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हनी ट्रैप हसीनाओं की रिमांड अवधि बढ़ी.. कॉलेज की छात्राओं को भी बनाती थी मोहरा.. श्वेता ने मीडिया से इंसाफ की गुहार लगाई, कहां बड़ों को बचाया हम लोगो को फसाया जा रहा..

मीडिया से कहां बड़ों को बचाया हमे फसाया जा रहा-
इंदौर/भोपाल। बहुचर्चित हनीट्रैप मामले की एफ आई आर के दसवे दिन तक जांच अधिकारियों ने अधिकृत तौर पर कोई खुलासा नहीं किया है परंतु मीडिया रिपोर्ट के जरिए रोज नए-नए खुलासे सामने आ रहे हैं। ऐसे ही एक खुलासे में पता लगा है कि कालेज की छात्राओं का उपयोग भी इन हनीट्रैप हसीनाओं ने अपना उल्लू सीधा करने के लिए किया था। 27 सितंबर को आरती दयाल और मोनिका यादव की इस इस रिमांड अवधि खत्म होने पर दोनों को फिर से कोर्ट में पेश किया गया जहां से उन्हें 1 अक्टूबर तक की रिमांड बढ़ा दी गई है। इधर जेल में बंद दोनों श्वेता जैन और बरखा सोनी की जमानत याचिका को निरस्त करते हुए इनकी पुलिस रिमांड अवधि भी 30 सितंबर तक के लिए बढ़ा दी है।
इंदौर जेल से मेडिकल चेकअप के लिए लेडीस पुलिस दोनों श्वेता जैन और बरखा सोनी को लेकर इंदौर के एमवाय अस्पताल पहुंची थी। इस दौरान इनकी तस्वीरें ले रहे मीडिया कर्मियों से श्वेता जैन इंसाफ की गुहार लगाती नजर आई। मीडिया से इंसाफ दिलाने के लिए कुछ करनेे की गुहार लगाते हुए पत्रकारों के सवाल पर यह कहने से भी चूकि कि हम लोगो को फंसाया जा रहा है। और बड़े लोगों को बचाया जा रहा। लेकिन यह बड़े लोग कौन हैं नाम नहींं पता। 
यहां याद दिलाना आवश्यक है कि 2 दिन पूर्व ही भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और पूर्व मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने मीडिया से चर्चा के दौरान यहां तक कह चुके थे कि हनी ट्रैप मामले मैं तीन चार पत्रकारों के नाम की जानकारी उनके पास है। वहीं कुछ पत्रकारों की हनी ट्रैप मामले में मध्यस्था अर्थात दलाली किए जाने की बातें भी विजय वर्गी ने कही थी। ऐसे में अब श्वेता के द्वारा मीडिया कर्मियों से इंसाफ दिलाने में मदद करने की अपील का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। 
 उल्लेखनीय है कि इंदौर नगर निगम के इंजीनियर  हर भजन सिंह की शिकायत पर 17 सितंबर को इंदौर के पलासिया थाने में अपराध पंजीबद्ध होने के बाद पहले मोनिका और आरती की गिरफ्तारी हुई थी फिर 18 सितंबर की रात भोपाल से दोनों श्वेता जैन और बरखा सोनी की गिरफ्तारी के बाद इन तीनों को इंदौर लाया गया था। जहां पुलिस ने दूसरे दिन तीनो कोर्ट में पेश किया था जहां से जेल भेज दिया गया था वही बाद में इनकी जमानत याचिका को भी निरस्त कर दिया गया था। 
इस मामले की इंदौर से गिरफ्तार हुई मुख्य सरगना आरती दयाल और मोनिका यादव को लेकर पुलिस जांच दल भोपाल नरसिंहगढ़ छतरपुर सहित अन्य स्थानों की खाक छान चुका है परंतु इस दौरान क्या सबूत हासिल हुए इसका खुलासा नहीं हो सका है भोपाल स्थित आरती के फ्लैट पर पुलिस के पहुंचने के पहले हाल में सामान्य खरे मिलने की जानकारी जरूर सामने आई थी परंतु इस मामले में भी कोई अधिकृत बयान सामने नहीं आया है।
इधर हनी ट्रैप हसीनाओं के द्वारा अपने एनजीओ के काम बनाने  तथा अफसरों को खुश करने के लिए जॉब की जरूरत को लेकर भटक रही कॉलेज की छात्राओं का उपयोग करने की जानकारी भी एसआईटी की पूछताछ में सामने आई है। सूत्रों का कहना है कि श्वेता ने कबूल किया है कि करीब दो दर्जन छात्राओं को अफसरों की डिमांड पूरी करने के लिए इस्तामल किया गया। इस बात का भी खुलासा किया है कि हनी ट्रैप का मुख्य उद्देश्य सरकारी ठेके, एनजीओ को फंडिंग करवाना था। साथ ही वीआईपी लोगों को टारगेट करना था। कई बड़ी कंपनियों को श्वेता ने ठेके दिलवाने में मदद की। इस काम में उसकी साथी रही आरती दयाल ने भी अहम भूमिका निभाई। अब जबकि इस बहुचर्चित मामले में दोनों दलों के बड़े नेताओं के  नाम सामने आने के साथ  बड़े अफसरों पर भी  संदेह की उंगलियां उठ रही हैं वही इन हसीनाओं की गिरफ्तारी के 10 दिन पूरे हो चुके हैं। ऐसे में पुलिस पूरा खुलासा कब तक करती है इसका सभी को बेसब्री से इंतजार है। माना जा रहा है कि 1अक्टूबर को इन की रिमांड अवधि खत्म होने के साथ पूरे मामले का खुलासा एसआईटी के अधिकारी कर सकते हैं।

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