Ticker

6/recent/ticker-posts
2 / 3

सरपंच सर्टिफिकेट देने के बदले में रिश्वतखोरी.. लोकायुक्त ने प्रभारी तहसीलदार को एक लाख रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा.. 5 वोटों से जीते सरपंच से रिश्वतखोरी का खेल..!

 5 वोटों से जीते सरपंच से रिश्वतखोरी का खेल..!

ग्वालियर। मप्र में रिश्वतखोरी के दंश का असर अब पंचायत चुनाव पर भी देखने को मिल रहा है। शिवपुरी जिले में पंचायत चुनाव के बाद सरपंच निर्वाचन का प्रमाण पत्र देने के बदले में रिश्वतखोरी का मामला सामने आया है जिसकी शिकायत पर कार्रवाई करते हुए ग्वालियर लोकायुक्त की टीम ने एक नायब तहसीलदार को एक लाख रुपए की रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्वालियर लोकायुक्त की टीम ने 12 जुलाई मंगलवार को शिवपुरी जिले के खनियाधाना तहसील मैं पदस्थ नायब तहसीलदार को ट्रेप कार्यवाही करते हुए एक लाख रुपये की रिश्वत लेते हुए पकड़ा है। दरअसल ग्राम बरसोला तहसील खनियाधाना जिला शिवपुरी निवासी उमाशंकर लोधी ने ग्वालियर लोकायुक्त को शिकायत की थी कि वह ग्राम पंचायत के सरपंच पद पर चुनाव में विजयी हुआ है। लेकिन उसकी जीत का प्रमाण पत्र देने के बदले में सुधाकर तिवारी नायब तहसीलदार द्वारा डेढ़ लाख रुपए की मांग की जा रही है।

रिश्वतखोरी

शिकायत पर आवश्यक जांच पड़ताल करने के बाद मंगलवार को ग्वालियर लोकायुक्त की टीम ने एक लाख रुपये नगद लेते हुए  सुधाकर तिवारी नायब तहसीलदार प्रभारी तहसील खनियाधाना को उसके शासकीय आवास तहसीलदार का कोटा बस स्टैंड के पीछे खनिया धाना शिवपुरी से रिश्वत राशि एक लाख रूपये लेते हुए रंगे हाथों पकड़ने के बाद भ्रष्टाचार अधिनियम की धाराओं के तहत कारवाही की है।

घूस

इस कार्रवाई में लोकायुत टीम प्रभारी योगेश कुमार कुरचनिया, निरीक्षक राघवेंद्र सिंह तोमर, विवेचक कवेंद्र सिंह चौहान, इंस्पेक्टर आराधना डेविस एचपी धनंजय पांडेय, एचसी हेमंत शर्मा, सी अमर सिंह गिल, देवेंद्र पवैया, सुरेंद्र सिंह, बलवीर, विशंभर सिंह भदोरिया आदि शामिल रहे। बताया गया कि आवेदक को सरपंच के पद पर विजयी घोषित किया गया था जिसके प्रमाण पत्र के लिए आरोपी आवेदक से ₹1,50,000 की अवैध रिश्वत मांग रहा था जो आज दिनाक 12 जुलाई को आरोपी द्वारा 100000/- रूपये की रिश्वत राशि लेते हुए रंगे हाथो पकड़ा गया। लोकयुक्त टीम ग्वालियर की कार्यवाही जारी है।

जबकि इस पूरे मामले में उमाशंकर लोधी का कहना है कि वह 5 वोटों से चुनाव जीता था लेकिन प्रभारी तहसील दार का कहना था कि विरोधी पार्टी तुम्हारे पीछे पड़ी है ऐसे में तुमको जीत का प्रमाण पत्र चाहिए है तो ₹300000 लगेंगे।  बाद में डेढ़ लाख तक पर तहसीलदार क्या जाने और आखिर में ₹100000 में बात तय हो जाने पर उसने लोकायुक्त में शिकायत कर दी। जिसके बाद रिश्वतखोर नायब तहसीलदार के पकड़े जाने में देर नहीं लगी। लोकायुक्त की पूरी कार्रवाई के बाद मामले में और भी खुलासे की उम्मीद की जा रही है..

 

Post a Comment

0 Comments