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पथरिया हाई स्कूल में शिक्षक का शव फांसी पर लटकता मिला.. कल बंडा में एक शिक्षक के रूममेड उप निरीक्षक ने लगाई थी फांसी.. दमोह संसदीय क्षेत्र में तनावग्रस्त सरकारी कर्मचारियों के खुदकुशी को मजबूर होने के हालात ने सभी की चिंता बढ़ाई..

हाई स्कूल में शिक्षक का शव फांसी पर लटकता मिला


 दमोह। संसदीय क्षेत्र में अठारह घण्टे के अंतराल में दो सरकारी कर्मचारियों द्वारा फांसी के फंदे पर झूल कर अपनी जीवन लीला समाप्त कर लेने के दुखद एवं चिंताजनक घटनाक्रम सामने आए हैं। इन दोनों की खुदकुशी की बजह हालांकि जांच के बाद पता चलेगी लेकिन वर्तमान हालात में सरकारी कर्मचारी कितना तनावग्रस्त हो चुका है इसका अंदाजा इन घटनाक्रमों से लगाया जा सकता है।


दमोह जिला मुख्यालय से महज 30 किलोमीटर दूर पथरिया थाना अंतर्गत हाई स्कूल में पदस्थ शिक्षा कर्मी वर्ग 2 पंकज साहू का शव स्कूल में फांसी के फंदे पर झूलते मिलने की खबर से शुक्रवार को सनसनी के हालात निर्मित हो गए। स्कूल के बाहर लोगों की भीड़ एकत्रित हो गई बाद में पथरिया थाना पुलिस मौके पर पहुंची और पंचनामा कार्रवाई करते हुए शव को पोस्ट मार्टम हेतु भेजा गया। फिलहाल शिक्षक की खुदकुशी की वजह का खुलासा नहीं हो सका है लेकिन प्रथम दृष्टया मामला तनावग्रस्त रहने का सामने आ रहा है।
कल बंडा में उपनिरीक्षक ने लगाई थी फांसी..
दमोह संसदीय क्षेत्र अंतर्गत आने वाले सागर जिले के बंडा में एक उपनिरीक्षक का शव कल रात किराए के मकान में फांसी के फंदे पर झूलते मिलने की खबर से सनसनी के हालात निर्मित हो गए थे। बताया जा रहा है कि बालाघाट निवासी उप निरीक्षक गुलेन्द्र टेभरे बंडा थाना क्षेत्र की एक पुलिस चौकी में पदस्थ था।


वह बरा चौराहे के समीप एक किराए के मकान में रहता था जहां गुरुवार रात उसके द्वारा फांसी लगा लेंने की सूचना उसके साथ ही शिक्षक द्वारा बंडा थाना पुलिस को दी गई थी। जिसके बाद पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे थे। आज शव का पोस्टमार्टम करा कर परिजनों को सौंपा गया।
लगातार सामने आ रहे हैं खुदकुशी के मामले..
दमोह जिले में खुदकुशी के मामले लगातार सामने आते रहे हैं। पिछले कुछ दिनों में फांसी के फंदे पर झूल कर या जहरीले पदार्थ का सेवन करके खुदकुशी करने के करीब दर्जन भर मामले सामने आ चुके हैं। जिनमें छात्र बेरोजगार किसान ऑटो चालक मजदूर महिला वर्ग से जुड़े लोग शामिल रहे हैं वहीं पुलिस ऐसे मामलों में मर्ग कायम कर के जांच कार्यवाही तक ही सीमित रही है जबकि अधिकांश मामलों में खुदकुशी का कदम उठाने का कारण किसी न किसी वजह से तनावग्रस्त रहना बताया जाता रहा है। ऐसे में अब जरूरी हो गया है कि युवाओं के बीच में बढ़ते तनाव टेंशन भरे हालात को ध्यान में रखकर शासन प्रशासन ऐसे कदम उठाए जिससे युवा पीढ़ी कुंठा से मुक्त होकर आत्मघाती कदम नहीं उठाए..

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