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20 गैस एजेंसियों पर एक साथ कार्यवाही, 2138 सिलेंडरों का अंतर, 22 कार्ड जब्त.. इधर पांच हजार लेने के बाद भी नहीं डाली पीएम आवास की दूसरी किस्त..

कलेक्टर श्री यादव ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश
दमोह। जिले में गैस एजेंसियों की अनियमितताओं को लेकर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक साथ 20 गैस एजेंसियों का निरीक्षण कराया। कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने बताया कि उपभोक्ताओं से शिकायतें मिल रही थीं कि गैस एजेंसियों द्वारा सिलेंडर समय पर नहीं दिए जा रहे हैं अधिक राशि वसूली जा रही है। कलेक्टर श्री यादव ने बताया कि रात में ही रणनीति बनाकर सुबह 10 बजे जिले की सभी 20 एजेंसियों पर एक साथ कार्रवाई शुरू कराई गई। इसके लिए 21 जांच दल गठित किए गए थे। साथ ही उज्ज्वला योजना के कार्डों के दुरुपयोग की शिकायत पर अलग से एक विशेष दल भी भेजा गया।

15 एजेंसियों में मिली गड़बड़ी.. प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में 15 गैस एजेंसियों में अनियमितताएं सामने आई हैं। जांच के दौरान कुल 2138 सिलेंडरों का अंतर पाया गया। स्टॉक रजिस्टर में दर्ज सिलेंडरों की संख्या और वास्तविक उपलब्ध सिलेंडरों में अंतर मिला है। कुछ जगह सिलेंडर कम पाए गए तो कुछ स्थानों पर अधिक संख्या दर्ज मिली।
महावीर हार्डवेयर ट्रेडर्स से मिले उज्ज्वला कार्ड.. तेंदूखेड़ा के 27 मील पर स्थित महावीर हार्डवेयर ट्रेडर्स पर कार्रवाई के दौरान 23 कार्ड जब्त किए गएए जिनमें 22 उज्ज्वला योजना के कार्ड और एक सामान्य गैस कनेक्शन कार्ड शामिल है। कलेक्टर श्री यादव ने कहा कि उज्ज्वला योजना के कार्ड संबंधित हितग्राहियों के पास होने चाहिए थेए लेकिन वे किसी अन्य व्यक्ति के कब्जे में पाए गए। आशंका है कि इन कार्डों का दुरुपयोग कर महंगे दामों पर सिलेंडर बेचने का प्रयास किया जा रहा था।

आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत होगी कार्रवाई..कलेक्टर श्री यादव ने स्पष्ट किया कि जिन एजेंसियों में सिलेंडरों का अंतर और अन्य अनियमितताएं मिली हैं उनके खिलाफ द्रवीकृत पेट्रोलियम गैस प्रदाय आदेश 2000 तथा आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 की धारा 3ध्7 के तहत कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने गैस एजेंसी संचालकों को चेतावनी देते हुए कहा कि उपभोक्ताओं के साथ किसी भी प्रकार की धोखाधड़ी अधिक कीमत वसूली या नियम विरुद्ध सिलेंडर वितरण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
आगे भी जारी रहेगी जांच.. कलेक्टर श्री यादव ने कहा कि विस्तृत रिपोर्ट आने के बाद गंभीर मामलों में और कठोर कार्रवाई पर विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिले में पहली बार एक ही समय पर सभी एजेंसियों की जांच होने से वास्तविक स्थिति सामने आई है। यदि अलग.अलग कार्रवाई होती तो अन्य एजेंसियां अपनी व्यवस्था सुधार लेतीं और वास्तविक अनियमितताएं सामने नहीं आ पातीं।

