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तत्वज्ञान से नकली धर्म गुरुओं की पोल खोलने वाले.. तत्वदर्शी संत रामपाल जी के अवतरण दिवस पर देश विदेश में फैले शिष्यों भक्तजनों के बीच उत्साह का माहौल.. परमेश्वर की अमर वाणी के पाठ का आयोजन तीन आश्रमों में जारी.. 71 वे गुरु पर्व पर हजारों भक्त करेंगे रक्तदान..

 संत रामपाल जी का अवतरण दिवस 8 सितम्बर 

 पूरे ब्रह्मांड के एकमात्र तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज का जो समूची मानव जाति के तारणहार है। नास्त्रेदमस जैसे महान भविष्यवक्ताओं द्वारा उनके अवतरण के बारे में की गई भविष्यवाणियां बिल्कुल सही साबित हो रही हैं। सतगुरु ने सभी धर्मों के ग्रंथों से गूढ़ रहस्यों को खोलकर तत्वज्ञान से नकली धर्मगुरुओं की पोल खोल दी है। 

सामाजिक सुधारों दहेज, भ्रष्टाचार, नशा, मांसाहार मुक्त भारत बनाने की दिशा में अग्रसर हैं। अवतरण दिवस के अनमोल अवसर पर 06 से 08 सितंबर 2021 तक परमेश्वर की अमर वाणी के पाठ का आयोजन तीन आश्रमों में किया गया है। रक्तदान सहित परमार्थ के कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अवतरण दिवस के लाइव कार्यक्रम का सीधा प्रसारण प्रातः 11 से 01 बजे तक साधना टीवी चैनल और यूट्यूब चैनल पर किया जाएगा साथ ही प्रातः 10 से 1 तक श्रद्धा चैनल पर भी प्रसारण होगा।

 अवतरण दिवस 2021 का विशेष आयोजन

08 सितंबर 2021, सतगुरु का 71वां गुरु पर्व (अवतरण दिवस) पूरे धूमधाम से मनाया जा रहा है। इस अवसर पर संत रामपाल जी महाराज के 06 से 08 सितंबर 2021 तक परमेश्वर की अमर वाणी का पाठ आयोजन कुरुक्षेत्र आश्रम, भिवानी आश्रम और रोहतक सिंहपुरा आश्रम में किया गया है। इस अवसर पर सभी आगंतुकों के लिए बूंदी प्रसाद बनाया जाएगा और सभी को वितरित किया जाएगा।  

अवतरण दिवस 2021 पर होंगे परमार्थ के कार्य

संत रामपाल जी के सानिध्य में सभी आयोजनों की कई विशेषताएं होती हैं। हर बार रक्तदान, बिना दहेज सामूहिक विवाह, विशाल भण्डारा, स्वच्छता अभियान, सत्संग, पुस्तकों का प्रदर्शन और वितरण इत्यादि अनेकों कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस बार देश कोरोना काल से गुजर रहा है और सरकार द्वारा कुछ प्रतिबंध लागू हैं। देश के कानून में विश्वास रखने वाले संत रामपाल जी और उनके शिष्यों ने कार्यक्रम के स्वरूप को सीमित रखने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। 

इस बार भक्तों को सीमित समय के लिए क्षेत्रानुसार अलग अलग समय में आने का तय किया गया है। संत जी के सांसारिक प्रशंसक भी बड़ी संख्या में आयोजनों में सम्मिलित होते हैं लेकिन वे भी इस बार नहीं आ पायेंगे। परमार्थ का सबसे बड़ा कार्यक्रम कोरोना प्रोटोकॉल के तहत इस बार भी विशाल तरीके से किया जाएगा। सतगुरु के शिष्य हमेशा ही समय समय पर विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन करते रहते है। इसी तरह अवतरण दिवस पर भी बड़ी संख्या में स्वेच्छा से हजारों लोग रक्तदान करेंगे।        

