मकान की खुदाई के दौरान मिले ब्रिटिशकालीन सिक्के
दमोह। नगर के पुराना बाजार क्षेत्र में आने वाले फुटेरा मुहल्ला क्षेत्र में आज भी सौ साल से पुराने मिट्टी के ऐसे अनेक पुराने घर मौजूद है जिनकी दीवारे अपने अंदर पुराने खजाने रूपी सिक्कों सहित सोने चांदी की सामग्री को सहेजे हुए है। ऐसे ही एक मकान की खुदाई में रविवार को अंग्रेजों के जमाने के चांदी के सिक्के मिलते ही हड़कंप के हालात बन गए। मकान मालिक इनकों अपने वाप दादा की धरोहर मान रहे थे वही काम करने वाले मजदूर इसमें अपनी हिस्सेदारी चाह रहे थे। जिससे इस मामले के पुलिस तक पहुचने के साथ प्रशासन की नजरों में आते देर नहीं लगी तथा अब 102 सिक्के व अन्य सामग्री पुलिस प्रशासन के कब्जे में है। जांच के बाद ही अब यह तय होगा कि यह किसके पास रहेंगे।
दमोह शहर के फुटेरा
वार्ड 3 यशवंत चौक के समीप एक सोनी परिवार के पैतृक मकान पर निर्माण कार्य चल रहा था।
पिलर निर्माण के लिए मजदूर खुदाई कर रहे थे, तभी जमीन के अंदर एक पुराना
धातु का पात्र मिलने की बात सामने आई। मजदूरों का दावा है कि खुदाई आगे
बढ़ने पर वहां से बड़ी संख्या में चांदी के पुराने सिक्के और कुछ धातु
सामग्री निकली। उनका आरोप है कि मकान मालिक सामग्री अपने कब्जे में ले गए। वहीं
मामले ने उस समय नया मोड़ ले लिया जब मजदूरों ने हिस्सा नहीं मिलने की बात
कहते हुए पूरे घटनाक्रम की जानकारी पुलिस तक पहुंचा दी। सूचना मिलने के
बाद प्रशासनिक अमला सक्रिय हुआ और पुलिस के साथ राजस्व एवं पुरातत्व विभाग
की टीम भी मौके पर जांच के लिए पहुंची।
सोनी परिवार के मकान
में चल रहे निर्माण कार्य के दौरान खुदाई में 42 सिक्के मिले थे, इसके बाद 60 और सिक्के तथा
पीतल की छोटी कशेड़ी मिली है.अब तक कुल 102 सिक्के बरामद हो चुके हैं.सूचना
पर तहसीलदार रॉबिन जैन, रघुनंदन चतुर्वेदी और सिटी कोतवाली टीआई मनीष कुमार
मौके पर पहुंचे और बारीकी से जांच-पड़ताल कर कार्रवाई शुरू कर दी है. वरिष्ठ
अधिकारियों को जानकारी देकर मार्गदर्शन लिया जा रहा है. प्रशासन ने पूरे
क्षेत्र को सुरक्षित कर खुदाई कार्य रोक दिया है.मिले सिक्कों की प्राचीनता
और ऐतिहासिक महत्व का पता लगाने के लिए पुरातत्व विभाग को सूचित किया गया
है. नियमानुसार सभी वस्तुओं को जब्त कर कोषालय में जमा कराया जाएगा..
हालांकि कानूनन
जब भी खुदाई में पुरानी मुद्रा या धातु मिलती है तो प्रशासन को सूचना देना
जरूरी होता है. इसके बाद पुरातत्व विभाग जांच करता है कि सिक्के कितने
पुराने हैं और ‘ट्रेजर ट्रोव एक्ट 1878’ के तहत आते हैं या नहीं. अगर ये
सिक्के 100 साल से कम पुराने और सामान्य चलन वाले निकले, तो जांच के बाद
परिवार को वापस भी मिल सकते हैं.. हालांकि ये सिक्के किसी खजाने या
सरकारी संपत्ति की तरह नहीं, बल्कि परिवार की निजी बचत होते थे. घर की नींव
में, दीवारों में या लोहे की पेटी में छिपाकर रखना भी आम बात थी. बैंक लॉकर
तब इतने चलन में नहीं थे. इसलिए अगर सोनी परिवार के निजी मकान से चांदी के
सिक्के निकले हैं, तो ये पारिवारिक विरासत भी हो सकती है। 
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