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क्या अमित शाह के दौरे से सुधरेगी बुंदेल खंड में भाजपा की दशा.. खजुराहो में महंगा पड़ सकता है बाहरी प्रत्याशी का मुद्दा, कहीं भी नही दिख रहे पहले जैसे हालात..

खजुराहो में बीडी शर्मा की टिकट क्या गुल खिलाएगी..  .
छतरपुर। बुंदेलखंड में इस बार भाजपा के लिए जीत की राह पिछले लोकसभा चुनाव की तरह आसान नजर नहीं आ रही है। सागर संभाग की चारों सीटों पर प्रत्याशी चयन के साथ सुलगी असंतोष की आग को भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का दौरा कितना शांत कर पाएगा ?  इसके लिए श्री शाह के दौरे का राजनीतिक विश्लेषकों के साथ पार्टी के आधार स्तंभ कहे जाने वाले पुराने कार्यकर्ता भी इंतजार कर रहे हैं।
फिलहाल हम चर्चा कर रहे हैं खजुराहो लोकसभा क्षेत्र से  भाजपा उम्मीदवार बीडी शर्मा की।खजुराहो लोकसभा सीट से भले ही 17 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हो लेकिन मुकाबला हमेशा की तरह भाजपा कांग्रेस के बीच ही होने जा रहा है। समाजवादी पार्टी ने भले ही पूर्व दश्यु सम्राट ददुआ के बेटे को टिकिट देकर मुकाबले को रोचक बना दिया हो लेकिन फिलहाल तो चर्चा भाजपा के बाहरी प्रत्याशी की ही चल रही है। काॅग्रेस ने स्थानीय की हवा को भांपकर विधायक नातीराजा की पत्नि नगर परिषद अध्यक्ष काविता राजे को प्रत्याशी बनाया हैं।  वही भाजपा ने तमाम दावेदारों की अनदेखी करते हुए बीडी शर्मा को मुरैना से खजुराहो भेज स्थानीय दावेदारों की क्षमताओ पर सवालिया निशान लगा दिए। 
बीडी शर्मा की टिकिट घोषणा के बाद पूरी लोकसभा मेें विरोघ प्रदर्शन के साथ पुतला दहन का जा दौर चला वह चर्चा फिर से दोहराने की नहीं है। वहीं पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की समझाइश से विरोध प्रदर्शन की आग ऊपर से तो शांत हो गई है लेकिन जानकर इसे राख के नीचे दबे चिंगारी के ढेर जैसा बताने से भी नही चूक रहे है। 
 स्थानीय दावेदारों  उपेक्षा करके बीडी शर्मा को खजुराहो क्यों भेजा गया यह बात आज तक ना कार्यकर्ताओं के समझ में आई है और ना ही मतदाताओं के। भले ही पन्ना-कटनी के तीन बागी नेताओं के नाम वापस कराने में भाजपा के बड़े नेता सफल रहे हो लेकिन कटनी के पूर्व विधायक गिरिराज किशोर की दावेदारी ने यह साबित कर दिया है की पार्टी में कहीं ना कहीं प्रत्याशी को लेकर असंतोष की ज्वाला जल रही है। जिसे बुझाने के बजाय गिरिराज का चुनाव चिन्ह कूलर और भड़काने का काम करेगा। 
ऐसे में देखना होगा भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के छतरपुर दौरे से असंतोष की यह आग कितनी शांत होती है। भाजपा के हिसाब से वोटों के आंकड़े भले ही पुराने रिकार्ड के साथ कुछ भी कहते हो लेकिन भाजपा को विधानसभा चुनाव में सामने आए नतीजों को भी याद रखना चाहिए। छतरपुर से आशीष उपाध्याय की रिपोर्ट

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