कोविड-19 नियमों का होगा कठोर पालन

कोविड प्रोटोकॉल और सभी नियमों का पालन करते हुए भक्तगण और समाज के लोग पाठ प्रकाश और अवतरण दिवस कार्यक्रमों में सम्मिलित होंगे। सरकार द्वारा जारी कोविड-19 की गाइड लाइन को ध्यान में रखते हुए, सभी भगत मास्क लगा कर आएंगे, दो गज की दूरी का पालन करेंगे, हाथों को बारबार सेनेटाइज़र से स्वच्छ करेंगे। यदि किसी भक्त को कोरोना है या उसे कोई अन्य लक्षण जैसे बुखार-खांसी है, तो ऐसे भक्त कार्यक्रमों में शामिल नहीं हो सकेंगे। 

8 सितंबर को साधना चैनल से सीधा प्रसारण


8 सितंबर अवतरण दिवस का लाइव कार्यक्रम प्रातः 11:00 से 01:00 बजे तक साधना टीवी पर प्रसारण किया जाएगा। साथ ही प्रातः 10:00 से 1:00 तक श्रद्धा चैनल पर भी प्रसारण होगा। जैसा कि सभी जानते है सतगुरु रामपाल जी के ज्ञान के प्रति बढ़ते आकर्षण और सामाजिक कुरीतियों को समूल नाश करने की प्रतिबद्धता के कारण और उनसे बढ़ती आशा के कारण लोग उनके प्रसारण को सदा की भांति इस बार भी बड़ी संख्या में देखेंगे। पाठकगणों से प्रार्थना है कि समय निकाल कर सीधे प्रसारण को देंखें और अपने कल्याण का मार्ग चुनने के लिए दृढ़ता पाएं। इस अवसर का लाभ वे भक्त भी उठायेंगे जो स्वयं आश्रम में नहीं जा पा रहे हैं।  

*यूट्यूब चैनल पर होगा का विशेष प्रसारण*

जो भक्त किसी भी कारण से आश्रम में कार्यक्रम में सम्मिलित नहीं हो सकते उनके लिए यूट्यूब चैनल पर विशेष व्यवस्था है, वे मोबाईल पर अथवा यूट्यूब चैनल पर सत्संग का सीधा प्रसारण देख सकते है। जो भक्तगण आश्रम में और टीवी में सत्संग नहीं देख सकते है वे इस माध्यम से लाभ उठा पाएंगे।     

भारत की पुण्यभूमि पर सदैव होता रहा है अवतरण

मानवता के पूर्ण विकास का कार्य आदि काल से भारत की पुण्यभूमि में होता रहा है। इसी पुण्यभूमि पर अवतारों का अवतरण आदि काल से होता आ रहा है। विडम्बना ही कही जाएगी कि दिव्य पुरुषों और अवतारों के जीवन काल में तत्कालीन शासन तंत्र और भोली जनता ने उनके दिव्य ज्ञान और आदर्शों को महत्व नहीं दिया, अपितु उनका विरोध व अपमान ही करते रहे। संतों के प्रति भोली जनता को भ्रमित करके ज्ञान प्रसार में बाधक बनकर ऐसे लोग पाप के भागीदार बने। प्रायः ऐसे महान संतों के पृथ्वी से प्रस्थान करने के बाद समाज उनकी पूजा में जुट जाता है लेकिन ऐसा करके उनके हस्त से कल्याण कराने के अवसर से लोग चूक जाते है। 

सतगुरु के प्रसन्न होने से ही परमात्मा प्रसन्न होते हैं

यदि सतगुरु अपने शिष्य से प्रसन्न हैं तो निश्चित ही पूर्ण परमात्मा सत्पुरुष भी प्रसन्न होंगे। जो शिष्य पूरी तरह से गुरु मर्यादा में रहकर सत भक्ति करते हैं उनका काल ज्योति निरंजन कुछ नहीं बिगाड़ सकता। तात्पर्य है कि ऐसे शिष्य को सतभक्ति करने से मिलने वाले सभी लाभ प्राप्त होते हैं।

