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सोशल मीडिया पर लापता लिखकर टोल करने पर.. 18 घंटे में दूसरी बार जिला अस्पताल पहुंचे सांसद व केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल को.. मरीजों के परिजनों ने ऑक्सीजन इंजेक्शन की समस्या बताई.. मंत्री जी के झल्लाने व डपटने का वीडियो हुआ सोशल मीडिया पर वायरल..

जिला अस्पताल में केंद्रीय मंत्री को मरीजों के परिजनों ने घेरा

दमोह।सोशल मीडिया पर लापता के द्रोल होने के बाद दमोह पहुंचे सांसद और केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल गुरुवार दोपहर 18 घंटे में दूसरी बार जिला अस्पताल का जायजा लेने पहुंचे। इस दौरान उनके साथ भाजपा प्रत्याशी रहे वेयर हाउसिंग एंड लॉजिस्टिक के चेयरमैन राहुल सिंह भी चुनाव के बाद पहली बार जिला अस्पताल पहुंचे। केंद्रीय मंत्री अस्पताल की व्यवस्थाओं का जायजा भी नही ले पाए थे कि मरीजों के परेशान परिजनो को मंत्री जी के आने की खबर लग गई। लोग उनको अपना दुखड़ा सुनाने पहुंचने लगे।

 केंद्रीय मंत्री श्री पटेल जिला अस्पताल परिसर में सिविल सर्जन ममता तिमोरी से जानकारी ले रहे थे कि अचानक मरीजों के पीड़ित परिजनों का आना शुरू हो गया और लोगों ने एक-एक करके अपनी समस्याओं का रोना सुनाना शुरू कर दिया। कुछ ही देर में मरीजों के परिजनों की भीड़ बढ़ने से मंत्री जी के घेराव जैसे हालात निर्मित हो गए। इस दौरान एक मरीज ने जब आवेश में ऑक्सीजन की समस्या बताना शुरू की तो मंत्री जी ने कह दिया कि "ऐसा बोलेगा दो खाएगा" जिस पर उसने जवाब दिया कि उसकी मां तो "दो खा ही रही है" वह भी खा लेगा। 

                               


बाद में सिविल सर्जन ममता तिमोरी को मरीजों की समस्याओं के समाधान हेतु कहकर मंत्री जी आगे बढ़े ही थे कि अन्य मरीज के परिजन जिनमें महिलाएं युवतियां भी शामिल थी ने केंद्रीय मंत्री को इंजेक्शन ऑक्सीजन को लेकर हो रही परेशानियां बताना शुरू कर दी। जिसके बाद मरीजों को आश्वस्त कर वापस लौटने में मंत्री जी ने देर नहीं की। लेकिन मेन गेट के बाहर तक मरीजों के परिजन पीछा करके सांसद जी को अपना दुखड़ा सुनाते नजर आए।

राहुलसिंह अपने बोर्ड से जिला अस्पताल को दिलाएंगे 25 लाख

                               

 इस मौके पर केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल का कहना था कि जिला अस्पताल में आवश्यक इंतजाम कराए जा रहे हैं। ऑक्सीजन तथा इंजेक्शन की व्यवस्था भी ऐसी बनाई जा रही है जिससे लोगों को परेशानी ना हो। उन्होंने जबेरा, हटा, पथरिया में जल्द ही कोविड केयर सेंटर शुरू किए जाने की बात भी कही। जबकि वेयरहाउसिंग एंड लार्जेस्ट क्या चेयरमैन राहुल सिंह का कहना था कि उन्होंने अपने बोर्ड के अधिकारी से 25 लाख रुपए की राशि जिला अस्पताल तथा 12:50 लाख रुपए की राशि हिंडोरिया अस्पताल के लिए जल्द स्वीकृत करने कहा है।

उप चुनाव की व्यस्तता में बिगड़ी कोविड 19 की व्यवस्था.. 

                             

देश प्रदेश में जब कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर उफान पर थी उस दौरान दमोह में जिला प्रशासन चुनावी तैयारियों में जुटा हुआ था। वही प्रदेश के मंत्री नेतागण भी दमोह में डेरा डालकर भीड़ भरी रैली सभा जनसंपर्क कर रहे थे। नतीजन विधानसभा उपचुनाव के चक्कर में जिले में तहसील स्तर तथा नगर के अन्य क्षेत्रों में कोविड केयर सेंटरो को समय रहते संचालित करने ध्यान नही दिए जाने से कोरोना काल में मरीजों का पूरा दबाव जिला अस्पताल पर आ गया। तैयारियां की यही अनदेखी अब मरीजों और उनके परिजनों पर भारी पड़ रही है।

 मीडियाकर्मियों के परिजनो की भी नही हो रही सुनवाई..

अप्रैल माह में भारी संख्या में कोविड केस आने से जिला अस्पताल में मरीज फर्श पर नजर आने लगे है। इधर प्रशासनिक दावों के बावजूद ऑक्सीजन और इंजेक्शन की कमी बने रहने से अफरा तफरी भरे हालात बने हुए है। यहां तक अस्पताल में भर्ती पत्रकारों के परिजनों को भी ऑक्सीजन के लिए पीआरओ से लेकर कलेक्टरतक सन्देशा पहुंचाना पड़ रहा है। 

सीटी स्कैन से लेकर अन्य जांच व एंबुलेंस भी महंगी हुई.. 

                               

कोरोना काल में अस्पताल में मरीजों को ऑक्सीजन और इंजेक्शन की कमी से जहां जूझना पड़ रहा है वही कोविड-19 रिपोर्ट की पुष्टि हेतु सीटी स्कैन जांच कराने के लिए भटकना पड़ रहा है प्राइवेट सेक्टर में होने वाली जांच की जहां मनमानी कीमत वसूली जा रही है वहीं मरीजों के बैठने से लेकर छाया पानी तक के कोई इंतजाम नहीं है वहीं जांच रिपोर्ट लेने के लिए घंटों के इंतजार और चक्कर के बाद संबंधित डॉक्टर को जांच रिपोर्ट दिखाने में ही मरीज और परिजनों के दो से 3 दिन खराब हो जाते हैं। ऐसे में तब तक कई मरीजो को कोरोना का संक्रमण फेल कर फेफड़ों तक पहुंच चुका है और गंभीर मरीज का बचना मुश्किल हो रहा है। इसी तरह खून पेशाब आदि की जांच कराने वाले लैब में भी मनमानी राशि वसूली जा रही है वही अस्पताल के बाहर 24 घंटे डेरा जमाए रहने वाले निजी एंबुलेंस संचालक जबलपुर जाने का दुगना तिगुना किराया वसूल रहे हैं। इनके पास ऑक्सीजन के सिलेंडर कहां से आ रहे हैं यह भी जांच कार्रवाई का विषय हो सकता है।

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