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राहुल सिंह ने हार के लिए पूर्व मंत्री जयंत मलैया को जिम्मेदार ठहराया.. इधर टंडन-मलैया की मिलीभगत से भाजपा हारी या राहुल..? कही केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल का अति आत्मविश्वास तो नही ले डूबा राहुल को..? वीडी शर्मा का विद्यार्थी परिषद गेम प्लान कैसे फेल हुआ..?

 राहुल सिंह ने हार के लिए मलैया को जिम्मेदार ठहराया..

दमोह विधानसभा के उपचुनाव के नतीजों के साथ भाजपा प्रत्याशी राहुल सिंह की 17 हजार से अधिक वोटों से हुई अप्रत्याशित पराजय ने भाजपा के साथ साथ कांग्रेस नेताओं को भी हैरत में डाल दिया है। राहुल सिंह के साथ भाजपा कांग्रेस नेताओं तथा आम मतदाताओं को जीत हार का अंतर इतना अधिक रहने की उम्मीद नहीं थी लेकिन जिस तरह से शहर के अधिकांश मतदान केंद्रों से भाजपा हारी है उसको लेकर सवाल उठाए जाने लगे यहां तक की भाजपा प्रत्याशी राहुल सिंह भी अब अपनी हार के लिए शहर प्रभारी और पार्टी को अपनी मां बताने वाले नेताओं को खुलकर जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।


चुनाव परिणामों के बाद पालीटेक्निक परिसर से बाहर निकलते हुए भाजपा प्रत्याशी राहुल सिंह ने मीडिया से चर्चा के दौरान करारी हार का ठीकरा पूर्व मंत्री जयंत मलैया और उनके पुत्र सिद्धार्थ मलैया पर फोड़ते हुए नजर आए। उन्होंने पूर्व मंत्री के वार्ड से लेकर शहर केेे अधिकांश मोहल्लों में हार के लिए भितरघात ही वजह बतााई। राहुल सिंह ने साफ शब्दों में कहा कि जो लोग पार्टी को मां बताते थे उन्ही की गद्दारी की वजह से वह दमोह शहर से चुनाव हारे हैं। उन्होंने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री से मलैया परिवार के भीतर घाट की शिकायत करने और उन्हें पार्टी से निष्कासित किए जाने की मांग भी की है। उनका कहना था जिस कांग्रेश के पास कार्यकर्ताओं का टोटा था वह कैसे शहर में इतने अधिक वोटों से जीत सकती थी ?

टंडन-मलैया की मिलीभगत से भाजपा हारी या राहुल..

दमोह नगर के विभिन्न वार्डो में उपचुनाव के दौरान इस बार भाजपा की जैसी दुर्गति हुई है वैसी इसके पहले कभी देखने को नही मिली। जो परिणाम सामने आए है वैसा आक्रोश चुनाव के दौरान राहुल के खिलाफ कभी भी देखने को नही मिला। वैसे भी 2018 के चुनाव में राहुल की जीत की मुख्य बजह मलैया जी के प्रति उनके समर्थक वोटरों का आक्रोश ही था जिसकी अनदेखी तथा दूसरों पर भरोसे की बजह से नजदीकी मुकाबले में मलैया जी को भी पराजय का स्वाद चखा दिया था। इस बार जब राहुल और मलैया भाजपा में एक साथ थे तब भी भाजपा का शहर से क्यों सफाया हुआ यह अहम सवाल बना हुआ है। ऐसे में सवाल यह भी उठ रहा है क्या इस बार भाजपा हारी या राहुल ?

  लोधी वर्सेस अदर और जातीय सम्मेलन भी हार की बजह

 क्या लोधी वर्सेस अदर का मुद्दा राहुल की हार की बजह रहा या टंडन-मलैया की मिलीभगत के चलते राहुल को शहर से उम्मीद के मुताबिक वोट नही मिले..? यह ऐसे सवाल है जिनका जबाव देने शायद ही कोई खुलकर तैयार हो। दरअसल लोधी वर्सेस अदर से निपटने के लिए भाजपा ने अधिकांश समाजों के सम्मेलन करके उनकी जाति के भाजपा नेताओं को मंच पर उतारा लेकिन यही चूक हो गई। इन सम्मेलनों में मंच माला माइक के लिए लालायित और अपनी गोटी फिट करने मैं माहिर लोग तो हाईलाइट हो गए। लेकिन संबंधित समाज के अन्य लोग खुद को उपेक्षित समझ कर घर बैठे रहे और बाद में अधिकांश ने कांग्रेस को वोट किया। 

वीडी शर्मा का विद्यार्थी परिषद गेम प्लान किसने फेल किया..

उप चुनाव के दौरान सबसे अधिक दिनों तक दमोह में रहकर रणनीति तैयार करने से लेकर बैठकर संपर्क में लगे रहने वाले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बीडी शर्मा की रणनीति पूरी तरह से पूर्व में विद्यार्थी परिषद से जुड़े युवाओं पर केंद्रित थी। लेकिन उनका है गेमप्लान दमोह में फेल हो गया क्योंकि उनके इर्द-गिर्द नजर आने वाले नेताओं ने अपने समाज की बैठकें और सम्मेलन तो खूब कराए लेकिन वह वोट नहीं दिला पाए। वही दूसरी और विद्यार्थी परिषद और युवा मोर्चा के जरिए जिला अध्यक्ष पद तक पहुंचे प्रीतम सिंह लोधी का उपयोग करने के बजाय उनको कार्यालय तक सीमित करने और उनके ऊपर कई बाहरी नेताओं को बैठाने का भी गलत संदेश गया। हालांकि भाजपा जिलाध्यक्ष बनने के बाद  प्रीतम सिंह को टीम तैयार नहीं करने की भी छूट नही दी गई थी जिससे वह पुराने पदाधिकारी जो कि मलैया समर्थक थे वह किसी न किसी वजह से गायब रहे।

केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल का अति आत्मविश्वास ले डूबा

दमोह उप चुनाव के दौरान क्षेत्रीय सांसद और केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल का अति आत्मविश्वास राहुल सिंह को ले डूबा विभिन्न चुनावी सभाओं में राहुल के दलबदल और पूतना जैसी शब्दा वली को प्रहलाद पटेल सही ठहरानेे की कोशिश करतेे रहे। दूसरी ओर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह के अधिकांश कार्यक्रम उन्हीं के द्वारा तैयार किए गए। जिससे भाजपा से जुड़ा पुराना समर्पित वर्ग लगातार उपेक्षित होता रहा वहीं पटेल समर्थक नेताओं को भी असली भाजपा दर्शाने का प्रयास किया जाता रहा।

यहां तक की मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान के गली मोहल्लों के बैठक जनसंपर्क अभियान के दौरान भी पहलाद पटेल समर्थकोंं को ही तवज्जो दी गई। जिससे पुरानेे भाजपाई निराश नजर आए दूसरी ओर मुख्यमंत्री के घर घर मेेल मुलाकात मुुहिम के दौरान पूर्व मंत्री जयंत मलैया को साथ में नहीं रखने का संदेश भी दूर तक गया। इधर प्रहलाद पटेल का विधायक राम बाई सिंह और जिला पंचायत अध्यक्ष शिवचरण पटेल के प्रति अत्याधिक झुकाव की वजह से चौरसिया समाज और कुर्मी समाज भाजपा से दूर होता चला गया वही रामबाई के समर्थन का भी राहुल सिंह को कोई खास लाभ नहीं हुआ।

मलैया के साथ नजर आने वाले समर्थक टंडन के पास लौटे

इस उपचुनाव में शहरी क्षेत्र के वोटरों की कांग्रेश के पक्ष में लहर की एक वजह पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया के साथ पिछले 15 सालों से नजर आने वाले अधिकांश पुराने पार्षद और उनके समर्थकों का इस बार अजय टंडन के साथ खड़े होना भी रहा। दरअसल मलैया और टंडन के बीच पारिवारिक संबंधों के साथ गहरी मित्रता किसी से छिपी नहीं है। इन दोनों नेताओं की एक दूसरे के खिलाफ चुनाव लड़ने के अलावा अन्य अवसरों पर जब मलैया का मुकाबला कांग्रेस के अन्य प्रत्याशी से होता था तो टंडन समर्थक मलैया के पक्ष में नजर आते थे। इस बार ऐसे ही भाजपाई मलैया के मैदान में नहीं रहने से अजय टंडन के पक्ष में खुल कर रहे शायद यही बजह रही कभी नहीं हारने वाले बालों में भी भाजपा को पराजय का स्वाद चखना पड़ा। यहां तक कि मलैया की खुद के वार्ड में भी भाजपा हार गई। 

दूसरी ओर भाजपा प्रत्याशी राहुल सिंह द्वारा अजय टंडन के के खिलाफ अति आत्मविश्वास के साथ दिए जाने वाले बयान बाजी का भी गलत संदेश लोगों के बीच गया यहां तक की खुद के वार्ड में चुनाव नहीं जीत पाने को लेकर कमेंट किए जाते रहे। जिस वजह से इस बार लोगों ने आजा टंडन को उनके वार्ड से जिताने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी। पिक्चर अभी बाकी है

शिवराज प्रहलाद वीडी सिंधिया पर भारी अकेले कमलनाथ.

दमोह से कांग्रेस पत्याशी अजय टंडन की जीत में पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष कमल नाथ की अहम भूमिका रही है। वह अकेले ऐसे नेता रहे जो भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बीडी शर्मा, मुख्य मंत्री शिवराज सिंह चौहान, केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर एवं प्रहलााद पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योति रादित्य सिंधिया के अलावा भाजपा के अन्य बड़े नेताओं से प्रचार सभा ओं के मामले में लगातार मुकाबला करते रहे। अंबेडकर जयंती के दिन किया गया रोड शो तथा इस दौरान कांग्रेस प्रत्याशी अजय  टंडन के बीमार पड़ जाने पर उनकी बेटी पारुल द्वारा की गई मार्मिक अपील भी कांग्रेस के पक्ष में माहौल बनाने कारगर साबित हुई


 जबकि प्रचार के अंतिम दिनों में कांग्रेस के स्थानीय बड़े नेता बीमार पड़ जाने से प्रत्याशी अजय टंडन अकेले पड़ गए थे।जबकि दूसरी और चुनाव प्रचार समाप्त होने के ठीक पहल  पुलिस की मौजूदगी में प्रभारी मंत्री की नोटों से भरी गाड़ी को क्लब हाउस के बाहर पुलिस ने पकड़ने की बजाए छोड़ दिया तथा विरोध करने वाले कांग्रेसियों को पकड़ लिया इसका भी असर आम मतदाताओं पर जमकर पड़ता नजर आया है। 

वही बिकाऊ बिकाऊ के मुद्दे पर लोगों ने स्वाभिमान को वोट करते हुए मेडिकल के मुद्दे को नजरअंदाज कर करके यह साबित कर दिया की दमोह वाले दम के साथ स्वाभिमान भी रखते हैं। भाजपा की हार और कांग्रेस की जीत की वजह इनके अलावा भी रही हैं। पिक्चर अभी बाकी है..अटल राजेन्द्र जैन

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