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सीएसपी ऑफिस पुराने थाने से 100 मीटर की दूरी पर आधी रात के बाद गूंजी लावारिस की किलकारी.. "ना जाने उस मां की क्या मजबूरी रही होगी जो जन्म देने के बाद बेटे को छोड़ने मजबूर रही होगी".. आसपास के सीसीटीवी फुटेज से हो सकता है लावारिस शिशु फेंकने वाले का पर्दाफाश..

 सिटी नल क्षेत्र में लावारिस शिशु मिलने से सनसनी.. 
दमोह। भी तक गर्भ में बेटियों के होने का पता लगने पर उनका गर्भपात करा दिए जाने या जन्म के बाद कचरे के ढेर पर फेंक दिए जाने के मामले सामने आते रहे हैं लेकिन इस बार एक बेटे के कचरे के ढेर पर लावारिस हालत में मिलने के मामले ने सभी को चौंका कर रख दिया है। इस नवजात को जिला अस्पताल के गहन शिशु चिकित्सा कक्ष में रखा गया है जहां उसका उपचार जारी है।


प्राप्त जानकारी के अनुसार पुराना थाना सीएसपी ऑफिस से 100 कदम की दूरी पर सिटी नल जैन मंदिर मोड़ के समीप कचरे के ढेर पर आधी रात के बाद नवजात शिशु को लाल कपड़े में लिपटा छोड़कर पत्थर दिल मां या उसका नाजायज बाप लावारिस हाल में मरने के लिए फेंक कर चले गए थे। लेकिन कहते हैं मारने वाले से बचाने वाला बड़ा होता है यही वजह रही कि मोहल्ले के कुछ लोगों ने कचरे के ढेर में किलकारी की आवाज सुनी और उन्होंने हंड्रेड डायल को सूचना देने में देर नहीं की।


  लाल कपड़े में लिपटे पड़े नवजात को डायल हंड्रेड पायलट शैलेन्द्र आदर्श, आरक्षक आकाश पाठक व कृष्ण कुमार ने रात ढाई बजे जिला अस्पताल ले जाकर इस नवजात शिशु को डॉ रोहित जैन के सुपुर्द करके घटना की जानकारी दी। जिसके बाद उन्होनें उसे भर्ती करके इलाज शुरू कर दिया है। अंदाजा लगाया जा सकता है यदि रात में ही नवजात को सुरक्षित अस्पताल नहीं पहुंचाया गया होता तो रात में घूमने वाले आवारा कुत्ते उसका क्या हाल करते। 


लावारिस शिशु जिस तरह से गंदी टाविल में नजर आ रहा है उससे अंदाजा लगाया जा सकता है या किसी गरीब घर की संतान हो तथा परिजनों की उस को पालने की भी गुंजाइश ना हो।  नवजात के लावारिस हाल में मिलने के बाद लोग इसके मां बाप को कोसने से लेकर तरह-तरह के प्रलाप करते नजर आ रहे हैं। लेकिन यह भी समझना जरूरी है कि ना जाने उस माँ की क्या मजबूरी रही होगी जो उसने 9 माह तक जिस शिशु को अपने गर्भ में पाल पोस कर सांसे दी होगी उसे इस हाल में कचरे के ढेर पर फेंकने में उसकी कलाइयां जरूर कांपी होगी। हालांकि इस मामले का पर्दाफाश करने के लिए यदि पुलिस आसपास के सीसीटीवी फुटेज को खंगाले तो सुनसान रात में बच्चे को फेंकने वाले का पता लगते देर नहीं लगेगी। 

आपको बता दें कि शहर के अनेक क्षेत्रों में निजी स्तर पर चलने वाली क्लिनिको में गर्भपात से लेकर डिलीवरी कराने कराने वाले तथाकथित झोलाछाप डॉक्टर स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी की वजह से सक्रिय बने हुए हैं। जिनकी क्लीनिक में इलाज के नाम पर मोटी रकम वसूली जाने के साथ जच्चा-बच्चा की मौत हो जाने जैसे हालात भी सामने आते रहे हैं। ऐसे में पुलिस यदि इस ओर भी ध्यान दें तो शायद इस तरह के हालात निर्मित नहीं होंगे। फिलहाल इस मामले में पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का पक्ष सामने नहीं आ सका है।

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1 Comments

  1. जिस क्षेत्र में बच्चा मिला है उसी जगह के आसपास का ही होना चाहिये क्योकि कहीं और से लाकर डाला जाता तो रोने की आवाज सभी को जगा देती और उस क्षेत्र में कोई गरीब नही रहता,, वो गरीब का हो नहीं सकता क्योंकि गरीब अपनी औलाद पाल लेता है परंतु पैसे व अपने आप को इज्जत दार कहने वाले नहीं पाल पाते मामला कुछ और है

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