*कबीर, गुरु दयाल तो पुरुष दयाल। जेहि गुरु व्रत छुए नहीं काल।*

*सत्यवक्ता को हर काल में दी गई यातनाएं*

कलयुग में ज्योति निरंजन के मिश्रित ज्ञान से प्रभावित संत जन पूर्ण परमात्मा कविर्देव (कबीर साहेब) के द्वारा दिए सत्य ज्ञान को समझना नहीं चाहते हैं। इसी कारण सतभक्ति देने वाले संतों को प्रताड़ित करते हैं। छः सौ वर्ष पूर्व कबीर साहेब को पानी में डुबोकर, हाथी से कुचलवाकर नाना प्रकार से यातनाएं दी गई। इसी प्रकार संत गरीबदास को भी कई बार सताया गया। वर्तमान में इस ब्रह्मांड के एकमात्र तत्वदर्शी संत रामपाल दास जी पर भी काल ब्रह्म के दूतों द्वारा लगातार प्रहार किया जा रहा है। यहाँ तक कि उन्हें दो बार जेल भेजकर मानसिक और शारीरिक वेदनाएं दी गईं। पाठक गण जानेंगे कि संतों को सताने का क्या परिणाम होता है।

*गुरुद्रोही की गति करोड़ों नरक से भी भयानक है*

यदि जीव ने दुर्लभ मनुष्य योनि में जन्म लेकर सतगुरु का महत्व नहीं जाना तो यह समझिए कि अनमोल जीवन को बर्बाद कर दिया। सतगुरु को त्याग देने वाले साधक को तो अनेक युगों तक अपने किये पर पछतावा करना पड़ता है। अपने कृत्यों से सतगुरु को दुख पहुंचाने वाला मनुष्य नरक में अग्नि कुंडों में उबल – उबल कर कष्ट पाता है। सतगुरु द्रोही जहरीले सर्पों की योनि में करोड़ों जन्म पाता है और अपने ही विष की गर्मी से लंबी आयु तक घोर कष्ट सहता है। इन जन्मों में दुख भोगकर ये गुरु द्रोही विष्टा (मल) में कीड़े का जन्म लेता है। इस प्रकार करोड़ों जन्म नरकीय जीवन भोगता है।

*कबीर, मानुष जन्म पाकर खोवै, सतगुरु विमुखा युग युग रोवै।*

*कबीर, गुरु विमुख जीव कतहु न बचै । अग्नि कुंड में जर – बर नाचै।*

*कोटि जन्म विषधर को पावै । विष ज्वाला सही जन्म गमावै।*

*बिष्ट मांही क्रमि जन्म धरई। कोटि जन्म नरक ही परही। *

*संत सताने की सजा प्रलय काल तक भूत पिशाच योनि में जन्म*

गुरुद्रोही की गति का वर्णन हमनें ऊपर जाना है लेकिन उनकी गति का क्या जो सतगुरु को मनुष्य मानकर उन्हें झूठे आरोपों के आधार पर गलत तरीकों से फँसाकर नाना प्रकार की वेदनाएं देते हैं।

सतगुरुदेव ने अपनी वाणी में संत को सताने के लिए दिए जाने वाले दंड के प्रावधान को बहुत खतरनाक बताया है जो सृष्टि प्रलय तक होने वाले अनंत जन्मों तक चलता रहता है। संत को सताने वाले को परमेश्वर भिन्न – भिन्न प्राणियों की योनियों में बारम्बार माँ के गर्भ में डालते हैं और वह जन्म लेते ही मृत्यु को प्राप्त हो जाता है। दंड-भोगी भूत पिशाच की योनि और माँ के गर्भ में असहनीय पीड़ा तब तक झेलता है जब तक सताया हुआ संत स्वयं उसे क्षमा नहीं कर दे।

