अपने अपने कारोबार संचालित करके एक दूसरे के सुख दुख में खड़े रहने वाले व्यापारी दुकानदार भाइयों की नई पीढ़ी क्या इतनी असहनशील हो गई है कि वह छोटी-छोटी बातों को लेकर एक दूसरे की मां बहन करने पर आमादा हो जाए ?  पूरी की पूरी जाति व समाज विशेष पर निशाना लगाए। और दूसरा पक्ष अपना कारोबार बंद करके पहले पक्ष के खिलाफ धरने पर बैठ जाए ? एफ आई आर हो जाने के बाद फिर से मौन जुलूस निकाल और कड़ी कार्रवाई की मांग का ज्ञापन दे।
ऐसे मामलों में समाज के वरिष्ठ जनों को गंभीरता से विचार करना होगा, आगे आना होगा और नई पीढ़ी को समझाना होगा कि कितने संघर्ष के बाद हम सभी आपसी भाईचारे के बल पर ही बाजार में बैठकर अपना कारोबार चलाते आ रहे हैं। जिस दिन विध्न संतोषीयो को इस बात का एहसास हो जाएगा कि हमारे मनों में एक दूसरे के प्रति इतनी खटास आ चुकी है तो उनको कुछ करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ऊपर जो विवाद हुआ उस मामले में एवरेस्ट लाज के युवा संचालकों को अपनी भूल का एहसास करते हुए समग्र सिंधी समाज से माफी मांगने में कोई संकोच नहीं करना चाहिए। क्योंकि बाहर की समाज में "सिख और सिंधी" की परिभाषा अलग अलग नहीं होती। वहीं वो माफी मांगते है तो सिंधी समाज को भी बड़े दिल वाला बनकर गलती करने वालों को भी बड़ा दिल वाला बनकर माफ कर देना चाहिए।
इस मामले को लेकर दुकानें बंद करके धरना प्रदर्शन करने वाले युवा व्यापारी भाइयों से भी कहना चाहूंगा अपनी शक्ति का उपयोग अपनों के खिलाफ करने के बजाय अपनी पार्किंग की समस्या के समाधान हेतु अपने जनप्रतिनिधियों और प्रशासन पर दबाव बनाने के लिए यदि किया जाए तो बेहतर होगा।मेरे विचारों से जिनकी भावनाओं को ठेस पहुंची हो उनसे एक बार पुनः उत्तम क्षमा के साथ यही कहना चाहूंगा, यह वक्त आपस में उलझने का नहीं बल्कि एक दूसरे के हालात परिस्थिति को समझने का है। अटल राजेंद्र जैन की रिपोर्ट

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