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कमलनाथ सरकार के किसानों के कर्ज माफी के निर्णय से.. कमल वालों की बोलती बंद.. पूर्व वित्त मंत्री मलैया ने कहा था देखे कैसे करते है कर्ज माफ!

मप्र में किसानों का 2 लाख तक का कर्ज माफ-
भोपाल। मप्र के 18 वे मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेने वाले कांग्रेस नेता श्री कमलनाथ ने मुख्यमंत्री बनने के कुछ ही घंटों के अंदर किसानों के 2 लाख रुपए तक के कर्ज माफी की फाइल पर साइन करके कमल वालों की बोलती बंद कर दी है।
 दरअसल किसानों की कर्ज माफी की कांग्रेस की घोषणा के बाद सत्ता से बाहर हुई भाजपा के नेताओं के बीच इस बात को लेकर जमकर बेचैनी बनी हुई थी कि देखें अब कांग्रेस कैसे किसानों के कर्ज माफ करती है। इस मामले में मप्र के पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया तो चुनाव हारने के बाद अपनी आभार सभा में खुलकर कटाक्ष कर चुके थे कि देखें कैसे कर्ज माफ करते हैं। 

अब मुख्यमंत्री कमलनाथ द्वारा किसानों की कर्ज माफी को मंजूरी की खबर से कमल वालो के खेमे में जमकर खलबली मची हुई है। जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि राष्ट्रीय कृत और सहकारी बैंकों में 31 मार्च 2018 की स्थिति में पात्र पाए गए किसानों के अल्पकालीन ऋण के दो लाख रुपए तक की राशि को माफ किया जाता है। इस आदेश से प्रदेश के कितने किसानों का भला होगा तथा प्रदेश सरकार पर कितना बोझ आएगा यह अलग बात है लेकिन शपथ ग्रहण के साथ  मुख्य मंत्री कमलनाथ ने कर्ज माफी के वायदे को पूरा कर मौके पर चौका लगा दिया है।
शिवराज सरकार के सत्ता से बाहर होते ही सोशल मीडिया पर 10 दिन में किसानों के कर्ज माफी का वायदा पूरा करने को लेकर भड़काऊ पोस्ट डालकर दबाव बनाने वालों की भी अब बोलती बंद है। तथा इसके जवाब में भाजपा सरकार द्वारा किए गए वायदों के आज तक पूरे नहीं होने की भी याद अब उनको दिलाई जा रही है। 
कुल मिलाकर मुख्यमंत्री बनते ही श्री कमलनाथ ने जिस तरह से किसानों के कर्ज माफी के आदेश को जारी करने में तत्परता के साथ दरियादिली दिखाई है उससे कांग्रेसी तो खुश हैं ही, किसानों के चेहरे पर भी उम्मीद की किरण झलकती नजर आ रही है। इधर कर्ज माफी के इस निर्णय के बाद सोशल मीडिया पर टैक्स देने वाले व्यापारियों के नाम पर भड़काऊ पोस्ट डाले जाने का सिलसिला शुरू हो गया है। 
वहीं कमलनाथ के शपथ ग्रहण समारोह में जिस तरह से पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को कमलनाथ एवं ज्योतिरादित्य सिंधिया की बाहें धामें देखा गया गए। जिस पर यह आशंका भी जताई जाने लगी है कि सत्ता की साझेदारी में क्या "सग्गा मित्ति" का खेल जारी रहेगा ?  भ्रष्टाचार के मामले उजागर तो होंगे परंतु कार्रवाई के नाम पर "ढाक के तीन पात" जैसे  हालात ही देखने को मिलेंगे ! अटल राजेंद्र जैन की रिपोर्ट

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