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जिन प्रतिमाओं को मुनि श्री ने सूर्य मंत्र दिए.. पंच कल्याणक महोत्सव में सांसद प्रहलाद पटेल का स्वागत, पूर्व CM शिवराज सिंह 17 को शामिल होंगे..

 राजा ऋषभदेव को हुआ वैराग्य उतारें कपड़े, हुई दीक्षा-
दमोह। अयोध्या नगरी मैं तब्दील शहर के तहसील ग्राउंंड में इन दिनों श्रीमजजिनेंद्र 1008 पंचकल्याणक गजरथ प्रतिष्ठा महोत्सव आयोजन की धूम छाई हुई है। संत शिरोमणि आचार्य श्री 108 विद्यासागर जी महाराज केे आशीर्वाद एवं मुनि श्री योग सागर एवं अभय सागर महाराज के संघों के सानिध्य में 11 से 17 जनवरी तक चलने वाले इस भव्य आयोजन में प्रतिदिन सुबह 6 बजे से देर रात्रि तक विभिन्न धार्मिक आयोजनों में श्रावक जनों की भीड़ उमड़ने से मेले जैसा माहौल बना हुआ है। मंगलवार को तप कल्याणक के मौके पर जिन प्रतिमाओं को भी दीक्षित करते हुए मुनि संघ के सानिध्य में सूर्य मंत्र प्रदान किए गए।
पंचकल्याणक महोत्सव के पांचवे दिन प्रातः बेला में श्री जी के अभिषेक उपरांत शांतिधारा शांति धारा का सौभाग्य ऋषभ-शुभचंद्र व राकेश जैन अभाना वालों को प्राप्त हुआ। प्रतिष्ठाचार्य विनय भैया ने प्रच्छाल विधि की बारीकियों पर प्रकाश डालते हुए तीर्थराज सम्मेद शिखर पहाड़ी पर लगातार हो रहे कब्जे की चर्चा करते हुए मांगने बालो को दिए जाने वाले एक एक रुपए से पांच सौ रुपये तक हो जाने की स्थिति से अवगत कराते हुए एक रुपए देने वालों को हालात के लिए जिम्मेदार बताया
प्रथम देव पूजा के बाद 24 तीर्थंकर भगवान की जन्म कल्याणक पूजन प्रतिष्ठाचार्य विनय भैया, पंडित सुरेश शास्त्री एवं आशीष-अभिषेक शास्त्री के सानिध्य संपन्न की गईं। इसके बाद आचार्य श्री का पूजन भक्ति भाव के साथ संपन्न हुआ। इस मौके पर विधान के महापात्रो के साथ इंद्र इंद्राणीयो एवं नसिया मन्दिर बालिका मंडल ने पूरे भक्ति भाव के साथ थाल सजाकर बारी बारी से जल, चंदन, अक्षत, पुष्प, नववैध, दीप, धूप, फल अर्घ समर्पित करके गुरु पूजन किया। 
संपूर्ण आयोजन में मनीष मलैया परिवार ने पूजन की द्रव्य सामग्री दान की गई है। आज शास्त्र भेंट करने का सौभाग्य डॉ. पीके जैन परिवार को प्राप्त हुआ। पलंदी जैन मंदिर एवं विजयनगर मंदिर से भी पूजन सामग्री भेंट की गई।इसके बाद मुनि श्री अभय सागर महाराज की धर्म उपदेशना का लाभ श्रावक जनों को अर्जित हुआ।
दोपहर में बालक आदिकुमार के युवावस्था को प्राप्त होने के बाद उनका राज्याभिषेक होता है। राजा ऋषभदेव ने गृहस्थ धर्म अपनाया, विवाह करके भरत-बाहुबली जैसी महापुरुष एवं ब्राम्ही सुंदरी जैसी जगत कल्याणी पुत्रियों को जन्म देकर उनका प्रजा का सम्यक रीति से पालन पोषण किया। बेटी ब्राम्ही को लिपि व सुंदरी को अंक विद्या सिखाकर सृष्टि में शिक्षा पद्धति की स्थापना व प्रचार प्रसार किया एवं प्रजा को जीवन यापन की शिक्षा दी। 

ऋषभदेव तीर्थंकर थें, तीर्थकर स्वयंभू ज्ञानी होते हैं उनका कोई गुरु नहीं होता है उन्हें स्वयं ज्ञान प्रगट होता। इसके बावजूद राज पाठ करते हुए हजारों वर्ष बीत जाने पर भी जब उन को वैराग्य नहीं जागा तो सौधर्म इंद्र को चिंता हुई। नीलांजना नाम की नर्तकी को दरबार में भेजा गया।जिसकी नृत्य करते-करते मृत्यु हो जाने पर महाराज आदिनाथ को नश्वर काया और संसार का आभास और वैराग्य हो गया। इसी के साथ राज पाट राजकुमारो को देकर वस्त्र आभूषण उतार महाराज आदिनाथ वन की और तप करने प्रस्थान कर जाते है। 

महाराज आदिनाथ के तप हेतु जाने के साथ ही पंचकल्याणक प्रतिष्ठा स्थल पर विराजित जिन प्रतिमाओ का भी संस्कार दीक्षा संस्कार मुनि श्री योग सागर एवं अभय सागर जी महाराज संघ के सानिध्य में प्रारंभ किया गया। इस मौके पर जबलपुर नाका स्थित  मन्दिर जी में भी नवीन प्रतिमाओं को प्रतिष्ठित करने की प्रक्रिया प्रारंभ करते हुए सूर्य मंत्र आदि प्रदान किए गए।

मंगलवार  दोपहर दमोह सांसद श्री प्रहलाद पटेल ने पंचकल्याणक महोत्सव में पहुंचकर मुनि संघ के चरणों में श्रीफल भेंट किया एवं आशीर्वाद लिया। गजरथ महोत्सव समिति द्वारा सांसद श्री पटेल का शॉल, श्रीफल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका सम्मान किया गया। 17 जनवरी को पूर्व मुख्यमंत्री भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शिवराज सिंह चौहान भी दोपहर 12 बजे हेलिकॉप्टर से दमोह आकर पंचकल्यानक महोत्सव में शामिल होंगे। बुधवार को महोत्सव केे छटवेें दिन 24 तीर्थंकर के तप कल्याणक की पूजा, मुनि आदि कुमार की दीक्षा व ज्ञान कल्याणक की क्रिया संपन्न होगीअटल राजेंद्र जैन की रिपोर्ट

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