सोयाबीन भावांतर योजना में 20.61 लाख की ठगी, आस्था ट्रेडिंग कम्पनी के प्रोपराइटर पर FIR
दमोह। कृषि उपज मंडी समिति दमोह में संचालित सोयाबीन भावांतर भुगतान योजना 2025 के तहत बड़े पैमाने पर अनियमितता का मामला सामने आया है। योजना के अंतर्गत हुए क्रय–विक्रय की जांच में फर्म आस्था ट्रेडिंग कम्पनी दमोह द्वारा 1319.86 क्विंटल सोयाबीन की कमी पाई गई, जिससे शासन को 20 लाख 61 हजार 752 रुपये की आर्थिक क्षति होने का आकलन किया गया है।
मामले को लेकर फरियादी घनश्याम मुड़ा (53), सचिव कृषि उपज मंडी समिति दमोह, निवासी दमयंती पुरम ने थाना दमोह देहात में लिखित आवेदन प्रस्तुत किया। आवेदन के आधार पर राजेन्द्र कुमार जैन पिता स्व. लाल चंद जैन, प्रोपराइटर फर्म आस्था ट्रेडिंग कम्पनी के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(4) के तहत अपराध पंजीबद्ध कर विवेचना में लिया गया है।
निगरानी समिति की जांच में खुलासा.. कलेक्टर कार्यालय (कृषि शाखा) दमोह के आदेश पर गठित जिला निगरानी समिति द्वारा जांच की गई। समिति की रिपोर्ट में सामने आया कि फर्म ने ई-अनुज्ञा पोर्टल पर 1788.36 क्विंटल सोयाबीन दर्शाया, जबकि भौतिक सत्यापन में मात्र 468.50 क्विंटल सोयाबीन पाया गया। इस प्रकार 1319.86 क्विंटल का अंतर प्रमाणित हुआ।
फर्म द्वारा कथित रूप से छिरोल्या वेयरहाउस में भंडारण बताया गया, लेकिन इसके समर्थन में कोई वैध अभिस्वीकृति प्रस्तुत नहीं की गई, जो कि म.प्र. कृषि उपज मंडी अधिनियम 1972 की धारा 19 का उल्लंघन है। भावांतर राशि व मंडी शुल्क की क्षति जांच में यह भी स्पष्ट हुआ कि सोयाबीन की पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) कर शासन की भावांतर भुगतान योजना को नुकसान पहुंचाया गया।
भावांतर योजना के तहत अनुमानित क्षति: ₹17,26,376
मंडी शुल्क क्षति: ₹2,79,480,
निराश्रित शुल्क क्षति: ₹55,896
कुल मिलाकर शासन को ₹20,61,752 की आर्थिक क्षति पहुंची है। लाइसेंस निलंबित, आपराधिक कार्रवाई कारण बताओ नोटिस का संतोषजनक जवाब न मिलने पर फर्म की थोक व्यापार अनुज्ञप्ति 30 दिसंबर 2025 को निलंबित कर दी गई थी। अब निगरानी समिति की रिपोर्ट के आधार पर आपराधिक प्रकरण दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जा रही है।

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