*अर्धमुखी गर्भवास में हरदम बारम्बार,*

*जूनी भूत पिशाच की जब लग सृष्टि संहार।*

*संत गरीबदास जी को सताने के परिणाम स्वरूप परमात्मा द्वारा दंड मिलने का वृतांत*

परमात्मा कबीर साहेब के शिष्य संत गरीबदास साहेब जी के तत्वज्ञान के कारण अन्य गुरुओं आचार्यों के अधूरे ज्ञान की पोल खुलने लगी। एक बार सुनियोजित षड़यन्त्र के अंतर्गत स्वार्थी गुरूओं (आचार्यों) ने संत गरीबदास जी को घेर कर लूट लिया और गाँव के कानूनी अधिकार प्राप्त चौधरी छाजुराम जी से उन्हें छः महीने की काठ में बंद करने की सजा और पाँच सौ रूपये जुर्माना कर दिया। काठ में बंद करने में दोनों पैरों के घुटनों से ऊपर दो लकड़ी के मोटे डण्डे बांध कर दोनों हाथ पीछे बांध दिये जाते थे। कुछ विशेष व्यक्तियों के कहने पर आदरणीय गरीबदास जी को छोड़ दिया गया।

कुछ दिनों उपरान्त चौधरी छाजुराम के प्रातः काल शौच क्रिया के लिए जाने के समय दो घुड़सवार उनके दोनों हाथ काट कर अदृश्य हो गए। इस मार्मिक दृश्य के कई लोग साक्षी थे। बहुत उपचार के बाद भी ठीक न होने पर कुछ लोगों की राय से उन्होंने सन्त गरीबदास जी के पास जाकर उनके चरण पकड़कर क्षमा याचना की। संत गरीबदास जी ने उन्हें सपरिवार नाम उपदेश देकर आजीवन भक्ति करने का आदेश दिया। यह भी कहा कि यह आप के संचित कर्मों का परिणाम था। अब सतभक्ति करने से आगे कष्ट कट जाएंगे।

*संत गरीबदास जी की वाणीयों से प्रमाण*

परमेश्वर ने कहा है कि जो मेरे संत को दुखी करता है समझो मुझे दुखी करता है। जब मेरे भक्त प्रह्लाद को दुखी किया तब मैंने हिरण्यकशिपु का पेट फाड़ दिया, मैंने ही कंस को मारा। जो मेरे साधु को दुखी करेगा मै उसका वंश मिटा दूंगा। इसलिए संत को सताने के करोड़ों पाप लगते हैं जैसे अनगिनत हत्याएं कर दी हों। अनजान लोग परमात्मा के संविधान से परिचित नहीं है इसलिए भयंकर भूल करते हैं और असंख्य दंडों के भागी बनते हैं।

*तुमने उस दरगाह का महल ना देख्या।*

*धर्मराय के तिल-2 का लेख ।।*

*राम कहै मेरे साध को, दुःख ना दीजो कोए।*

*साध दुखाय मैं दुःखी, मेरा आपा भी दुःखी होय।।*

*हिरण्यकशिपु उदर (पेट) विदारिया, मैं ही मारया कंश।*

*जो मेरे साधु को सतावै, वाका खो-दूं वंश।।*

*साध सतावन कोटि पाप है, अनगिन हत्या अपराधं।

*दुर्वासा की कल्प काल से, प्रलय हो गए यादव।।*

*सम्पूर्ण ब्रह्मांड के एकमात्र तत्वदर्शी संत रामपाल जी से लें सतज्ञान*

कलियुग में स्वर्ण युग प्रारम्भ हो चुका है। विश्व के सभी महाद्वीपों में करोड़ों पुण्य आत्मांए तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के सतज्ञान को समझकर उनके सानिध्य में सतभक्ति कर सर्व विकार त्यागकर निर्मल जीवन जी रहे हैं। आप भी शीघ्र अतिशीघ्र सतगुरु की शरण में आयें और उनके अद्भुत ज्ञान को पहचानकर और नाम दीक्षा लेकर अपने परिवार सहित अपना कल्याण करवाएं।  तत्वदर्शी संत रामपाल जी महाराज के अवतरण दिवस 8 सितंबर 1951 के अवसर पर विशेष प्रसारण साधना चैनल पर प्रातः 11:00 से 01:00 बजे सुनें। जितना जल्दी हो सके सतज्ञान ग्रहण करें और आत्म कल्याण करा अपना दुर्लभ मनुष्य जन्म को चरितार्थ करें।

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