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केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल की पहल पर बेलाताल में लाइटिंग और साउंड सिस्टम का सर्वे करने मुंबई से पहुंची टीम.. इधर बेलाताल रोड के बदतर हालात सुधारने प्रशासन की अनदेखी से बाहरी लोगों की नजर में बिगड़ रही है केंद्रीय मंत्री के शहर की छवि..

शहर की शर्मनाक बदतर तस्वीर पेश करती बेलाताल रोड
दमोह। शहर को कलेक्ट्रेट एसपी ऑफिस होते हुए जबलपुर रोड से जोड़ने वाले बेलाताल मार्ग के हालात बद से बदतर हो चुके हैं। गांव देहात की कीचड़ गड्ढों से भरी सड़क से भी दयनीय दशा में पहुंच चुकी बेलाताल की वीआईपी सड़क दमोह शहर की शर्मनाक तस्वीर पेश कर रही है। बेलाताल मार्ग के यह शर्मनाक बदतर हालात उस दशा में सभी को हैरत में डाल रहे है जब केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद पटेल की पहल पर बेलाताल के सौंदर्यीकरण के सर्वे हेतु मुंबई से विशेषज्ञों की टीम यहां आई हुई है।
 शहर की सबसे पुरानी वीआईपी रोड कही जाने वाली इस सड़क का उपयोग सुबह पैदल सर्किट हाउस तक घूमने जाने वालों से शुरू हो जाता है। सड़क के खराब हालत के चलते जटाशंकर मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं को भी बेलाताल के सामने के गिलाव गड्ढा भरे हालात से ही निकलना पड़ता है। केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल के स्थानिय आवास तक पहुंचने के लिए भी लोग इसी सड़क से होकर निकलते है। 
कलेक्ट्रेट और एसपी ऑफिस सहित अन्य कार्यालयों के लिए भी शहर से ही सड़क सीधे जोड़ती है। कलेक्टर, एसपी, न्यायधीश गणों सहित अन्य अधिकारियों को शहर में आने के लिए इसी मार्ग का उपयोग करना पड़ता है। इसके बाबजूद इस सड़क की दशा सुधारने के लिए वर्षों से कोई सार्थक प्रयास नहीं किए गए। यह आश्चर्य का विषय है। सड़क पर बारिश के दिनों में कीचड़ गंदगी गड्ढे भरे हालातों में वीआईपी लोगों की गाड़ियां भी ठुमके लगाकर निकलते हुई नजर आती हैं।
प्रदेश में भाजपा सरकार के 15 साल के कार्यकाल में बेलाताल के सामने सौंदर्यीकरण के नाम पर अनेकों बार लाखों रुपए की राशि खर्च की गई। पूर्व कलेक्टर स्वतंत्र कुमार सिंह के निर्देशन में फुटपाथ लाइटिंग और दीवारों पर पेंटिंग के कार्य पर लाखों खर्च कर दिए गए। लेकिन तब भी सड़क के चौड़ीकरण, पानी निकासी के इंतजाम आदि की और कोई ध्यान नहीं दिया गया। जिससे यह वीआईपी रोड बस स्टैंड की तरह सभी के लिए उपयोगी होने के बावजूद उपेक्षित स्थलों में शुमार बनी रही।
स्थानीय सांसद प्रहलाद पटेल के निवास के लिए शहर को जोड़ने वाले इस इकलौते मार्ग पर श्री पटेल के केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री बन जाने के बाद अब विदेशियों वीआईपी लोगों की आवक होने लगी है। लेकिन इस मार्ग से गुजरने के बाद लोगों के मन में केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल और दमोह शहर के बारे में क्या धारणा बनती होगी अंदाजा लगाया जा सकता है। 
आज ही मंदार नायक क्रिएटिव डायरेक्टर सागर गबली प्रदूषण फिल्म प्रोड्यूसर दमोह में संस्कृति के विकास की संभावना तलाशने के लिए बांदकपुर और सिंगौरगढ़  के बाद बेलाताल आए थे। इस दौरान सांसद कार्यालय से जुड़े लोगों ने उनको बेलाताल टापू मंदिर के दीदार भी कराए। केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल की पहल पर  बेलाताल के सौंदर्यीकरण के साथ लाइटिंग एंड साउंड सिस्टम का भी  डेवलपमेंट किया जाना है  जिसके लिए यहां देर तक सर्वे चलता रहा।
लेकिन सवाल यही उठता है मुंबई से आए फिल्म प्रोड्यूसर और उनकी टीम के लोग अपने मन में बेलाताल के सामने की सड़क को लेकर किस तरह की फीलिंग लेकर यहां से विदा हुए होंगे। जबलपुर छतरपुर स्टेट हाईवे 37 के शहर के अंदर से गुजरने वाले मार्ग का हिस्सा रही इस सड़क की दयनीय जैसा के संदर्भ में जब लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया गया तो उनका कहना था शहर के सभी मार्ग नगर पालिका को दे दिए गए हैं। अतः इनके रखरखाव की जिम्मेदारी अब पीडब्लूडी की नहीं है।

वही इस संदर्भ में नगर पालिका अधिकारी कपिल खरे का कहना था कि अधिकृत तौर पर लोक निर्माण विभाग द्वारा ऐसी कोई भी सड़क हस्तांतरित नहीं की गई है। इस के बाबजूद जन समस्या को ध्यान में रखकर नगरपालिका द्वारा बेलाताल रोड के गड्ढे भरवाने के लिए दो ट्राली गिट्टी और पांच ट्राली मुरम डलवाई जा चुकी है। लेकिन बारिश की वजह से बार-बार गड्ढों से गिट्टी और मुरम बाहर आ रही है। जिससे इस तरह के हालात निर्मित हो रहे हैं।
जबकि जानकारो का कहना है कि हर साल रखरखाव के नाम पर लाखों की राशि ऊपर के कागजो में खर्च करा दी जाती है। उपरोक्त हालात को लेकर कलेक्टर से लेकर अन्य अधिकारियों का ध्यान इस और नहीं जाना आम जनमानस को आश्चर्यचकित करता है। वही इस मार्ग से शहर से होकर जरारु धाम जाने वाले केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल ने भी बेलाताल मार्ग के बदतर हालात को अभी तक संज्ञान में क्यों नही लिया तथा संबंधितो को फटकार क्यों नहीं लगाई यह भी चर्चा का विषय है। अटल राजेन्द्र जैन

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