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बेईमानी बेमिसाल.. स्वास्थ्य विभाग में बरसों से फर्जी दस्तावेजों पर नौकरी कर रहा सुपरवाइजर.. शिकायत के बाद जांच में फर्जीवाड़ा उजागर हुआ.. फिर भी कार्रवाई करने के बजाए जांच रिपोर्ट पर पर्दा डालकर जिम्मेदारी से बच रहे अधिकारी..

फर्जी दस्तावेजों पर कर रहा बीसों साल से नौकरी

दमोह। चोर चोर मौसेरे भाई की कहावत तो आपने सुनी ही होगी लेकिन फर्जीवाड़े करने वाले किस तरह से सगे भाई की तरह एक दूसरे को बचाते रहे इसके उदाहरण अक्सर सरकारी विभागों में गड़बड़ घोटाले उजागर होने के दौरान सामने आते हैं ऐसा ही एक मामला स्वास्थ्य विभाग में सामने आया है यहां फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी कर रहे सुपरवाइजर की शिकायत और जांच के बाद सच्चाई उजागर होते देर नहीं लगी विभाग के अधिकारी कार्रवाई करने के बजाए चुप्पी साधे नजर आ रहे हैं।


 मामला पथरिया उपस्वास्थ केंद्र के बाँसाकला में पदस्थ सुपरवाइजर नन्हेभाई से जुड़ा हुआ है। पथरिया में वर्तमान में सुपरवाइजर के तौर पर सेवाएं दे रहे नन्हे भाई ने 1990 में स्वास्थ्य विभाग में नौकरी आरम्भ की वो भी मेट्रिक की फर्जी मार्कशीट के सहारे। मामले में शिकायत के बाद 2019 में दस्तावेजो का सत्यापन भी हो गया। जिसमें फर्जी मार्कशीट में जिसे छिपाया गया था उसमें कर्मी फेल निकला और फर्जी मार्क्शीट में कर्मी पास दिखाया गया है। इसको लेकर पत्राचार कर स्वास्थ्य विभाग ने पूरी जानकारी तो इकठ्ठी कर ली लेकिन कर्मचारी के विरुद्ध कोई कार्यवाही नहीं की फि। जिससे कर्मचारी आज भी सुपरवाइजर के पद पर वेतन लेकर नौकरी कर रहा है। जबकि मामला सीधे तौर पर धोखाधड़ी और चार सौ बीसी का है।

 इस मामले में शिकायतकर्ता का नाम भी नन्हे भाई है और धोखाधड़ी करने वाले शख्स का नाम भी नन्हे भाई है। ऐसे में जो इनको बचा रहा है वह इनका बड़ा भाई जैसा ही कहा जा सकता है। स विषय मे शिकायकर्ता नन्हे भाई  का कहना है के वह 2017 से शिकायत के बाद लगातार स्वास्थ्य विभाग के चक्कर काट रहा है लेकिन सब जानकारी विभाग को होने के बाद भी विभाग कार्यवाही से बच रहा है।

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