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केन्द्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल ने नदी संरक्षण, ऊर्जा और पर्यटन पर 5 वां भारत जल प्रभाव शिखर मिशन 2020 की वर्चुअल समिट को किया संबोधित.. सतधरू सिंचाई परियोजना स्थल का जायजा लिया.. झलौन में गौ-पूजा कर गौ-शाला का लोकार्पण किया..

  केन्द्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल ने वर्चुअल समिट को संबोधन

दमोह। प्रधानमंत्री जी कहते हैं कि जब भी संस्कृति के प्रवाह को देखते हैं तो नदी के अलावा कोई दूसरा आधार दिखता नही हैं। नदी ईश्वर की सबसे श्रेष्ठ रचना हैं जिसके सहारे हजारो लाखो वर्षों से विभिन्न संस्कृतियो ने अपने अपको पनपाया, मजबूत किया हैं। मै नर्मदा का पैदल यात्री भी हूँ और परिक्रमा भी की हुई हैं, गंगा हमारा प्रारंभिक प्रयास है, हमें सभी नदियों के बारे में प्रयास करना होगा क्योकि जब नदियों की बारे मे बात होती हैं, तो सम्पूर्ण देश का प्रतिनिधित्व हम करते हैं। इस आशय के विचार केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री श्री प्रहलाद पटैल ने नदी संरक्षण, ऊर्जा और पर्यटन पर 5 वां भारत जल प्रभाव शिखर मिशन 2020 की वर्चुअल समिट को संबोधित करते हुये व्यक्त किये।

 केन्द्रीय राज्यमंत्री श्री पटैल ने कहा नदियो का परिक्रमावासी होने के नाते मेरा अनुभव साफ कहता है कि नदियो मे ईश्वर वास करते हैं और स्वाभिक है जो जीवन देने वाला होगा, उसमें ईश्वर वास करते ही हैं, तमाम जीवित लोगो को जीवन देने का काम नदी करती हैं। बिन पानी सब सून है। जो भी उपक्रम हमने बनाये है, वह बाद मे बनाये है, पहले तो हम नदियो के सहारे ही थे। प्रकृति के जीवन मे कोई संचार होता है, तो वह बिना नदी के नही हो सकता हैं। उन्होंने कहा नर्मदा अविरल है, और मेरा मानना है, जो जीवन देने वाले है, उससे ज्यादा ऊर्जा देने वाला कोई दूसरा नही हो सकता हैं, जो संस्कृति को ऊर्जा देकर पनपाती है, उसकी ऊर्जा का कोई पैमाना नही हो सकता हैं। आप नदी के किनारे बैठिये उसका स्पंदन, स्वानिध्य एवं स्वर आपको सामानिध्य कर देगा। 

उन्होंने कहा पर्यटन मात्र आनंद प्राप्त करने का साधन नही है, बल्कि ज्ञान प्राप्त करने का भी साधन है। हम नदियों को आधार मानते है, नदिया हमारे सांस्कृतिक उत्थान का मेरूदण्ड हैं। यदि नदियो का सहजने का काम किया जाये तो सबसे पहले उसकी अविरलता बहुत जरूरी हैं, नदिया स्वच्छ और अविरल होगी यही हमारा प्रयास होना चाहिए। नदी की ऊर्जा एवं नदी के किनारे पर्यटन एक दूसरे के पर्याय है, इन्हे आप अलग नही कर सकते, देखने का एक ही आधार है नदी के किनारे पनपते हमारे सांस्कृतिक मूल्यों को हम कैसे जाने, उसके किनारे साधना करने वाले साधु के बारे मे हम कैसे जाने, यही इस समिट का लक्ष्य होगा यही मेरी अपेक्षा हैं। श्री पटैल ने कहा कोरोना काल मे लोगो ने जो आचरण प्रस्तुत किया है, वह संस्कृति की बडी विशेषता हैं।

सतधरू सिंचाई परियोजना स्थल का जायजा लिया..

