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दमोह के जबलपुर नाका क्षेत्र से लापता तीनो बच्चे जबलपुर रेलवे स्टेशन पर ठंड से कांपते मिले.. स्थानीय पुलिस और रेलवे पुलिस की तत्परता के साथ सोशल मीडिया पर जबरदस्त ढंग से वायरल मैसेज और सीसीटीवी फुटेज की मदद से मासूम बच्चों के सकुशल मिलने से सभी ने राहत की सांस ली..

 लापता तीनो बच्चे जबलपुर स्टेशन पर ठंड से कांपते मिले..

दमोह। शनिवार शाम घर स खेलने के लिए निकलने के बाद रात तक वापिस नहीं लौटने वाले दमोह के जबलपुर नाका क्षेत्र निवासी तीनों मासूम बच्चे देर जबलपुर में  सकुशल मिल गए हैं। जिसके बाद परिजनों के साथ शहर वासियों ने भी राहत की सांस ली है तथा तत्परता दिखाने वाली स्थानीय पुलिस और जबलपुर की रेलवे पुलिस को  धन्यवाद दिया है।
उल्लेखनीय है कि जबलपुर नाका के समीप राजा पटना बैंक के पास रहने वाले बारह तेरह वर्ष के तीन बच्चे 30 जनवरी की शाम घर से किर्केट खेलने को निकले थे। इसके बाद रात का अंधेरा छा जाने पर भी वह वापिस नही लौटे थे। इसके बाद परिजनों ने जबलपुर नाका चौकी में उनकी गुमशुदगी की शिकायत दर्ज कराई थी। वन सोशल मीडिया पर परिचय तो संबंधियों ने बच्चों की फोटो वायरल कर के इनका पता बताने सभी से अपील की थी। इधर मामला संवेदनशील होने की वजह से स्थानीय पुलिस के अधिकारी भी साइबर सेल एवं सीसीटीवी फुटेज की मदद से बच्चों की तलाश में जुट गए थे।

पुराने आईफोन लेने के चक्कर में इन बच्चों के दिल्ली जाने की बात उनके दोस्त के जरिए चर्चा में सामने आने के बाद स्थानीय पुलिस रेलवे स्टेशन तथा आसपास के सीसीटीवी फुटेज के अलावा दिल्ली जाने वाली गोंडवाना ट्रेन मै भी रेलवे पुलिस की  मदद से बीना झांसी के आगे तक बच्चों की सर्चिंग करा चुकी थी। लेकिन कोई सुराग नहीं लग सका था। इधर देर रात जबलपुर रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ को तीनों बच्चे बेंच पर बैठे कांपते हुए मिले। तथा उनकी पहचान दमोह से गायब बच्चों के तौर पर होने के बाद दमोह रेलवे पुलिस को सूचना दी गई और फिर स्थानीय पुलिस तक जानकारी मिलने पर परिजनों के साथ बच्चों को लेने देर रात है पुलिस अधिकारी जबलपुर रवाना हो गए थे।

एसपी हेमंत चौहान के निर्देशन में सीएसपी अभिषेक तिवारी,  देहात थाना टीआई दीपक खत्री, जबलपुर नाका चौकी प्रभारी भल्ला दुबे के साथ साइबर सेल टीम की तत्परता सक्रियता मामले में उल्लेखनीय बताई गई है। वही जबलपुर स्टेशन पर  सीसीटीवी फुटेज के आधार पर आरपीएफ के एएसआई वीरेंद्र यादव, प्रधान आरक्षक संजीव खोसला एवं राजेंद्र सिंह बघेल बच्चों की बरामदगी में विशेष योगदान बताया जा रहा है।

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