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जबलपुर लोकायुक्त ने 20 हजार की रिश्वत लेते सिपाही को दबोचा.. मामले में संदेह की सुई थाना प्रभारी तक घूमी..

थाने के पास से पकड़ा रिश्वतखोर सिपाही-
जबलपुर। गणतंत्र दिवस की पूर्व बेला में पुलिस की  वर्दी पर रिश्वत का दाग लगता नजर आया है। लोकायुक्त टीम ने पनागर थाने में पदस्थ एक सिपाही को 20 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों दबोचा है। वह इस मामले की जांच थाना प्रभारी के ऊपर भी जाती नजर आ रही है।


लोकायुक्त डीएसपी दिलीप झरवड़े के अनुसार पनागर निवासी ललित तिवारी ने शिकायत की थी कि पहले वह सट्टा खिलाता था। लेकिन अब वह प्रॉपर्टी ब्रोकर बन गया है, जिसकी जानकारी  पुलिस को भी है। फिर भी आरक्षक कपिल चौबे उसे यह कहते हुए परेशान कर रहा है कि सरकार बदलने के बाद पुलिस को जुआरी, सटोरियों व बदमाशों पर कार्रवाई का टारगेट है। जिसे पूरा करने उसे भी पुराने रिकॉर्ड के आधार पर पकड़ा जाएगा। करवाई से बचने 20 हजार रुपए की डिमांड आरक्षक द्वारा किए जाने और इसकी शिकायत लोकायुक्त तक पहुंचने पर सिपाही को रंगे हाथ पकड़ने का प्लान बनाया गया।
शुक्रवार शाम आवेदक ललित तिवारी को 20 हजार रुपए पाउडर लगाकर सिपाही को देने के लिए भेजा गया। ललित ने आरक्षक कपिल चौबे को फोन लगाकर थाना के समीप  मनोज स्वीट्स के सामने बुलाया और उसने जैसे ही 20 हजार रुपए दिये, वैसे ही आसपास मौजूद  सिविल ड्रेस में लोकायुक्त की टीम ने आरक्षक को पकड़ लिया। आरक्षक को थाना ले जाकर लोकायुक्त ने करवाई करते हुए उसके पेंट को भी जब्त कर लिया है। क्योंकि आरक्षक ने रिश्वत की राशि पेेंट की जेब में रखी थी। 
पनागर थाने में तेजतर्रार प्रभारी के तौर पर संदीप आयाची के पदस्थ रहते उनके अधीनस्थ कर्मचारी द्वारा इस तरह से अवैध वसूली करने को लेकर तरह-तरह की चर्चाओं का बाजार सरगर्म है। यहां तक की सोशल मीडिया पर थाना प्रभारी को रिश्वत मामले में मुजरिम बनाने की खबरें वायरल हो रही है। 
लोकायुक्त की इस कारवाई में डीएसपी दिलीप झरवड़े, टीआई कमलसिंह उईके, आस्कर किंडो, सिपाही अतुल श्रीवास्तव, सोनू चौकसे, शरद पांडे, राकेश विश्वकर्मा शामिल रहे। आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत कार्यवाही की गई है।

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