दमोह।  केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री श्री प्रहलाद पटैल ने कहा है कि वह दिन दूर नहीं की जब दमोह पंजाब से कम नहीं रहेगा। उन्होंने कहा हमारा किसान मेहनतकश है, पानी और बिजली हम देंगे तो यहां की खेती पंजाब के खेतों की तरह हो जायेगी। हमें सिंचाई के कामों से संतोष मिलता है, यह डेम 2021 में पूरा हो जायेगा। श्री पटैल आज सुबह 09 बजे सतधरू सिंचाई परियोजना का निरीक्षण कर रहे थे। उन्होंने कहा यह एक अच्छी साइड है, जो सबसे पहले होनी चाहिए थी क्योंकि कभी यदि दमोह में कभी जल का संकट हो तो कोई यदि बेहतर पावर स्टेशन होगा, तो वह सतधरू परियोजना ही होगा।

 केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री श्री प्रहलाद पटेल ने कहा सतधरू परियोजना हमें बहुत दूर की सोच कर चलना चाहिए, यह परियोजना ‍सिचाई एवं पीने का पानी का प्रबंध करेगा, उन्होंने कहा मैं प्रधानमंत्री जी का जरूर आभार व्यक्त करूंगा, वहां बैठकर देश के एक-एक परिवार के बारे में विचार हो सकता है और वह मूर्त रूप ले सकता है। उन्होंने कहा तकनीकी बातें आने वाली जनरेशन को भी समझना चाहिए, एक तरफ आप ग्रेविटी से पानी पहुंचा रहे हो और दूसरी तरफ लिफ्ट के माध्यम से भी सैकड़ों मीटर तक पानी पहुंचा सकते हैं। सतधरु इस मामले में जानकारी बढ़ाने वाली योजना भी है, यह योजना लोगों को सिर्फ लाभ नहीं देगी, बल्कि तकनीकी रूप से जानकारियां बढ़नी चाहिए, उसकी दृष्टि से भी बहुत महत्वपूर्ण योजना है। उन्होंने कहा सबसे कम लागत का बांध सतधरू परियोजना ही है, अगले वर्ष जून की टाइमलाइन इस परियोजना को कंप्लीट होने के लिए रखी गई है। समय पर चीजें चल रही है, यह खुशी की बात है, कुछ काम कोरोना काल में प्रभावित हुए हैं, उन की समय सीमा भी तय की जा रही है, उनके आधार पर काम होंगे जिससे परियोजना को अंतिम रूप देने में मदद मिलेगी।

इस अवसर पर कार्यपालन यंत्री जलसंसाधन ने 315 करोड रुपए लागत की योजना की जानकारी देते हुए बताया कि इसमें डैम और पाइप लाइन का काम किया जायेगा, डैम से 55 प्रतिशत काम कंप्लीट हो चुका है, साथ ही हर्षा कंस्ट्रक्शन का कैनाल का काम 97 करोड़ का एग्रीमेंट है, जिसमें लगभग 26 करोड़ का काम हो चुका है, यह पूरी परियोजना जून 2021 तक तक कंप्लीट करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। हर्षा कंस्ट्रक्शन का एग्रीमेंट 3 साल तक का है, डैम के काम को आगे बढ़ाया गया है, यह काम मार्च 2020 तक का था। उन्होंने कहा इस योजना से 7555 हेक्टेयर की सिंचाई की जाएगी, जिसमें सतधरू डैम में 63 एमसीएम पानी टोटल लाइव स्टोरेज होगा, जिसमें 27 एमसीएम पानी जल निगम एवं 24 एमसीएम पानी इरिगेशन के लिए और शेष वाटर डैड वाटर होगा।


 जल निगम के महाप्रबंधक ने बताया कि मध्य प्रदेश जल निगम द्वारा दो परियोजनाए क्रियान्वित की जा रही है, दमोह-पटेरा समूह जल प्रदाय योजना, जिसमें 447 गांव सम्मिलित किए गए हैं एवं दूसरी जबेरा-तेंदूखेड़ा जिसमें 218 गांव को पानी मिलना है, इस परियोजना से प्रत्येक गांव के प्रत्येक घर में टोंटी के द्वारा जो प्रधानमंत्री जी का जल जीवन मिशन है, प्रत्येक घर में टोंटी से हम पानी देंगे, मिशन के अंतर्गत यह योजना चल रही है। उन्होंने बताया एक परियोजना का काम लगभग 67 एवं दूसरी परियोजना का 60 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका हैं । उन्होंने बताया सतधरू परियोजना में हमारा इंटेल टेंक बन रहा है, दो फिल्टर प्लांट बन रहे हैं, इसमें 8 जगह पाने की टंकियां जिन्हें एमबीआर कहा जाता है, को बना रहे हैं, जिसमें ग्रेविटी के माध्यम से 240 टंकियों में पानी पहुंचाया जाएगा, 240 टंकियो के माध्यम से पूरे 665 गांव में प्रत्येक गांव में प्रत्येक घर में पानी पहुंचाया जाएगा।

