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50 हजार के इनामी गोविंद सिंह का नही लगा कोई सुराग, सहयोगियों की गिरफ्तारी का भी नही दिखा असर.. सिद्धार्थ ने SC की फटकार के बाद पुलिस कार्रवाई पर उठाए सवाल.. इधर CJM कोर्ट ने गोविंद के गिरफ्तारी वारंट को न्यायोचित ठहराया..

 50 हजार के इनामी गोविंद सिंह का नही लगा कोई सुराग

दमोह। हटा में 2 साल पहले हुए देवेंद्र हत्याकांड मामले में फरार चल रहे पथरिया विधायक रामबाई सिंह के पति गोविंद सिंह की गिरफ्तारी पर डीजीपी द्वारा 50000 के ईनाम घोषित कर दिए जाने के बाद भी अभी तक कोई सुराग नहीं लग सका। इधर गोविंद सिंह की गिरफ्तारी को लेकर कुछ स्थानों पर चस्पा कराए गए पंपलेट भी गायब हो गए हैं। वही गोविंद सिंह के सहयोग के मामले में गिरफ्तार तीन आरोपितों से पुलिस को क्या जानकारी हासिल हुई इसके परिणाम सामने नहीं आ सके हैं।  दमोह सीजीएम कोर्ट ने भी देवेंद्र चौरसिया हत्याकांड मामले से गोविंद के नाम हटाने की खारीजी को कैंसिल कर दिया है।
देवेंद्र चौरसिया हत्याकांड मामले में सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद पुलिस प्रशासनिक महकमे में दो-तीन दिन तक जारी रही हड़बड़ी और गहमागहमी एक बार फिर सन्नाटे में तब्दील होती नजर आ रही है। हालांकि गोविंद की गिरफ्तारी को लेकर एसटीएफ की विभिन्न टीमों के गठन के बाद उनके द्वारा प्रदेश के विभिन्न शहरों और प्रदेश के बाहर सरगर्मी से तलाशी की बात कही जा रही है।

 वही प्रदेश के डीजीपी द्वारा गोविंद की गिरफ्तारी पर इनाम राशि बढ़ाकर 50 हजार कर दिए जाने के बाद शहर के कुछ स्थानों पर चस्पा कराए गए पंपलेट का कुछ घण्टो बाद ही गायब हो जाना चर्चा का विषय बना हुआ है। ऐसे में भाजपा नेता सिद्धार्थ मलैया द्वारा इस मामले में सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद पुलिस द्वारा की जाने वाली कारवाई पर सवाल उठाने और इसे खानापूर्ति बताने की भी पुष्टि होती दिख रही है। 
 उल्लेखनीय है कि  3 दिन पूर्व विधायक रामबाई के निवास पर गोविंद की तलाश में पहुंची पुलिस टीम द्वारा जहां उनकी बेटी के बयान दर्ज कराने नोटिस दिया गया था वही तहसीलदार द्वारा उनके मकान का नापतोल कराने के बाद गार्डन की दीवार का एक हिस्सा भर गिरा कर कार्रवाई पर विराम लगा दिया गया था। जबकि इस दौरान विधायक रामबाई तहसीलदार को अपनी पीड़ा बताने के साथ ज्यादा प्रताड़ित किए जाने पर परिवार सहित खुदकुशी कर लेंने जैसी बात करती दिखी थी।

 इसके बाद अभी तक कोई ऐसी का कार्रवाई सामने नहीं आई है जिसे देखकर यह कहा जाए कि गोविंद सिंह मामले में पुलिस वैसी ही सक्रिय बनी हुई
है जैसे की वह सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद वह नजर आ रही थी। हालांकि पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है एसटीएफ की विभिन्न टीमें गोविंद की तलाश में लगातार जुटी हुई है जल्द से पकड़ लिया जाएगा।

सीजीएम कोर्ट ने वारंट जारी करने को न्यायोचित ठहराया 
दमोह न्यायालय की सीजेएम न्यायाधीश रजनी प्रकाश बाथम ने आरोपी गोविंद सिंह के पक्ष में हटा पुलिस की ओर से प्रस्तुत ख़रीजी आवेदन को निरस्त करते हुए पूर्व में हटा न्यायालय द्वारा गोविंद सिंह के विरुद्ध अपराध में वारंट जारी करने की कार्यवाही को न्यायोचित ठहराया है व हटा पुलिस की ओर से गोविंद सिंह के पक्ष में प्रस्तुत हत्या के मामले में ख़रीजी लगाने के आवेदन को निरस्त कर दिया है।
दरसल एक वर्ष पूर्व हटा पुलिस की ओर से देवेंद्र चौरसिया हत्याकाण्ड में मुख्य आरोपी गोविंद सिंह की मोबाइल लोकेशन घटना स्थल पर न पाए जाने और विधायक की  सुरक्षा में मौजूद गार्ड्स के बयानों के आधार पर गोविंद सिंह के विरुद्ध मुकदमा ख़रीजी हेतु आवेदन पत्र प्रस्तुत किया था। प्रकरण में पैरवी कर रहे अधिवक्ता ने न्यायालय के समक्ष तर्क रखा के कोई शातिर अपराधी यदि घटना करने के पूर्व अपना मोबाइल कही और छोड़ देता है तो इससे उसकी टावर लोकेशन के आधार पर बचाया नहीं जा सकता ।
वहीं मामले के रिपोर्टकता महेश चौरसिया व आहत सोमेश चौरसिया ने आरोपि के विरुद्ध कथन न्यायालय में वी सी के माध्यम से दिए थे। तमाम पहलुओं पर विचार करने के उपरांत दमोह न्यायालय ने आरोपी गोविंद सिंह के पक्ष में प्रस्तुत ख़रीजी आवेदन निरस्त करते हुए प्रकरण वापिस हटा न्यायालय प्रेषित कर दिया है।

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