पीएम आवास की दूसरी किस्त के नाम पर हितग्राही ने सचिव पर लगाए गंभीर आरोप.. दमोह जिले की जनपद पंचायत दमोह अंतर्गत ग्राम पंचायत दसोंदा के गांव जुझारघाट में प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर गंभीर अनियमितताओं और रिश्वतखोरी के आरोप सामने आए हैं। गांव के एक हितग्राही ने पंचायत सचिव पर प्रधानमंत्री आवास योजना की दूसरी किस्त जारी करने के एवज में दस हजार रुपये मांगने का आरोप लगाया है। मामला सामने आने के बाद क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है और ग्रामीणों में आक्रोश देखने को मिल रहा है।
हितग्राही अर्जुन सिंह लोधी पिता लाल सिंह लोधी ने बताया कि उन्होंने प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत अपने मकान की नींव पहले ही डाल दी थी। इसके बाद उन्होंने ग्राम पंचायत सचिव गोविंद अहीरवाल से आवास निर्माण के लिए स्थल स्वीकृति और दूसरी किस्त जारी करने की बात कही। आरोप है कि सचिव ने साफ शब्दों में कहा कि “खर्चा-पत्ता लगेगा” और इसके लिए बीस हजार रुपये की मांग की गई। हितग्राही द्वारा राशि कम करने की बात कहने पर सचिव कथित रूप से दस हजार रुपये लेने पर तैयार हुआ। हितग्राही के अनुसार सचिव ने आवास निर्माण स्थल की फोटो खींच ली और दो दिन के भीतर पैसे देने का दबाव बनाया। लेकिन इसी बीच परिवार में स्वास्थ्य संबंधी समस्या आने से हितग्राही के पास रुपये की व्यवस्था नहीं हो सकी। हितग्राही ने सचिव से दस दिन का समय मांगा, लेकिन ग्यारहवें दिन पंचायत का चपरासी रामसू उर्फ रमेश रैकवार उसके घर पहुंचा और पांच हजार रुपये लेकर चला गया। आरोप है कि चपरासी ने बाकी राशि जल्द देने का दबाव बनाते हुए कहा कि इस सप्ताह पूरा पैसा कर देना।
हितग्राही का आरोप है कि पूरी रकम नहीं देने के कारण अब तक प्रधानमंत्री आवास योजना की दूसरी किस्त जारी नहीं की जा रही है। वहीं गांव में सड़क की सुविधा नहीं होने के कारण बरसात के दिनों में निर्माण सामग्री पहुंचना भी मुश्किल हो जाएगा। ऐसे में अधूरा मकान और बारिश के मौसम में परिवार के खुले आसमान के नीचे रहने की आशंका ने पीड़ित परिवार की चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि शासन द्वारा गरीबों को पक्के मकान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से चलाई जा रही प्रधानमंत्री आवास योजना में यदि इस तरह रिश्वत की मांग की जाएगी तो गरीब परिवार योजना का लाभ कैसे उठा पाएंगे। गांव के लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।
सोशल मीडिया पर मामला उठाने के बाद बढ़ा विवाद.. हितग्राही ने बताया कि हाल ही में तेजगढ़ ग्राम पंचायत में एक सचिव के रिश्वत लेते पकड़े जाने की खबर सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। इसी बात का जिक्र जब उसने ग्राम पंचायत दसोंदा के सचिव गोविंद अहीरवाल से किया तो सचिव कथित रूप से नाराज हो गया और कड़े शब्दों में बात करने लगा। हितग्राही का आरोप है कि सचिव ने कहा कि “तुम पंचायत आओ और अपनी कुटीर बनवा ही लेना।
पीड़ित हितग्राही ने आशंका जताई है कि यदि उसे किसी प्रकार की जनहानि या परेशानी होती है तो इसकी जिम्मेदारी ग्राम पंचायत सचिव की होगी। मामले को लेकर ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है ताकि गरीब हितग्राहियों को बिना रिश्वत दिए शासन की योजनाओं का लाभ मिल सके। ग्रामीणों ने उठाई जांच की मांग. ग्रामीणों का कहना है कि प्रधानमंत्री आवास योजना गरीबों के सपनों का सहारा है, लेकिन यदि पंचायत स्तर पर भ्रष्टाचार और लेनदेन का खेल चलता रहा तो जरूरतमंद परिवारों तक योजनाओं का लाभ पहुंचना मुश्किल हो जाएगा। ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर और जनपद पंचायत अधिकारियों से मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की मांग की है।

 

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