क्रिटिकल केयर हेल्थ ब्लॉक हेंडओवर के बाद शुरू नहीं
दमोह। जिला
अस्पताल कैंपस के साइड में वन विभाग से अधिग्रहित भूमि में बन कर तैयार
नवनिर्मित सीसीएच ब्लाक
प्रकार कंप्लीट हो जाने के बाद भी इसे शुरू करने ध्यान नहीं दिया जा
रहा है जिससे बेहतर तथा आकस्मिक स्वास्थ्य सेवाओं के लाभ से जिले वासी
वंचित बने हुए है।
मध्य प्रदेश भवन विकास निगम द्वारा 12
करोड़ 70 लाख रुपए की लागत से 2 साल में इस बिल्डिंग का शानदार निर्माण
कराया गया। इसके प्रारंभ हो जाने पर जिला अस्पताल की बेड क्षमता में 50
बिस्तर की जहां बढ़ोतरी हो जाएगी वही आधुनिक सर्व सुविधा युक्त आईसीयू,
ओटी, बर्न यूनिट, एक्स-रे, यूएसजी आईपीएचएल जैसी सुविधाओं का लाभ भी मरीज
को मिलने लगेगा।
क्रिटिकल केयर हेल्थ ब्लॉक दमोह के
इस नए भवन का समस्त कार्य 2025 में कंप्लीट हो जाने के बाद इस बिल्डिंग को 24 अप्रैल 2026 को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के हैंडोवर किया जा चुका है। लेकिन 10 दिन बाद भी ऐसे प्रारंभ करने के लिए इनके द्वारा क्या पहल की गई है इसका फिलहाल पता नहीं लग सका है। निर्माण एजेंसी ग्लोब
इंजीनियरिंग एंड कंस्ट्रक्शन के ओनर शिवम ठाकुर का कहना है कि सीसीएचडी का संपूर्ण कार्य निर्धारित समय अनुसार दिसंबर 2025 में ही पूर्ण कर दिया गया
है तभी से यह भवन हैंडोवर हेतु तैयार था हाल ही में इसका हैंडोवर भी स्वास्थ्य विभाग को कर दिया गया है।
बता दें कि गंभीर मामलों में जिला अस्पताल मात्र रेफर केंद बनकर रह गया है। नवनिर्मित क्रिटिकल केयर यूनिट चालू हो जाने पर सागर
जबलपुर रेफर कर कर दिए जाने वाले गंभीर मरीजों को यहां पर उपचार रूपी राहत मिलने लगेगी।
उपरोक्त
हालत सामने आने के बाद स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर लगातार जागरूकता दिखाने
वाले नवागत कलेक्टर प्रताप नारायण यादव से जन
अपेक्षा है कि वह जल्द से जल्द क्रिटिकल केयर हेल्थ ब्लॉक को प्रारंभ करााने के लिए आवश्यक पहल करें। साथ ही इसके लिए आवश्यक चिकित्सा
उपकरण सामग्री एवं स्टाफ की उपलब्धता भी सुनिश्चित करने हेतु पहल की जाए।
जिससे जल्द से जल्द जिले वासियों को इस बेहतर स्वास्थ्य सुविधा युक्त भवन
की उपयोगिता कारगर साबित हो सके।
कलेक्टर नें जिला अस्पताल के 300 से 500 बिस्तरीय उन्नयन का प्रस्ताव शासन को भेजा.. दमोह जिले में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं को ध्यान में रखते हुए जिला कलेक्टर प्रताप नारायण यादव ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। उन्होने बताया जिला चिकित्सालय दमोह को 300 बिस्तर से बढ़ाकर 500 बिस्तरीय अस्पताल में उन्नयन करने हेतु शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। उन्होने बताया मुख्य सचिव मध्यप्रदेश शासन और अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य विभाग को अवगत कराया गया कि उनके निर्देश पर प्रस्ताव भेज दिया गया है।ज्ञात हो कि कलेक्टर श्री यादव द्वारा जिला चिकित्सालय का निरीक्षण कर स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी स्थिति का अवलोकन किया गया। निरीक्षण के दौरान सिविल सर्जन सह मुख्य अस्पताल अधीक्षक जिला चिकित्सालय दमोह द्वारा अवगत कराया गया कि वर्तमान में संचालित 300 बिस्तरीय अस्पताल में प्रतिदिन 350 से 400 मरीज भर्ती रहते है। इसके अतिरिक्त प्रतिमाह औसतन 600 से 700 प्रसव एवं प्रतिदिन लगभग 700 से 800 ओपीडी मरीजों का उपचार किया जा रहा है। मरीजों की बढ़ती संख्या के कारण अस्पताल में बिस्तरों एवं मानव संसाधन की कमी महसूस की जा रही है। जिससे स्वास्थ्य सेवाओं पर दबाब बढ़ रहा है।
जिला चिकित्सालय परिसर में 50 बिस्तरीय क्रिटिकल केयर ब्लॉक का निर्माण कार्य प्रगतिरत है। साथ ही जिले में नवीन मेडिकल कॉलेज का निर्माण भी अंतिम चरण में है जिसके प्रारंभ होने पर प्रारंभिक तौर पर जिला चिकित्सालय से ही इसकी संबंद्वता रहेगी। इस स्थिति में अस्पताल में अतिरिक्त भवन एवं मानव संसाधन की आवश्यकता और अधिक बढ़ जायेगी। उक्त वस्तुस्थिति को दृष्टिगत रखते हुए कलेक्टर श्री यादव द्वारा शासन से अनुरोध किया गया है कि जिला चिकित्सालय दमोह को 300 से 500 बिस्तरीय अस्पताल में उन्नयन की स्वीकृति प्रदान की जाये तथा आवश्यकतानुसार अतिरिक्त मानव संसाधन की पदस्थापना भी सुनिश्चित की जाये। जिससे जिले वासियों को बेहतर एवं सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा सके।




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