उन्होंने बताया इस परियोजना में सभी ग्रामीणों का भी सहयोग रहेगा, गांव स्तर की कमेटियां, समितियां, सैनिटेशन कमेटी बनेगी, जो गांव के अंदर की व्यवस्था, विलेज वाटर सप्लाई देखेंगी, जिसमें एक कनेक्शन के लिए गरीबी रेखा के नीचे परिवार को 100 रूपये और गरीबी रेखा के ऊपर के परिवार को 500 रूपये कनेक्शन के लिया जाएगा, जो पैसा समिति लेगी ,इसमें किसी ठेकेदार का हिस्सा नहीं रहेगा, इसमें जो भी काम किया जाएगा, वह समिति के माध्यम से किया जाएगा, न्यूनतम 60 रूपये जल कर के रूप में प्रतिमाह लिया जाएगा। इस परियोजना में 665 गांवों को पानी पहुंचाया जाएगा, जबेरा के प्रत्येक विकासखण्ड का एरिया, दमोह के लगभग 160 गांव, पटेरा 105, हटा 43 के गांव कवर किए जा रहे हैं, यह शासन की बहुत महत्वकांक्षी योजना है, सभी का प्रयास है दिसंबर 2021 तक प्रत्येक परिवार को इस योजना से लाभ दिया जा सकेगा।         

केन्द्रीय मंत्री ने झलौन में गौ-शाला का लोकार्पण किया

दमोह। गाय की एनर्जी की देश को बहुत जरूरत है। पूर्वजों की जीवन शैली, जीवन जीने के हर हिस्से अपने आपमें लाजवाब होते है। विश्वास करिए भारत की जीवन शैली, उसके प्रति भरोसा, मान, अब दुनिया में सर्वोच्च स्थान पर है, हमारे पूर्वज वैज्ञानिकों से ज्यादा आगे है, यह स्वीकार किया जा चुका है। 
इस आशय के विचार केन्द्रीय संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटैल ने आज जबेरा विधानसभा क्षेत्र अन्तर्गत आने वाले ग्राम झलौन में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा 100 गायों के लिये निर्मित 27.72 लाख की लागत से गौ-शाला का लोकार्पण करते हुये व्यक्त किये। 

राज्यमंत्री श्री पटैल ने कहा गाय के गोबर को लीपने से घर का तीन से चार डिग्री तक तापमान कम हो जाता है। एक परिवार को एक गाय अवश्य पालना चाहिए।गौ सेवा आने वाली पीढ़ी के लिए भी है। गाय की सेवा ही सच्ची गौ सेवा है, हाथों से गौ माता का गोबर उठाने वाला ही सच मायने में वही गाय का सेवक है। घर में यदि भूसा निकलता है और आप गौशाला तक नहीं ला पाते तो गौशाला संचालक को अवश्य बताएं, वे भूसा लाने की व्यवस्था करायेंगे।

 इस अवसर जबेरा विधायक धर्मेन्द्र सिंह लोधी ने कहा इस वर्ष भी नई गौशालाओं की स्वीकृति ली जा रही है, गौशाला संचालन में जितनी समूह की जिम्मेदारी है, उतनी ही समाज की है, गौ सेवा एक बहुत बड़ा धर्म है, जिसको हमको और आप सबको मिलकर करना है, गौ सेवा में किसी भी रुप से जुड़ सकते हैं, भूसा भी दे सकते हैं, श्रमदान भी कर सकते हैं, इससे बड़ा कोई दान नहीं है, कोई सेवा कोई धर्म नहीं है।पूर्व विधायक प्रताप सिंह लोधी ने भी आम-जन को संबोधित किया। उन्होंने कहा जनभागीदारी से गौ शाला अच्छी चलेगी। श्री लोधी ने कहा गऊ तो सभी रखते है, परंतु सेवा नहीं करते, गौसेवा के लिये बच्चों को प्रेरित करना होगा।

पूर्व ऊर्जा मंत्री श्री दशरथ पटेल ने कहा किसी भी योजना को जब अमली जामा पहनाया जाता है, तब क्षेत्र में उस योजना को लागू किया जाता है, योजना तभी सफल होती है, उस क्षेत्र की जनता जनार्दन का सहयोग मिले। गौमाता की सेवा आज पूरा विश्व कर रहा है, गौमाता से हम और हमारा परिवार का भरण पोषण होता है। उन्होंने क्षेत्रवासियों से निवेदन किया गौ सेवा सेवा करें, गाय दूध देना बंद कर दें, तो उसे यहां वहां ना छोड़े, उसकी सेवा करें, समितियों का गठन किया जाए, जो गौ सेवक गौशाला में गौ माता की सेवा करें।

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