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जिला पंचायत सदस्य अपहरण कांड का पर्दा फाश.. अन्य सदस्यों के साथ एसपी ऑफिस पहुची चंद्रवती ने.. SDM को दिए बयानों में कहा नही किया किसी ने अपहरण..

 पंचायत सदस्य चंद्रवती का नही हुआ था अपहरण-
दमोह। जिला पंचायत अध्यक्ष शिवचरण पटेल के खिलाफ लाए गए अविश्वास प्रस्ताव की वोटिंग के पहले राजनैतिक उठापटक तेज हो गई है। कल जिला पंचायत उपाध्यक्ष के चुनाव के दौरान 2 सदस्यों की अनुपस्थिति को उनके अपहरण की आशंका से जोड़ कर शुरू हुई राजनीति उठा पटक आधी रात को बसपा विधायक के दबाव में अपहरण की कहानी में तब्दील हो गई थी। 
जिला पंचायत सदस्य चंद्रवती अठ्या के अपहरण के मामले में पथरिया थाना पुलिस ने उनके पति की रिपोर्ट पर जिला पंचायत के दो अन्य सदस्य राघवेंद्र सिंह ऋषि लोधी और संतोष अठ्या के खिलाफ अपहरण का मामला पंजीबद्ध किया था। मंगलवार सुबह से मीडिया की सुर्खियां बनते ही इस खबर को लेकर सोशल मीडिया पर सनसनी छाई रही।
इधर शाम होते ही जिला पंचायत के अनेक सदस्यों के साथ चंद्रावती अठ्या ने एसपी ऑफिस पहुंचकर यह स्पष्ट कर दिया कि उनका अपहरण नहीं हुआ है। एसपी ऑफिस में चंद्रवती के 6 अन्य सदस्यों के साथ पहुचने की खबर लगते ही पथरिया से बसपा विधायक राम बाई भी एसपी ऑफिस पहुंच गई। उन्होंने चंद्रवती द्वारा दिए जा रहे अपहरण नहीं होने के बयान को अन्य सदस्यों के दबाव में दिया जाना बताया। जिससे देर तक गहमागहमी के हालात बने रहे। 
बाद में चंद्रवती अठ्या को एसपी ऑफिस से पुलिस की कड़ी सुरक्षा के बीच बयान देने के लिए एसडीएम के ऑफिस ले जाया गया। जहा उन्होंने एसडीएम रविंद्र चोकसे के समक्ष बयान दर्ज कराए। जिसमें यह बात निकल कर सामने आई कि उनका अपहरण नहीं हुआ था। बल्कि वह स्वेच्छा से अन्य सदस्यों के साथ में जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव रणनीति के तहत सुरक्षित स्थान पर चली गई थी।  
चंद्रवती द्वारा साफ तौर पर अपहरण नहीं होने की बात कहे जाने के बावजूद बसपा विधायक रामबाई ने उनको एसपी के पास ले जाने अपनी गाड़ी में बैठा लिया था। जिस पर जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि और पथरिया से राम बाई को कड़ी टक्कर देने वाले राव बृजेंद्र सिंह ने आपत्ति दर्ज कराते हुए पुलिस के सामने अपहरण के आरोप लगाए। जिसके बाद पुलिस ने चंद्र वती को अपनी गाड़ी में बैठाया और बयानों के लिए जिला कोर्ट ले गई।जहां मनी न्यायाधीश के समक्ष उनके 164 के बयान दर्ज कराए गए।
 जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की तारीख 12 फरवरी के आने के पहले और कौन से घटना क्रम सामने आएगे इसको लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं सरगम है। वहीं कमलनाथ सरकार की तरह पुलिस प्रशासन भी बसपा विधायक राम बाई को कितनी तवज्जो दे रहा है इसका अंदाजा इस मामले से लगाया जा सकता है। अटल राजेंद्र जैन की रिपोर्ट

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