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पौधारोपण के नाम पर हर साल करोड़ों खर्च फिर भी "आगे पाट पीछे सपाट" जैसे हालात ! 20 झाडियों के उखडने पर 1.19 लाख खर्च.. जांच में खाद-मिट्टी की खरीदी में जमकर भ्रष्टाचार उजागर ! पीसीसीएफ और एक रेंजर की बातचीत के वायरल ऑडियो के पीछे कौन..

खाद-मिट्टी की खरीदी में भारी पैमाने पर भ्रष्टाचार..
भोपाल/सागर/ दमोह। शासन की विभिन्न योजनाओं के तहत वन विभाग द्वारा हर साल करोड़ो अरबों रूपए की राशि पौधारोपण से लेकर पौध संरक्षण पर खर्च की जाती है परंतु "हरयाली से खुशहाली" का सपना "पतझड सावन बसंत बहार"  गीत की तरह हर साल रिपीट होता रहता है। भले ही रिकार्डो में शासन द्वारा भेजे गए एक एक रूपए के खर्च से लेकर उपयोग के रिकार्ड व फोटोग्रा्फ्स वीडियोें सहेज कर पौधरोपण की सफलता की कहानी दर्ज की जाती हो परंतु धरातल में अधिकांश जगह ढाक के तीन पात जैसे हालात ही है। 
"आगे पाठ पीछे सपाट" की कहावत को चरितार्थ करती वन विभाग की पौधरोपण की दास्तान अनेक जगहों पर "बागड़ के खेत खा जाने" जैसे हालात को भी उजागर करती है। हालांकि वक्त बेवक्त घपले घोटालों के चर्चे खबरों की सुर्खिया भी बनते रहते है लेकिन लेकिन उपर से नीचे तक शेयरिंग के चलते जांच के नाम पर सब कुछ ठंडे बस्ते में चला जाता है। भोपाल से पिछले दिनों दमोह पहुचे पीसीसीएफ के एक रेंजर से बातचीत का वायरल हो रहा ऑडियो भी पहले से चले आ रहे शेयरिंग की सीक्रेट को उजागर कर रहा है। इस आडियों में दमोह में पदस्थ एक रेंजर से पीसीसीएफ आकर मिलने का कह रहे हैं और रेंजर कह रहा है कि आपकी सेवा कर देंगे। हालांकि पीसीसीएफ इसे सामान्य बातचीत मानते लेनदेन जैसी किसी बात से इंकार कर चुके हैं। लेकिन यह आडियों दमोह सहित अन्य स्थानों पर "हालात ए पौधारोपण" की ओर इशारा करने के लिए काफी है। 
 इधर इस आडियों के वायरल होने के पीछे जो बजह सामने आई है वह और भी अधिक चैकाने वाली है। सूत्रों का कहना है कि पौधारोपण मुहिम के जरिए होने वाले वारे न्यारे को लेकर दमोह व सागर में कराई गई जांच में कई चैकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। इन दोनों ही जगहों पर कैंपा योजना से प्रस्तावित पौधारोपरण के नाम पर खाद और मिट्टी की खरीदी में भारी पैमाने पर भ्रष्टाचार सामने आया है। उत्तर सागर वनमंडल द्वारा पौधा रोपण के लिए 4.74 करोड़ रुपये की खाद-मिट्टी की खरीदी गई, जो जांच में सिर्फ चंद गड्ढों में ही डली पाई गई। ऐसी ही गड़बड़ी दमोह वनमंडल में भी सामने आई है। यहां पर लेंटाना उन्मूलन के नाम पर अफसर एवं कर्मचारियों ने 20 झाडियां उखाड़ी और 1.19 लाख रुपय के बिल लगा दिए। 
औचक निरीक्षण में इस गड़बड़झाले का खुलासा होने के बाद इसकी रिपोर्ट प्रधान मुख्य वनसंरक्षण (कैंपा) आनंद बिहारी गुप्ता द्वारा वन बल प्रमुख को दे दी गई है। अब इस मामले की जांच के लिए दो अफसरों की कमेटी गठित कर जांच कराई जा रही है। 
दरअसल पिछले माह पीसीसीएफ कैंपा एबी गुप्ता जब पौधारोपरण की तैयारी का जायजा लेने उत्तर सागर वनमंडल पहुंचे तो वहां 13 स्थलों पर पौधारोपण की तैयारी की जा रही थी। इस दौरान उनके द्वारा 75 फीसद क्षेत्र का निरीक्षण किया गया, तो सामने आया कि अफसरों ने गोबर खाद और मिट्टी खरीदी के नाम पर करोड़ों की गड़बड़ी की गई है। खास बात यह है कि इस खरीदी के लिए वनमंडल में टेंडर तक नहीं बुलाए गए। बगैर टेंडर के ही अफसरों ने 313 लाख रुपए की मिट्टी और 161 लाख रुपए की गोबर खाद खरीद डाली। यही नहीं खाद और मिट्टी भी सिर्फ चंद गड्ढों में ही मिली। इस दौरान गड्ढों की गहराई 60 की बजाय 25-30 सेंटीमीटर ही पाइ्र गई। इस गडबड़ी के लिए अफसरों और कर्मचारियों ने मिलकर ऐसी जगह का चयन किया जहां कभी लेंटाना रहा ही नहीं। ऐसे ही कुछ हालात दमोह में भी बताए जा रहे है।
 20 झाडियों को उखडने का खर्च 1.19 लाख.. श्री गुप्ता द्वारा जिले के दमोह, तेजगढ़, तेंदूखेड़ा, तारादेही और सागौनी के 13 क्षेत्रों का के निरीक्षण के दौरान 22 हेक्टेयर में लेंटाना उन्मूलन करना बताया गया है। इन सभी में 1.19 लाख रुपए की बराबर राशि खर्च करना बताया गया। इस दौरान पाया गया कि कक्ष क्रमांक पीएफ 183 में 30-35 झाडियों में से 20 झाडियां उखाडकर 1.19 लाख रुपए का बिल भुगतान के लिए लगा दिया गया। इसी तरह से तारादेही क्षेत्र में अफसरों ने 1.15 लाख रुपए से लेंटाना की झाडियां उखाडने का उल्लेख किया है , लेकिन मौके पर इसका कोई भी साक्ष्य ही नहीं मिला। पिक्चर अभी बाकी है.. अटलराजेंद्र जैन

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