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गढ़ाकोटा के विकास हेतु अपनी जान की आहुति देने वाले युवाओ को शौर्य दिवस पर किया नम आंखों से याद.. 35 साल पहले के संघर्ष की अब भी लोगो के दिलों में ताजा है याद.. तब के छात्र नेता गोपाल भार्गव ने थामी थी संघर्ष की कमान..

 एक शाम शहीदों के नाम का आयोजन किया गया-
 गढ़ाकोटा में कालेज, अस्पताल एवं तहसील भवन की मांग को लेकर नगर के 4 छात्र 5 सितम्बर 1984 को पुलिस की बर्बरता का शिकार होकर विकास के लिए शहीद हो गए थे। उनकी शहादत को याद करते हुए प्रति वर्ष नगर में शौर्य दिवस का आयोजन नगर पालिका द्वारा किया जाता है। जिसमे लोग नगर विकास की मांग को लेकर शहीद हुए लोगो को याद करते हैं।
गढ़ाकोटा के होनहार युवाओं की पुलिस की गोलियों से मौत के बाद तब के छात्र नेता गोपाल भार्गव ने विकास के लिए शतत संघर्ष को जारी रखा था। और जब वह विधायक और विधायक से मंत्री बने तो उन्होंने गढ़ाकोटा के लिए वह सब कुछ करने का प्रयास किये जिसके लिए उनके साथियों ने अपने प्राणों की आहुति दी थी। 
अपने शहीद साथियों की प्रतिमा गढ़ाकोटा में स्थापित कराने वाले गोपाल भार्गव प्रति वर्ष 5 सितंबर को शौर्य दिवस के रूप में आयोजन करके संघर्ष गाथा के दिनों को ना केवल ताजा करते हैं बल्कि नई पीढ़ी को भी एहसास कराते है कि आज के गढ़ाकोटा में जो चमक दमक दिख रही है उसके पीछे किस तरह खून बहा कर युवाओं ने अपनी जान की कुर्बानी दी थी।
शौर्य दिवस पर आयोजित हुए इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में  गढ़ाकोटा वासियों की मौजूदगी के अलावा पूर्व वित्त मंत्री जयंत मलैया, सागर के सांसद राजबहादुर सिंह, डॉ राजेन्द्र चौबे, नपा अध्यक्ष भारत पंडा, जगदीश लहरिया, मनोज तिवारी, जनपद अध्यक्ष संजय दुबे, अधिवक्ता संघ अध्यक्ष जमील कुरेशी सहित शहीदों के परिजन मौजूद रहे। सभी ने शहीदों को याद करते हुए श्रद्धा सुमन अर्पित किए। दीपू भार्गव और उनकी टीम द्वारा अतिथियों तथा शहीदों के परिजनों का चावल श्रीफल भेंट करके सम्मान किया गया।
 5 सितम्बर 1984 को गढ़ाकोटा में कालेज,अस्पताल व तहसील खोलने की मांग पुरजोर तरीके से उठी थी और पूरा विधानसभा क्षेत्र के युवा इस आंदोलन में बढ़चढ़ कर कूद पड़े थे। महीनों तक चले इस आंदोलन ने अपना उग्र रूप ले लिया। इस आंदोलन को पुलिस ने कुचलने की कोशिश की तो आंदोलन ने उग्र रूप धारण कर लिया। 5 सितम्बर को पूरा गढ़ाकोटा नगर पुलिस छावनी में तब्दील हो गया पुलिस ने आंदोलन कर रहे चेतराम कोरी, रफीक भाईजान को गोली मार दी। जिससे उनकी मौके पर मौत हो गयी। उसी दौरान जिले के प्रभारी मंत्री बंशीलाल धृतलहरे सागर आये हुए थे। दो युवा छात्र अपनी मांगों का ज्ञापन देने गए हुए थे। वापस आते वक्त गुल्लाई यादव, अशोक चौबे की सड़क दुर्घटना में मौत हो गयी तो यह आंदोलन ओर उग्र हो गया।

 इस दौरान गढ़ाकोटा में कर्फ्यू लग गया और लोगो को देखते ही गोली मारने के आदेश दे दिये गए।पुलिस ने इस दौरान महिलाओं को घर घुसकर भारी अत्याचार किये। यहा तक कि वर्तमान नेताप्रतिपक्ष गोपाल भार्गव को भी पुलिस ने गोली मारी और वह गाय के गोबर से फिसलकर नीचे गिर गए और पुलिस की गोली गणेश भगवान को लगी इस तरह श्री भार्गव को जीवन दान मिल गया।
 पुलिस ने सेकड़ो लोगों पर प्रकरण दर्ज किया ओर कई लोगो को जेल में डाल दिया गया था। इसी दौरान देश की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गयी थी तो पूरे देश मे इंदिरा लहर चल रही थी।कांग्रेस की देश मे सरकार थी लेकिन ऐसे समय मे इस क्षेत्र की जनता ने अपने नेता गोपाल भार्गव को विधानसभा में विधायक बना कर भेजा। कुछ समय बाद सभी प्रकरणों को भार्गव ने शासन द्वारा वापिस कराया गया था।  गढ़ाकोटा के विकास के लिए अपनी जान की कुर्बानी देने वाले युवाओं की याद में श्री भार्गव ने जहां क्षेत्र के विकास को कराने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी वहीं की प्रतिमाओं को स्थापित कराकर उनकी शौर्य गाथा को नई पीढ़ी के बीच हमेशा के लिए अमर बना दिया। गढाकोटा से रवि सोनी की रिपोर्ट

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