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सावधान.. जिला अस्पताल में भर्ती होने के पहले छत की सीलिंग जरूर देख ले या फिर बेड पर हेलमेट का उपयोग करे.. लाखों के मरम्मत कार्यों की उधड़ने लगी है परते..बर्न वार्ड की सिलिंग झढ़ने से तीन घायल..

अस्पताल में लाखों के कार्यों की उधड़ने लगी परते-
दमोह। जिला अस्पताल में यदि आप किसी बीमारी की वजह से इलाज कराने के बाद भर्ती होने जा रहे हैं तो सर उठा कर जरा अपने वार्ड की छत और सीलिंग जरूर चेक कर ले कहीं ऐसा ना हो जिस वार्ड में आप रात बिताने वाले हो उसकी सीलिंग पर चढ़ी घटिया निर्माण और भ्रष्टाचार की परत झड़ कर ऊपर गिरे और एक जख्म भरने के पहले के दूसरा जख्म आपको मिल जाए।
जिला अस्पताल के बर्न वार्ड की छत की सीलिंग का एक एक हिस्सा शनिवार सुबह अचानक भरभरा नीचे बेड पर भर्ती एक मरीज के ऊपर गिरा। जिससे उसकी नाक एवं आंख के ऊपर का हिस्सा जख्मी होने के साथ लहूलुहान हो गया सीलिंग के कुछ टुकड़े इस मरीज के साथ के दो अन्य लोगों के ऊपर भी गिरे। इनके हाथों में चोटे आने से यह भी जख्मी हो गए। जानकारी लगते ही अस्पताल प्रबंधन ने मामले को दबाने का प्रयास किया तथा घायलों को उपचार के बाद दूसरे वार्ड में शिफ्ट कर दिया इस दौरान एक घायल द्वारा हो हल्ला मचाने पर ड्यूटी गार्ड द्वारा उसके साथ मारपीट किए जाने की जानकारी सामने आई है। 
आपको बता दे कि दमोह जिला अस्पताल के काया कल्प और पुनर्निर्माण कार्य पर पूर्व मंत्री जयंत मलैया के 15 साल के कार्यकाल में करोड़ों की राशि खर्च होना किसी से छिपा नहीं है। लेकिन इस राशि के खर्च हो जाने के बाद भी यहां कराए गए पुनर्निर्माण कार्यों में कितनी गुणवत्ता और मजबूती आई इसका अंदाजा बारिश में जगह-जगह सीलिंग से रिसने वाले वाले पानी और झड़ने वाले मैटेरियल को देखकर लगाया जा सकता है।
बाहरी तौर पर चमकते दमकते नजर आने वाली अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग के फर्श तथा दीवारों में  टाइल्स लगाकर और सीलिंग पर पुट्टी करके भले ही चमकदार बना दिया गया हो। बाहरी हिस्से को "रंग रोगन" कर चमका दिया गया हो। लेकिन हकीकत में हालात "बूढ़ी घोड़ी लाल लगाम" की कहावत को चरितार्थ कर रहे है।

 लोक निर्माण विभाग के जरिए पूर्व में कराए गए मरम्मत, निर्माण, पुनर्निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर पूर्व में भी उंगलियां उठती रही है। लेकिन घटिया काम कराने वाले ठेकेदारों को "भूरा गैंग" का साथ और सपोट बने रहने से आपत्ति के बाद भी अधूरे घटिया कार्यों के पूरे पेमेंट होते रहे हैं। इधर अस्पताल के मेंटेनेंस कार्य पर नजर रखने वाले अधिकारियों तथा कर्मचारियों को भरपूर कमीशन मिलते रहने का यह नतीजा रहा है कि लाखो के खर्च के बाद भी प्लास्टर झड़ रहा है। टाइल्स टूट रहे है, उन की परतें खुलते देखी जा सकती हैं।
 आज भी सीलिंग के मसाले के झड़ कर नीचे गिरने और मरीज के घायल होने की घटना के बाद कलेक्टर के निर्देश पर लोक निर्माण विभाग के अधिकारी जिला अस्पताल पहुंचे। उन्होंने इस मामले में अस्पताल प्रबंधन से चर्चा की तथा मरम्मत कार्य हेतु नए सिरे से खर्चे होने वाली राशि का अनुमान तैयार किया। लेकिन सवाल यही उठता है कि आखिर कब तक इस तरह मरम्मत निर्माण कार्य पर लाखों की राशि का प्राक्कलन तैयार करके कमीशन खोर और ठेकेदारों को फायदा पहुंचाया जाता रहेगा।

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