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सम्राट विक्रमादित्य के जीवन-चरित्र को नाट्य माध्यम से जन-जन तक पहुँचाने का सराहनीय प्रयास- राज्यमंत्री श्री पटेल.. विक्रमोत्सव सृष्टि आरंभ दिवस पर कोटि सूर्योपासना का मंचन..

विक्रमोत्सव सृष्टि आरंभ दिवस पर सूर्योपासना मंचन

दमोह।  प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव द्वारा इस परंपरा की शुरुआत कर प्रदेश भर में सम्राट विक्रमादित्य के जीवन.चरित्र को नाट्य माध्यम से जन जन तक पहुँचाने का सराहनीय प्रयास किया। यह दिन प्रदेशवासियों के लिए सदैव स्मरणीय रहेगा। आज से हिंदू नववर्ष और विक्रम संवत की शुरुआत हुई है जिसे हम अपने सांस्कृतिक और पारंपरिक स्वरूप में उत्साह के साथ मनाते हैं इस आशय के विचार पशुपालन एवं डेयरी विभाग राज्यमंत्री ;स्वतंत्र प्रभारद्ध लखन पटेल ने प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस दमोह में आयोजित विक्रमोत्सव.2026 के कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किये। कार्यक्रम का प्रारंभ ध्वजारोहण कर दीप प्रज्ज्वलित कर पुस्तक विमोचन कर किया गया।

राज्यमंत्री श्री पटेल ने कहा सम्राट विक्रमादित्य ने अपने पराक्रम और नेतृत्व से विक्रम संवत की स्थापना की। आज हिंदू नववर्ष के रूप में मनाया जाता हैए सम्राट विक्रमादित्य का जीवन समाज के लिए प्रेरणादायक हैं और उनके आदर्शों को अपनाना हम सभी के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा विक्रमोत्सव के अंतर्गत आयोजित नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से लोग सम्राट विक्रमादित्य के जीवन संघर्ष और उपलब्धियों के बारे में जान सकेंगे। यह आयोजन न केवल मनोरंजन का माध्यम है बल्कि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक ज्ञान का भी सशक्त मंच है। इस अवसर पर सभी प्रदेशवासियों को नववर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ एवं बधाई दी।

विक्रम उत्सव 2083 हिंदू नव वर्ष के उपलक्ष्य में  रंगमंच के क्षेत्र में अग्रणी संस्था युवा नाट्य मंच द्वारा विक्रमोत्सव सृष्टि आरंभ दिवस पर नाटक कोटि सूर्योपासना का मंचन प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस दमोह ऑडोटोरियम में कलाकारों द्वारा किया गया। सर्वप्रथम नृत्य के माध्यम से ब्रम्ह ध्वज की स्थापना की गई जिसका पूजन उपस्थित अतिथियों द्वारा किया गया। कलाकारों ने नाटक कोटि सूर्योपासना का किया।

इस अवसर पर प्रस्तुत नाटक में दिखाया गया कि आधुनिक चकाचौंध में लोग नव वर्ष को हैप्पी न्यू ईयर के रूप में धूमधाम के साथ मनाते हैं परंतु सही अर्थों में वर्ष प्रतिपदा के दिन ही हिंदू नव वर्ष प्रारंभ होता है। दादा अपने पोते को यह कहानी सुनाते हैं और बताते हैं कि किस तरह से न्याय प्रिय विक्रमादित्य ने राज्य की रक्षा और आदर्शों के मूल्य की स्थापना के लिए नए प्रतिमान गढ़े थे। राजा विक्रमादित्य ने कम सेना होने के बाद भी आक्रांताओं से हार नहीं मानी और उन्हें अपनी सीमाओं से बाहर कर दिया और देश की सीमाओं के बाहर जाकर अपने साम्राज्य का विस्तार किया और देश की कीर्ति गाथा का परचम फहरा दिया। माता हरसिद्धि प्रसन्न होकर विक्रमादित्य को 32 पुतलियों वाला सिंहासन बत्तीसी प्रदान करती हैं जो उनकी सारी मनोकामनाओं को पूर्ण करता है। महाराजा विक्रमादित्य ने अपने दरबार में नवरत्नों को स्थान दिया जिनकी बुद्धिमता की वजह से सूर्य एवं चंद्रमा की गति पर आधारित विक्रम संवत की स्थापना हुई।
इस नाट्य प्रस्तुति के दौरान हमारे देश की और विक्रमादित्य के जीवन पर आधारित सिंहासन बत्तीसी और बेताल पच्चीसी जैसी कहानियां पढ़ने के लिए नई पीढ़ी को प्रेरित किया नाटक में सुंदर परिधानए आकर्षक साज सज्जाए सुंदर दृश्यों एवं आकर्षक नृत्य के माध्यम से दृश्यबंधों का निर्माण किया गया। मध्य प्रदेश नाट्य विद्यालय की इस आदर्श प्रस्तुति का निर्देशन संजय श्रीवास्तव लेखन प्रसन्न सोनी एवं संगीत अभिषेक त्रिपाठी ने किया। नाट्य दल का निर्देशन रंगकर्मी राजीव अयाची  ने किया। नाट्य प्रस्तुति में अनिल खरे संजय खरे देवेश श्रीवास्तव बृजेंद्र राठौर वैभव नायक हेमेन्द्र चंदेल हरि ओम खरे पंकज चतुर्वेदी अनुनय श्रीवास्तव अनुभव श्रीवास्तव राजेश श्रीवास्तव दीक्षा सेन शिवानी वाल्मीकि नयन खरे देवांश राजपूत वैष्णवी रैकवार श्रद्धा रैकवार गौरी रैकवार तनिष्का खरे सानिध्य खरे पारस गर्ग ने भिन्न.भिन्न भूमिकाओं का निर्वहन किया। इस अवसर विक्रम संवत पर केंद्रित पुस्तिका विमोचन  हुआ। 

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