अजब प्रेम की गजब कहानी.. मायका ससुराल नजदीक था इसलिए दूर होते चले गए पति पत्नी.. फिर व्हाट्सएप के जरिए शुरू हुई बातचीत.. तलाक के पहले लोक अदालत में कुटुंब न्यायधीश के समक्ष थामा एक दूजे का हाथ..

बिछुड़े दंपति ने लोक अदालत में थामा एक दूजे का हाथ
दमोह। बुंदेलखंड में चर्चित"दूर के ढोल सुहावने" की  कहावत अनेक मामलों में सटीक बैठती है। जिनमें एक ससुराल का दूर होना भी कहा जा सकता है। अक्सर नजदीकी ससुराल वालों के विवाह संबंध में खटास आज आने की खबरें सामने आती रहती है वही व्हाट्सएप के जरिए दूर के रिश्ते कब पास आ जाते हैं पता ही नहीं चलता। ऐसा ही कुछ मामला लोक अदालत में सामने आया जब विवाह की कुछ महीनों बाद ही ससुराल नजदीक होने की वजह से दूर होते चले गए दंपत्ति को पहले व्हाट्सएप पास में लाया और फिर लोक अदालत ने दोनों को मिलाया।
ये कहानी है बजरिया वार्ड 89 दीपक और विशाखा की। दोनों का व्याह वर्ष 2014 में हुआ था। मायका और ससुराल आसपास होने से मायके वालों की ससुराल में दखलंदाजी के चलते शादी के 2 माह में ही रिश्ते में दरार आ गई और घर टूट गया। जिसके बाद पिछले 5 साल से दोनो पक्षो में मुकदमे बाजी होती रही। और नौबत तालाब तक पहुंच गई। इस बीच अन्तोगत्वा पत्नी ने पिछले 1 साल से व्हाट्सएप पे पति से बातचीत शुरू की। स्टेटस के आदान प्रदान से सुखदुख बांटे। चर्चा करते करते बात साथ रहने तक आ गई। 
इसके अतिरिक्त 2014 से चल रहे लगातार मनमुटाव और मुकदमेबाजी के बाद कई बार पत्नी ने पति दीपक से सुलह की गुजारिश की लेकिन पति दीपक इस बात को लेकर खफा था कि आपने मुकदमे में पूरे घर मेरी माँ भाई भावी आदि को क्यो फसा दिया। अन्तोगत्वा व्हाट्सएप चैटिंग और वीडियो कॉलिंग दोनों के मध्य संवाद का सहारा बना। दोनों के बीच गिले शिकवे और गम गलत करने का दौर व्हाट्सएप और messanger से शुरू हुआ जो देर रात से अलसुबह तक लगातार 1 साल से ज्यादा चला कुछ कदम पत्नी ने उठाये अपनी गलतियों को माना तो वहीँ पति ने वीडियो कॉलिंग से पत्नी के करवाचौथ के व्रत में उसका व्रत खतम करवाया।  लंबे दौर तक चली चैटिंग कलिंग की कवायद रंग लाई,दूरियां कम हुई आखिर में बात दोनों के बीच न्यायालय में चल रहे मुकदमे खत्म करने पे आकर अटक गई जहाँ प्रधान न्यायाधीश कुटुंब न्यायालय ने दोनों पक्षो को समझाइश दी और दोनों खुशी खुशी साथ रहने तैयार हो गए।
अदालत में पहुंचकर आज यह जोड़े परिवार न्यायालय से एक हो गए। माननीय कुटुंब न्यायाधीश राजीव सिंह के समक्ष दोनों ने एक दूसरे का हाथ थाम कर जहां वरमाला पहनाई वही विवाह के समय अग्नि को साक्षी मानकर सात जन्मो तक साथ निभाने की बात भी दोहराई लोक अदालत से एडवोकेट मनीष नगाइच की रिपोर्ट
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