बेटी की आबरू बचाने पहुंचे पिता को कुएं में गिराने के बाद.. ऊपर से पत्थर पटककर हत्या करने वाले आरोपी को जिला कोर्ट ने सुनाई डबल उम्रकैद की सजा.. वारदात के दस साल बाद पकड़ा गया था आरोपी..इधर सन्देह का लाभ लेकर एक आरोपी 13 साल पहले हो चुका था वरी..

 जिला कोर्ट ने सुनाई डबल उम्रकैद की सजा..

दमोह। बेटी की आबरू बचाने वाले पिता की वीभत्स तरीके से हत्या को अंजाम देने वाले आरोपी को विशेष न्यायाधीश संजय चतुर्वेदी ने दोहरे कठोर आजीवन कारावास एवं ₹3000 के अर्थदंड से दंडित किया है। मामले में शासन की ओर से पैरवी विशेष लोक अभियोजक राजीव बद्री सिंह ठाकुर द्वारा की गई।

अभियोजन अनुसार 24 दिसंबर 2007 को दिन के तीन बजे ग्राम इमलिया लांजी का रहने वाला हाकम सिंह गांव में डेरा बनाकर रह रहे मंगल को शराब पीने की कहकर अपने खेत में ले गया। थोड़ी देर बाद मंगल की लड़की वही पास में गांव के ही आरोपी कमलू उर्फ कमलेश ढीमर के खेत के कुआं में पानी भरने के लिए पहुंची जब वह पानी भर रही थी तभी आरोपी कमलेश ढीमर ने आकर उसे पकड़ लिया। उसके चिल्लाने की आवाज सुनकर पास के खेत में हाकम के साथ बैठा उसका पिता मंगल वहां जाने के लिए उठा तो पीछे से हाकम ने मंगल को पकड़ लिया और आरोपी कमलेश से कहा कि इसकी लड़की के साथ जो करना है तुम कर लो मैं इसे पकड़े हूं। मंगल ने कोशिश कर अपने आपको हाकम से छुड़ाकर लड़की को कमलेश से छुड़ाया, तब गुस्से में हाकम और कमलेश ने मंगल के साथ मारपीट कर कुएं में पटक दिया। कुएं से निकलने के प्रयास में जब मंगल ने सिंचाई पाइप का सहारा लिया तो कमलेश ने बड़ा पत्थर उठाकर मंगल के सिर पर पटक दिया। जिससे चोटिल हुआ मंगल कुंआ में गिरकर डूब गया। इस बीच शोर-शराबे को सुन कर मंगल के परिवारजन और गांव के लोग वहां आ गए। जिन्हें देखकर हाकम और कमलेश भाग गए। 

शासन की तरफ से पैरवी करने वाले विशेष लोक अभियोजक राजीव बद्री सिंह ठाकुर ने बताया कि घटना की सूचना पर पुलिस ने आकर मंगल का शव कुंआ से निकालवाया और बांसातारखेड़ा पुलिस चौकी में रिपोर्ट लिखाई गई। घटना के बाद से ही आरोपी कमलेश फरार हो गया। वर्ष 2008 में आरोपी हाकम को न्यायालय ने बरी कर दिया था।

 वर्ष 2017 में आरोपी कमलेश ढीमर के मिलने पर न्यायालय में विचारण शुरू हुआ। प्रकरण में आई साक्ष्य और अभियोजन द्वारा प्रस्तुत तर्क से सहमत होते हुए न्यायालय ने आरोपी कमलेश ढीमर को धारा 302 और 3-2-5 एससी एसटी एक्ट में पृथक पृथक आजीवन कारावास और धारा 354 भादवि में एक वर्ष एवं तीन हज़ार रुपये  के अर्थदंड से दंडित किया।

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