सिंधिया कमलनाथ में आर पार की सियासत के बीच.. राज्यसभा चुनाव के पहले मप्र में कांग्रेस सरकार के मंत्रियों के बाद.. सिंधिया व समर्थक विधायको ने भी खेली स्तीफो की होली. भाजपा समर्थकों को होली के भंग में आने लगी सत्ता की गंध...

मप्र में मंत्रियों के त्यागपत्र बाद सिंधिया का भी इस्तीफा
भोपाल। मप्र में राज्यसभा चुनाव के पहले जारी सियासी घमासान अब "बुरा न मानो होली है" की तर्ज पर कांग्रेस के बड़े नेताओ की आपसी खींचतान के चलते मप्र के सभी मंत्रियों के सामूहिक त्यागपत्र तक पहुच गई है। जिसे प्रदेश की राजनीति में सिंधिया कमलनाथ के बीच आर या पर की जंग के तौर पर भी देखा जाने लगा है। इधर होली के दिन श्री सिंधिया और उनके समर्थक 19 विधायकों द्वारा कांग्रेस सेे त्यागपत्र के साथ भाजपा समर्थको की होली का जश्न डबल हो गया है। 
होलाष्टक के साथ शुरू हुआ सहयोगी दलों के विधायकों का दिल्ली बेंगलुरु मैं खरीद-फरोख्त का ड्रामा होली के दिन पूर्व केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के भाजपा में शामिल होकर राज्यसभा के जरिए केंद्रीय मंत्री बनने जैसी चर्चाओं से सरगर्म बना रहा था। इधर होलिका दहन के साथ भोपाल से खबर आ गई कि मप्र के सभी मंत्रियों ने मंत्रि मंडल की बैठक के बाद अपने इस्तीफे मुख्यमंत्री कमलनाथ को सौंप दिए है। 
हालांकि इसकी वजह मंत्री मंडल का पुनर्गठन करके असंतुष्ट विधायकों को मंत्री पद देकर संतुष्ट किए जाने से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं सूत्रों का कहना है कि मंत्रियों के सामूहिक इस्तीफे के जरिये प्रदेश में कांग्रेस की सरकार को बचाए रखने के लिए आखिरी प्रयास किए जा रहे थे। हो सकता था कि मप्र में कांग्रेस सरकार बचाए रखने के लिए मुख्यमंत्री कमलनाथ भी अपना इस्तीफा दे देंते तथा उनकी जगह बगावत की चिंगारियां फैला रहे पूर्व केंद्रीय मंत्री श्री सिंधिया को CM की गद्दी सौप दी जाती।  
लेकिन इस बात की संभावना कम ही थी सिंधिया अल्पमत जैसे हालात में मुख्यमंत्री की कमान संभालने तैयार होंगे। इधर श्री सिंधिया के भाजपा के सहयोग से राज्यसभा में जाने और उनके समर्थक मंत्रियों द्वारा प्रदेश मंत्रिमंडल से इस्तीफा देने की पेशकश किए जाने के बाद ही सभी मंत्रियों ने सामूहिक इस्तीफे देकर फिलहाल श्री सिंधिया को कांग्रेस में बने रहने के लिए मनाने का एक और अवसर देकर इसी तरह से प्रदेश में कांग्रेस सरकार को बचाए रखने के लिए यह दांव खेला गया था जो अंत मे फेल रहा। 
इधर यह खबर भी सामने आई थी कि सिंधिया को मनाने के लिए कांग्रेस की राजमाता सोनिया गांधी और महाराजा करणसिंह से भी भी फोन पर चर्चा की गई थी। लेकिन फिर भी नतीजा डाक के तीन पात जैसा ही रहा। इधर भाजपा के प्रदेश में फिर से सत्ता सम्हालने की खबरो के बीच भाजपा विधायक दल की बैठक में शिवराज सिंह को फिर से नेता चुने जाने की संभावना जताई जाने लगी है।
क्या होलिका दहन के साथ क्या प्रदेश में कांग्रेस सरकार के दिन भी पूरे हो चुके है तथा प्रहलाद रूपी सिंधिया को अपने पाले में लाकर भाजपा प्रदेश में फिर सत्तासीन होने के मिशन में कामयाब हो जाएगी। इसका अंदाजा श्री सिंधिया द्वारा अपने समर्थक विधायकों के साथ कांग्रेस से त्यागपत्र से लगाया जा सकता है।


  कमलनाथ सिंधिया के बीच में चली "आर या पार की जंग" भाजपा के लिए "बिल्ली के भाग से छींका टूटना" से कम नहीं है। होली के दिन राजनैतिक उठापटक की बौछार के बीच अब कांग्रेस के अनेक नेता सिंधिया को गद्दार बताने से नही चूक रहे है। वही कल तक सिंधिया को गद्दार बताने वाले भाजपा के नेता उनके विधायको की दम पर सरकार बनाने की प्लानिंग कर चुके है।
ऐसे में कांग्रेस को समर्थन दे रहे निर्दलीय और कमलनाथ में आस्था जताने वाले सपा बसपा विधायको की हालत भी देखने लायक बनी हुई है। क्यों कि राज्यसभा चुनाव के बाद यह भी किसी काम के नही रहेंगे। "आया राम गया राम" की परंपरा पर यही कहना काफी है कि बुरा न मानो होली है.. जनता भोली भाली है. अटल राजेन्द्र जैन
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