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महिलाएं हाथों में शस्त्र लेकर शत्रुओं को बताए कि हम किन वीरांगनाओं के वंशज है: साध्वी सरस्वती देवी.. शताब्दी वर्ष पर राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पंच परिवर्तनों से जुड़ने की अपील..

नगर में आयोजित हुआ विशाल हिन्दू सम्मेलन 

दमोह। संघ के शताब्दी वर्ष की कार्यक्रमों की श्रृंखला में आयोजित हो रहे हिन्दू सम्मेलनों में गुरुवार को दमोह नगर का विशाल हिन्दू सम्मेलन पॉलिटेक्निक कॉलेज मैदान में आयोजित किया गया। आयोजन में बड़ी संख्या में हिंदू समाज के लोग शामिल हुए और वक्ताओं के विचारों को सुना। आयोजन का प्रारंभ भारत माता, राम दरबार के समक्ष दीप प्रज्वलन और पुष्प अर्पण कर हुआ। इसके बाद मंच पर सभी समाज और वर्ग प्रमुखों के रूप में आमंत्रित अतिथियों स्थान ग्रहण कराकर उनका स्वागत किया गया। मंचीय कार्यक्रमों की प्रस्तुति में बच्चों ने देशभक्ति पर आधारित नृत्य नाटिका और कविताओं की प्रस्तुति दी और समापन भारत माता की आरती और सहभोज के साथ किया गया।
सनातन में करें घर वापसी सभी करेंगे स्वागत.. इस दौरान प्रमुख वक्ताओं के रूप में पधारे साध्वी सरस्वती देवी, राष्ट्रीय सेविका समिति शैलजा दीदी, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के सह प्रांत प्रचारक प्रभात जी ने अपने विचार रखे।  साध्वी सरस्वती देवी ने कहा कि धर्म छोड़ने वाला कहीं भी जाए, कही भी रहे लेकिन मृत्यु के बाद पंच महाभूतो में ही मिलना होगा। मैं आज सभी सनातन छोड़ने बालों से अनुरोध करती हूं कि सनातन में घर वापसी कर लो। यहां सभी हिन्दू आपका तिलक लगाकर स्वागत करेंगे। उन्होंने महिलाओं से कहा कि हमारे धर्म में सात जन्मों के बंधन की होता है जिसे आज जेंडर इक्वलिटी के नाम पर तोड़ा जा रहा है। परिवार की नारी यदि महान होगी तो बेटा भी महान होगा। जीजाबाई ही शिवाजी को तैयार कर सकती है। हमें शर्म आनी चाहिए कि हम भारत के रहकर उस स्कूल में बच्चों को भेजते है जहां हिंदी बोलने पर फाइन लगता है, हमें अंग्रेजी भाषा से कोई आपत्ति नहीं है लेकिन स्व भाषा का अभिमान हमें रखना होगा।
उन्हें मंत्र और धार्मिक ग्रन्थ का ज्ञान कराना होगा। बच्चे मोबाइल के प्रभाव में है और इसकी लत का शिकार है, पहले ऐसा नहीं था क्योंकि मां अपनी जिम्मेदारी को पूरी तरह से निभाती थी। बच्चे अश्लील गाने गा रहे है और उसपर रील बना रहे है,  ऐसे में समाज को बचाना है तो उससे 10 वर्ष तक मोबाइल से दूर रखिए। बच्चों को सुपरमैन नहीं हनुमान जी महराज की बात बताओ। महिलाएं आगे आकर कुटुंब प्रबोधन के लिए कार्य करें। महिलाएं अपने हाथ में कटार लेकर शत्रुओं को बताए कि हम किन वीरांगनाओं की बंशज है। जो भी हम पर बुरी नजर डाले उसे बताए कि हम अपने सम्मान और इज्जत के लिए क्या कर सकते है। कार्यक्रम की दूसरी वक्त शैलजा दीदी ने कहा कि हिंदू समाज के परिवारों में संस्कृति और रिश्तों में कमी इसलिए वृद्धाश्रम बन रहे है। 
आज हमें राष्ट्र के लिए जागरूक होने की जरूरत है। उन्होंने पंच परिवर्तन विषय पर अपने विचार रखते हुए इनसे जुड़ी बातों को अपने जीवन में उतारने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि हमें अपनी चेतना को जगाना होगा और राष्ट्र के संबंध में सोचना होगा। हम हिन्दू भाषा, जाति प्रांत में विभाजित है, हमें विमर्श कर इसे बदलना होगा तब हम पुनः अपनी भारत माता को परम वैभव की ओर लेकर जाएंगे। लोगों के समकक्ष सह प्रांत प्रचारक ने कहा कि अपनी स्थापना पर संघ ने कभी इतनी लंबी यात्रा के संबंध में नहीं सोचा, संघ को रोकने और प्रतिबंधित करने और कुचलने के प्रयास हुए लेकिन हम हमेशा खड़े हुए। उसके बाद लोगों ने संघ के विचारों को स्वीकार करना शुरू किया और आज समाज में संघ की स्वीकारोक्ति है
धर्म और देशभक्ति की प्रस्तुतियां.. मंचीय कार्यक्रमों में सनातन और देशभक्ति से जुड़ी प्रस्तुतियां आयोजन का विशेष आकर्षण रही। ऑपरेशन सिंदूर, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई पर आधारित नृत्य नाटिका के साथ मातृशक्ति का धार्मिक गीतों पर नृत्य के साथ देशभक्ति और सनातन पर आधारित कविताओं का वाचन को लोगों द्वारा सराहा गया।

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