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लॉक डाउन में निदान वॉटरफॉल बेरियल के पास.. भैसा घाट के डिप्टी रेंजर की बोलेरो पलटी.. इधर वन्य जीवो पर खाने पीने के संकट के दौर में.. बगदरी के जंगल मे नेहरू ठेकेदार ने कराया सैकड़ो बन्दरो को सब्जी का ब्रेकफास्ट..

निदान फॉल बेरियल के पास तेज रफ्तार बोलेरो पलटी
दमोह। जिला मुख्यालय से करीब 60 किलोमीटर दूर सिग्रामपुर सेलवाड़ा मार्ग पर निदान कुंड वाटरफॉल बेरियल के पास तेज रफ्तार बोलेरो गाड़ी अनियंत्रित होकर सड़क से उतरकर पेड़ों से टकराने के बाद पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई हादसे में गाड़ी चालक गंभीर रूप से घायल होने के बाद मौके से फरार हो गया वही यह गाड़ी भैंसा घाट के डिप्टी रेंजर की बताई जा रही है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार जबेरा थाना के  सिंग्रामपुर चौकी के भैसा रेस्ट हाउस और निदान वॉटर फॉल के बीच में रविवार शाम करीब 6 बजे तेज रफ्तार सफेद कलर की बोलेरो गाड़ी पेड़ों से टकराकर पलट का दुर्घटनाग्रस्त हो गई। हादसे की जानकारी वहां से निकल रहे स्वास्थ्य कर्मी  टीम द्वारा हंड्रेड डायल पुलिस को दी गई। जिसके बाद मौके पर हंड्रेड डायल टीम कर्मचारी राज कुमार रोहित को गाड़ी की बैक लाइट चालू मिलने के बावजूद मौके पर कोई नहीं मिला। जबकि घटनास्थल के हालात देखकर लग रहा था कि इसमें सवार लोगों को गंभीर चोटें आई होंगी।
 भैंसा से सिग्रामपुर की ओर आ रही सफेद कलर की बोलेरो गाड़ी क्रमांक MP 20 टीए 2084 सिग्रामपुर के हीरालाल रैकवार की बताई जा रही है जो भैंसा बीट में पदस्थ डिप्टी रेंजर के पास अटैच थी। फिलहाल दुर्घटना में घायलों का पता नहीं लग सका है डिप्टी रेंजर का कहना है ड्राईवर अकेले गाड़ी लेकर सिग्रामपुर आ रहा था। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि जंगल में तेज रफ्तार कार बोलेरो अनियंत्रित होने के बाद दुर्घटनाग्रस्त हुई होगी।
लेकिन सवाल यही उठता है कि लॉक डाउन के दौरान सुनसान जंगल में आखिरकार घायल ड्राइवर को ऐसा कौन सा साधन मिल गया होगा जो वह मौके से भागने में सफल हो गया। फिलहाल सिग्रामपुर चौकी पुलिस मामले की जांच कर रही है। वहीं दुर्घटना स्थल के हालात संदिग्ध नजर आने के साथ किसी षड्यंत्र का अंदेशा जताते हुए नजर आ रहे हैं। निवेश जैन की रिपोर्ट
 गर्मी और लाक डाउन में बन्दरो पर भूख प्यास का संकट
दमोह। जिले के जंगली वन क्षेत्रों में भीषण गर्मी और तेज धूप के साथ जहां पतझड़ जैसे हालात निर्मित हो गए हैं वही जंगल में रहने वाले वन्यजीवों के लिए खाने पीने का संकट खड़ा हो गया है। आम दिनों में खाने पानी की तलाश में सड़क किनारे आ जाने वाले बंदर आदि जीवो के लिए लाक डाउन में वाहनों की आवाजाही बंद रहने से अब भोजन पानी का और भी गंभीर संकट हो गया है। ऐसे दौर में तेंदूखेड़ा के नेहरू ठेकेदार द्वारा बंदरों के लिए सब्जी पानी का इंतजाम करके मानवीय उदाहरण पेश किया है।
अखबारों के जरिए बंदरों के भूखे प्यासे बदहाल रहने की जानकारी लगने पर रविवार को नेहरू ठेकेदार अपने बच्चों के साथ बग दरी के जंगल में भारी मात्रा में टमाटर और हरे भट्टा लेकर पहुंचे साथ ही वह ठंडे पानी की कैन भी ले जाना नहीं भूले। उन्होंने सड़क किनारे उपरोक्त सामग्री पहुंचाने के बाद पेड़ों के पास में इसे रखकर बंदरों को बुलाना शुरू किया और फिर देखते ही देखते बंदरों के समूह टमाटर तथा भट्टे पर टूट पड़े। इस दौरान वह अपने बच्चों को भी साथ लिए थे। जिससे बंदर भी अपने बच्चों को वहा लाने से नहीं चूके।
 खास बात यह रही कि खाने के बाद बंदर प्यास बुझाते और आशीष देते बच्चों के साथ  खेलते नजर आए। नेहरू ठेकेदार की सेवा भावना अन्य लोगों के लिए प्रेरणा तथा उदाहरण बन सकता है। आपके आसपास के क्षेत्र में भी यदि कोई वन्य प्राणी अन्य कोई गाय बैल आदि पशु के खाने पीने का इंतजाम नहीं हो तो लाक डाउन के दौर में सेवा भावना दिखाकर इनके भोजन का इंतजाम करने से नहीं चूके। क्योंकि ऐसा मौका सबको नही मिलता और ना बार-बार मिलता है। विशाल रजक की रिपोर्ट

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