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अक्षय तृतीया महापर्व पर 48 मण्डलीय श्री भक्तामर विधान.. जैन दर्शन सदैव जोड़ने का कार्य करता है–मुनि श्री पद्म सागर जी.. कुण्डलपुर में आचार्य विद्या सागर निलय का शिलान्यास..

 अक्षय तृतीया पर 48 मण्डलीय श्री भक्तामर विधान

दमोह । अक्षय तृतीया महापर्व के शुभ अवसर पर श्री पार्श्वनाथ दिगंबर जैन नन्हे मंदिर जी में जैन मिलन नगर प्रमुख शाखा दमोह द्वारा भव्य एवं दिव्य अड़तालीस मण्डलीय श्री भक्तामर विधान एवं संगीतमय अर्चना का आयोजन अत्यंत श्रद्धा, भक्ति एवं उल्लास के साथ सम्पन्न हुआ। यह आयोजन आचार्य भगवंत श्री 108 विद्यासागर जी महामुनिराज एवं आचार्य श्री 108 समय सागर जी महाराज के पावन आशीर्वाद तथा पूज्य मुनि श्री 108 पद्म सागर जी महाराज, पूज्य क्षुल्लक श्री तात्पर्य सागर जी महाराज एवं पूज्य आर्यिका श्री वीर नंदनी माता जी ससंघ के सानिध्य में सम्पन्न हुआ, जिससे संपूर्ण वातावरण धर्ममय एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से ओतप्रोत हो उठा।
विधान का कुशल संचालन प्रतिष्ठाचार्य डॉ. आशीष जैन द्वारा किया गया। बाल ब्र. मोनू भैया एवं विद्वानों के मार्गदर्शन में 48 मंडलों में बैठे श्रद्धालुओं ने भक्तिभावपूर्वक विधान संपन्न किया, जिससे मंदिर परिसर मंत्रोच्चार एवं भक्ति से गुंजायमान रहा। इस अवसर पर पूज्य मुनि श्री पद्म सागर जी महाराज ने अपनी विस्तृत एवं प्रेरणादायी देशना में कहा कि “कर्मों के सामने किसी की नहीं चलती, इसलिए मनुष्य को सदैव शुभ कर्मों का संचय करना चाहिए।” उन्होंने कहा कि जीवन में सुख-दुःख हमारे अपने कर्मों का परिणाम हैं, अतः प्रत्येक व्यक्ति को धर्म, संयम, दान और तप के मार्ग को अपनाकर अपने जीवन को श्रेष्ठ बनाना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि जैन दर्शन सदैव जोड़ने का कार्य करता है, कभी भी तोड़ने का नहीं। यह दर्शन अहिंसा, करुणा, समता और आत्मकल्याण का संदेश देता है, जो समाज में एकता और सद्भाव स्थापित करता है। मुनि श्री ने अक्षय तृतीया के महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि जैन धर्म में यह पर्व अत्यंत पुण्यदायी एवं ऐतिहासिक है। प्रथम तीर्थंकर भगवान ऋषभदेव (आदिनाथ) ने एक वर्ष के कठोर उपवास के पश्चात वैशाख शुक्ल तृतीया के दिन हस्तिनापुर में राजा श्रेयांस द्वारा नवधा भक्ति पूर्वक इक्षु रस से पारणा की थी। यह घटना भारतीय संस्कृति में प्रथम आहार दान के रूप में मानी जाती है।
उन्होंने बताया कि इस दिन किया गया दान अक्षय फल प्रदान करता है और इसीलिए इसे “अक्षय तृतीया” कहा जाता है। इस दिन बिना मुहूर्त के भी सभी शुभ कार्य, दान, तप एवं दीक्षा अत्यंत फलदायी माने जाते हैं। प्रवचन के पश्चात मुनि संघ की आहार चर्या सुशील जैन के चौके में संपन्न हुई एवं अन्य धार्मिक क्रियाएं विधिपूर्वक सम्पन्न हुईं। तत्पश्चात जैन मिलन नगर प्रमुख शाखा दमोह द्वारा भगवान आदिनाथ के प्रथम आहार की मंगल स्मृति में श्रद्धालुओं के बीच इक्षु रस (गन्ना रस) का वितरण किया गया। साथ ही सभी पुण्यार्जकों को “अक्षय कलश” भेंट कर सम्मानित किया गया, जिससे श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह एवं आध्यात्मिक आनंद का वातावरण बना।
