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क्वॉरेंटाइन सेंटर में भर्ती नाबालिग ने पहले ज्यादती के आरोप लगाए.. बाद में बुआ की समझाईस पर बयान से पलटी.. बार बार बयान बदलने से परेशान अधिकारियों ने राहत की सांस लेकर चुप्पी साधी.. पतली दाल सब्जी की भी कलई खुली..

क्वॉरेंटाइन सेंटर में भर्ती नाबालिग ने जमकर छकाया-
 कोरोना वायरस के संक्रमण के बीच लोगो को जहां अपनी जान बचाने के लिए सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए घरों में रहना पड़ रहा है वही संभावित संक्रमण के शिकार लोगों को क्वॉरेंटाइन सेंटर में रखकर स्वस्थ किया जा रहा है। ऐसे में किसी क्वॉरेंटाइन सेंटर में यदि नाबालिग से छेड़छाड या ज्यादती की बात सामने आए तो एकदम से किसी को विश्वास नहीं होगा। लेकिन कुछ ना कुछ तो सच्चाई होगी। तब तो यह बात क्वॉरेंटाइन सेंट्रर से निकलकर बाहर पुलिस प्रशासनिक अधिकारियों के बीच तक पहुंची।
दमोह जिले के पथरिया में संचालित एक क्वॉरेंटाइन सेंटर में  ऐसा ही मामला सामने आने से रविवार को दिनभर पुलिस प्रशासनिक अधिकारी परेशान होते रहै। स्थानीय मीडियाकर्मी भी शाम तक अधिकृत जानकारी के लिए परेशान होते रहे। लेकिन अंत में "खोदा पहाड़ और निकली चुहिया"  की कहावत को चरितार्थ करती हुई नाबालिक ने अपने बयान से पलटकर मामले की हवा निकाल दी। फिर भी खबर तो खबर है इसीलिए अफवाहों को विराम देने के लिए उसे आप तक पहुंचाना जरूरी हो गया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार पथरिया में संचालित एक क्वॉरेंटाइन सेंटर में बाहर से आए मजदूर परिवारों को 14 दिन के लिए रखा गया है। इनमें बाहर से आये अनेक मजदूर परिवार भी शामिल है। ऐसे ही एक परिवार के वरिष्ठ सदस्य की अपनी बेटी समान लड़की के साथ हरकतें वहां इलाजरत एक युवती को संदिग्ध लगी। इस युवती ने शनिवार को मौका पाकर डरी सहमी नाबालिक से जब इस बारे में पूछा तो उसने बताया कि यहां वह अपनी बुआ फूफा के साथ क्वॉरेंटाइन में है तथा उसका फूफा अकेले में उसके साथ गलत हरकतें करता है। पूर्व भोपाल में भी इस तरह की हरकतें करने की उस में जानकारी दी।
 रविवार को क्वॉरेंटाइन सेंटर में तैनात पुलिसकर्मियों को उक्त युवती ने उपरोक्त हालात से अवगत कराया तथा नाबालिग से भी इसकी पुष्टि कराई। जिसके बाद मामले की जानकारी पथरिया टी आई, तहसीलदार, बीएमओ आदि तक पहुंची। इन सभी के समक्ष भी नाबालिग ने फूफा द्वारा गलत हरकतें करने की बात दोहराई। मामले में उच्चाधिकारियों को जानकारी दिए व नाबालिग के माता पिता के बारे में जब जानकारी हासिल की गई। पता लगा कि मां करीब 6 माह पहले किसी ओर के साथ चली गई थी। जिस पर जबलपुर निवासी पिता ने उसे भोपाल निवासी बुआ फूफा के पास भेज दिया था। 
जिसके बाद नाबालिग के परिजन के तौर पर क्वॉरेंटाइन सेंटर से उसकी बुआ को बुलाकर हालात से अवगत कराया गया। बुआ से देर तक चर्चा तथा समझाइस के बाद नाबालिग ने अपने बयान बदल दिए तथा पूर्व में लगाए गए आरोपों की जगह उसने अपने फूफा पर मारपीट की बात कहीं। अब उसका कहना था कि क्वॉरेंटाइन सेंटर में अच्छा नहीं लगता इसलिए उसने इस तरह के आरोप लगाए थे। इस तरह से पूरे मामले का दिन भर के उतार-चढ़ाव के बाद फिलहाल पटाक्षेप हो गया है। लेकिन अनेक सवाल अभी भी अनुत्तरित बने हुए हैं। वहीं स्थानीय पुलिस प्रशासनिक अधिकारी हुई अधिकृत बयान देने से बच रहे हैं।
जबकि जानकारों का कहना है कि क्वॉरेंटाइन सेंटर के जिस ऊपरी हिस्से में इस परिवार को रखा गया है वहां पर सीसीटीवी कैमरे भी नहीं होने की जानकारी सामने आई है। वही क्वॉरेंटाइन सेंटर में दिया जाने वाला भोजन मरीजों की सेहत से खिलवाड़ करने वाला बताया जा रहा है। पतली दाल, सब्जी, रोटी, चावल से कैसे क्वॉरेंटाइन में मरीज की हालत में सुधार होगा इसको लेकर कोई कुछ भी कहने को तैयार नहीं है। जबकि शासन क्वॉरेंटाइन में भर्ती मरीजों की सेहत में सुधार के साथ भोजन सहित अन्य इंतजामों पर खुले हाथों से राशि खर्च कर रही है। जिले के अन्य को क्वॉरेंटाइन सेंट्रो में भी भोजन आदि पर भरपूर खर्च के बाद इंतजाम ठीक नहीं होने की जानकारी सामने आ रही है। पिक्चर अभी बाकी है..

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