इस भव्य आयोजन में श्री दिगम्बर जैन पंचायत दमोह के अध्यक्ष सुधीर सिंघई, कुंडलपुर क्षेत्र कमेटी के पूर्व अध्यक्ष श्री संतोष सिंघई, जैन मिलन नगर प्रमुख शाखा के आयोजन प्रभारी वीर अवध जैन, वीर संतोष अविनाशी, वीर संजय सराफ, क्षेत्रीय वरिष्ठ उपाध्यक्ष अतिवीर दिलेश चौधरी, अध्यक्ष वीर मुकेश जैन “मम्मा”, मंत्री वीर महेन्द्र जैन सोमखेड़ा, प्रचार मंत्री वीर सुनील वेजिटेरियन, कोषाध्यक्ष वीर जिनेन्द्र मंडला, मंदिर कमेटी अध्यक्ष नवीन निराला, पत्रकार अटल राजेंद्र जैन, रानू जैन, वीर महेन्द्र करुणा, वीर सुभाष बमोरया वीर सावन सिल्वर, आनंद जैन (B SNL)
संजीव जैन शाकाहारी, मनीष जैन (WITS), अरुण जैन (कोर्ट), राजकुमार जैन (तारण), अरुण जैन प्रधान, सुवोध बजाज, शैलेन्द्र जैन सिंघई, अशोक जैन एवं नेम कुमार सराफ सहित अनेक गणमान्यजन एवं धर्मप्रेमी बंधुओं की सक्रिय सहभागिता रही। यह आयोजन जैन मिलन नगर प्रमुख शाखा दमोह की उत्कृष्ट संगठन क्षमता, धार्मिक निष्ठा एवं समाज में आध्यात्मिक चेतना, एकता और सद्भाव फैलाने के उनके सतत प्रयासों का सशक्त उदाहरण रहा।
कुण्डलपुर में आचार्य विद्यासागर निलय का भूमिपूजन
दमोह। सुप्रसिद्ध सिद्धक्षेत्र जैनतीर्थ कुण्डलपुर की पावन धरा पर विश्व वंदनीय, युगश्रेष्ठ, संत शिरोमणि आचार्य श्री विद्या सागर जी एवं विद्या शिरोमणि आचार्य श्री समयसागर जी के मंगल आशीर्वाद से कटनी वाली पुरानी धर्मशाला की जगह पर नवीन उदासीन आश्रम, साध्विका आश्रम एवं आहार चर्या हेतु धर्मशाला के निर्माण हेतु अक्षयतृतीया पर्व पर भूमि पूजन एवं शिलान्यास कार्यक्रम बा.ब्र. प्रतिष्ठाचार्य वाणीभूषण विनय भैया बंडा के मंगल सानिध्य एवं निर्देशन में मानस्तंभ परिसर में संपन्न हुआ। 
इस अवसर पर श्रेष्ठी कविश जैन सपरिवार दिल्ली द्वारा प्रथम आधारशिला स्थापित कर अन्य क्रियाएं की गई। इस भव्य प्रासाद का नामकरण विद्यानिधि आचार्य श्री समयसागर जी के आशीर्वाद से आचार्य विद्यासागर निलय किया गया है। इस अवसर पर कुण्डलपुर क्षेत्र कमेटी अध्यक्ष चंद्रकुमार सराफ, अजित कण्डया, रतनचंद जैन, रमेश गोयल, ललित सराफ, नेमकुमार सराफ, अजय निरमा, यूसी जैन, जय कुमार जलज,के सी जैन, राजेंद्र भेड़ा, मुकेश ठेकेदार, अमित त्यागी, अमर सेठ ,पुरुषोत्तम जैन, पवन चश्मा, आशीष गांगरा, विकल्प जैन एड., विपुल जैन एड, आशीष जैन, रिंकू घाट पिपरिया, सिद्धार्थ सराफ आदि की उपस्थिति रही। 
आज पूज्य बड़े बाबा का प्रथम अभिषेक, शांतिधारा, रिद्धि कलश आदि करने का सौभाग्य नंदकिशोर मैना विपुल जैन कोटा, प्रभावती सुकुमार श्रीचंद जैन मालेगांव सांगली, राजेंद्र माणिकचंद जैन हुबली, ऋतिक अंशुल तन्मय जोटवाड़ा, शांति देवी पवनलता अंकित बक्शी जयपुर, सीए सुमित विभु वैभव जैन झांसी, रतनलाल आनंद कुमार काला विजय नगर गुवाहाटी, ममता रितिका शिवम जैन गुना, उमंग राजेश कियान जैन जबलपुर सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु भक्तों ने अभिषेक का सौभाग्य प्राप्त किया । सांयकाल भक्तामर दीप अर्चना एवं पूज्य बड़े बाबा की संगीतमय महा आरती हुई।
 

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